कैसे स्टार्टअप Nawgati बना रहा है फ्यूल स्टेशनों का डिजिटल सिस्टम
CNG की लंबी लाइन से शुरू हुई Nawgati की कहानी अब AI और कंप्यूटर विजन तक पहुंच गई है. कंपनी फ्यूल स्टेशनों की भीड़, CNG ड्राईआउट और संचालन को बेहतर बनाने के लिए रियल टाइम डेटा का इस्तेमाल कर रही है.
हाइलाइट्स
CNG के लिए लाइन की समस्या से Nawgati की शुरुआत हुई.
कंपनी AI से फ्यूल स्टेशनों का संचालन बेहतर कर रही है.
Nawgati को 21 करोड़ की फंडिंग मिल चुकी है.
कंपनी UAE और श्रीलंका में भी विस्तार कर रही है.
भारत में फ्यूल स्टेशन पर इंतजार करना आम बात है. खासकर CNG वाहनों के लिए लंबी लाइन ड्राइवरों के रोजमर्रा के काम का हिस्सा बन चुकी हैं. ड्राइवर के लिए यह सिर्फ समय की बर्बादी नहीं है. सड़क पर बिताए हर घंटे का असर उसकी कमाई पर भी पड़ता है.
इसी समस्या ने BITS Pilani के पूर्व छात्र वैभव कौशिक को फ्यूल रिटेल में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बारे में सोचने पर मजबूर किया. 2019 में नोएडा में इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने CNG कैब ड्राइवरों से इस समस्या के बारे में सुना. बाद में यही आइडिया Nawgati की शुरुआत की वजह बना.
आज फ्यूल स्टेशन से जुड़ी जानकारी को डेटा और AI की मदद से समझने के लिए टेक्नोलॉजी विकसित कर रही है. कंपनी का काम उपभोक्ताओं के साथ-साथ फ्यूल रिटेलर्स और फ्लीट ऑपरेटर्स को भी जोड़ता है.
यह स्टार्टअप YourStory की साल 2023 की Tech30 लिस्ट का हिस्सा रहा है. YourStory हर साल अपने फ्लैगशिप इवेंट TechSparks में आपके लिए कई हज़ारों में से चुनकर लाता है Tech30 लिस्ट में ऐसे 30 स्टार्टअप जो देश को बदल देने के साथ-साथ अरबों की कंपनियां बनने की ताकत रखते हैं.
एक घंटे की लाइन से शुरू हुआ आइडिया
Nawgati का हेडक्वार्टर नोएडा में है. इसकी स्थापना साल 2019 में तीन इंजीनियरों — वैभव कौशिक, आलाप नायर और आर्यन सिसोदिया ने मिलकर की थी. स्टार्टअप की शुरुआत किसी बड़े मार्केट सर्वे से नहीं हुई थी. वैभव ने अपने आसपास एक ऐसी समस्या देखी, जिसका सामना CNG कैब ड्राइवर रोज कर रहे थे.
उनके मुताबिक, एक ड्राइवर करीब 10 घंटे सड़क पर रहता है. इनमें लगभग एक घंटा फ्यूल स्टेशन पर इंतजार करने में चला जाता है. यानी काम के समय का करीब 10 फीसदी हिस्सा लाइन में बीत सकता है.
शुरुआत में वैभव को लगा कि इतनी सामान्य समस्या का कोई समाधान पहले से मौजूद होगा. लेकिन जब उन्होंने इस बारे में और जानकारी जुटाई, तो उन्हें लगा कि फ्यूल रिटेल से जुड़ा डेटा अलग-अलग जगहों पर बंटा हुआ है. इसी आधार पर कंपनी ने शुरुआत से ही खुद को केवल CNG तक सीमित नहीं रखने का फैसला किया.
YourStory से बात करते हुए Nawgati के को-फाउंडर और CEO वैभव कौशिक कहते हैं, “यह आइडिया किसी मार्केट स्टडी से नहीं आया था. मैंने खुद देखा कि ड्राइवर रोज करीब एक घंटा फ्यूल की लाइन में गंवा रहे थे. पहले मुझे लगा कि इतनी बुनियादी समस्या का समाधान जरूर होगा, लेकिन ऐसा नहीं था. फिर समझ आया कि समस्या केवल CNG की नहीं है. यह भारत के फ्यूल रिटेल सिस्टम में डेटा के बिखरे होने की समस्या है.”

Nawgati के को-फाउंडर (L-R) आलाप नायर, वैभव कौशिक, और आर्यन सिसोदिया
कंज्यूमर ऐप से एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म तक
Nawgati ने शुरुआत एक कंज्यूमर प्लेटफॉर्म के तौर पर की थी. इसका उद्देश्य लोगों को फ्यूल स्टेशन की लाइन, फ्यूल की उपलब्धता और कीमत जैसी जानकारी उपलब्ध कराना था.
समय के साथ कंपनी ने अपना फोकस फ्यूल रिटेलर्स और फ्लीट ऑपरेटर्स की जरूरतों पर भी बढ़ाया. इसका Nawgati Fuelling App उपभोक्ताओं को स्टेशन से जुड़ी जानकारी देता है. वहीं Aaveg नाम का एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म फ्यूल रिटेलर्स के लिए बनाया गया है.
Aaveg मौजूदा CCTV कैमरों, डिस्पेंसर, कंप्रेसर, स्टोरेज और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल करता है. कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य स्टेशन पर वाहनों की आवाजाही, लाइन और फ्यूल की मांग को बेहतर तरीके से समझना है.
वैभव के मुताबिक, “हमने शुरुआत CNG की लाइन जैसी एक समस्या से की थी. लेकिन हमारी टेक्नोलॉजी की नींव फ्यूल एग्नोस्टिक रही है. आज हमारे पास उपभोक्ताओं के लिए Nawgati Fuelling App और फ्यूल रिटेलर्स के लिए Aaveg है.”
कैसे काम करती है Nawgati की टेक्नोलॉजी
फ्यूल स्टेशन पर भीड़ कई वजहों से बदलती रहती है. किसी समय कितने वाहन आएंगे, लाइन कितनी लंबी होगी और फ्यूल की मांग कब बढ़ेगी, इसका अनुमान लगाना ऑपरेटरों के लिए चुनौती हो सकता है.
Nawgati कंप्यूटर विजन और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके इस गतिविधि को समझने की कोशिश करती है. Aaveg मौजूदा कैमरों और दूसरे सिस्टम से डेटा लेकर स्टेशन की स्थिति का विश्लेषण करता है.
कंपनी का दावा है कि कुछ हाई-ट्रैफिक स्टेशनों पर इसकी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बाद भीड़ में 10 से 15 फीसदी तक कमी आई है. कंपनी यह भी कहती है कि CNG ड्राईआउट की घटनाओं में 80 फीसदी से ज्यादा की कमी देखी गई है.
हालांकि, ये आंकड़े कंपनी के अपने आकलन पर आधारित हैं. अलग-अलग स्टेशनों की लोकेशन, ट्रैफिक, ऑपरेशनल सिस्टम और फ्यूल डिमांड के आधार पर नतीजे अलग हो सकते हैं.
वैभव कहते हैं, “हमारी कोशिश यह है कि फ्यूल स्टेशन को स्मार्ट बनाने के लिए हर जगह नया हार्डवेयर लगाने की जरूरत न पड़े. Aaveg मौजूदा CCTV, डिस्पेंसर और दूसरे सिस्टम से जुड़कर डेटा को समझता है.”
फंडिंग और रेवेन्यू मॉडल
Nawgati का कारोबार मुख्य रूप से उसके एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म Aaveg के जरिए चलता है. कंज्यूमर ऐप के जरिए कंपनी फ्यूल स्टेशन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराती है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, फ्यूल रिटेल नेटवर्क और फ्लीट ऑपरेटर्स इसके एंटरप्राइज ग्राहक हैं.
कंपनी ने 147 फीसदी CAGR (compound annual growth rate) दर्ज करने की बात कही है. उसका कहना है कि कारोबार बढ़ाने की रणनीति में मौजूदा ग्राहकों के साथ विस्तार पर भी जोर है. कंपनी पहले स्टेशन के ऑपरेशनल प्रदर्शन में सुधार दिखाने और फिर उसी नेटवर्क में अपनी सेवाओं का विस्तार करने की कोशिश करती है.
Nawgati के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर 30 लाख से ज्यादा ऑर्गेनिक साइन-अप हो चुके हैं. कंपनी को मई 2025 में 2.5 मिलियन डॉलर की प्री-सीरीज A फंडिंग भी मिली है.
वैभव कहते हैं, “हमारा विकास केवल नए ग्राहक जोड़ने पर निर्भर नहीं है. हम पहले स्टेशन पार्टनर्स के साथ ऑपरेशनल वैल्यू साबित करते हैं. इसके बाद उसी नेटवर्क में विस्तार करना आसान होता है.”
अंतरराष्ट्रीय विस्तार की तैयारी
Nawgati अब भारत के बाहर भी अपने मॉडल का विस्तार करने की तैयारी कर रही है. कंपनी के अनुसार, उसने UAE और श्रीलंका में रणनीतिक साझेदारी की है.
कंपनी का कहना है कि इन बाजारों में भी फ्यूल स्टेशनों के संचालन, ट्रैफिक मैनेजमेंट और डेटा से जुड़ी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं. ऐसे में वह अपने मौजूदा मॉडल को इन बाजारों में इस्तेमाल करने की संभावना तलाश रही है.
2.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी फ्लीट मैनेजमेंट सॉल्यूशंस के विस्तार, ज्यादा फ्यूल प्रोवाइडर्स तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के लिए कर रही है.
कंपनी के अनुसार, वह 5.2 मिलियन डॉलर की सीरीज A फंडिंग के लिए भी बातचीत कर रही है. प्रस्तावित वैल्यूएशन 70 मिलियन डॉलर से ज्यादा बताई गई है. यह अभी बातचीत के स्तर पर है और इसमें बदलाव हो सकता है.
फ्यूल स्टेशन से मोबिलिटी हब तक
Nawgati का अगला फोकस केवल CNG और पेट्रोल-डीजल स्टेशनों तक सीमित नहीं है. कंपनी EV चार्जिंग और मल्टी-एनर्जी आउटलेट्स को भी अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी कर रही है.
वैभव कहते हैं, “हम फ्यूल स्टेशन को केवल फ्यूल भरने की जगह के तौर पर नहीं देखते. भारत में CNG, EV और दूसरे ऊर्जा विकल्प साथ आगे बढ़ेंगे. इसलिए हमारा प्लेटफॉर्म भी इन सभी को जोड़ने के लिए तैयार हो रहा है.”
फ्यूल रिटेल में बदलाव सिर्फ नई टेक्नोलॉजी अपनाने से नहीं आएगा. स्टेशन नेटवर्क, ऊर्जा के अलग-अलग विकल्प, ग्राहक व्यवहार और सरकारी नीतियां भी इसमें भूमिका निभाएंगी. Nawgati की कोशिश इस बदलते सिस्टम में डेटा को एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की है.
एक साधारण समस्या, यानी फ्यूल स्टेशन की लाइन से शुरू हुई कंपनी अब फ्यूल रिटेल के ऑपरेशनल डेटा और AI-समर्थित समाधानों पर काम कर रही है. आगे इसका मॉडल किस स्तर तक विस्तार करता है, यह उसके तकनीकी समाधान के इस्तेमाल, ग्राहक आधार और नए ऊर्जा विकल्पों के बढ़ते नेटवर्क पर निर्भर करेगा.



