हाथरस की पूजा देवी ने घर से शुरू किया सिलाई का काम, बदली किस्मत
हाथरस की पूजा देवी ने घर से छोटी सिलाई शुरू की थी, जहां रोज 100–200 रुपये मिलते थे. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्होंने कई सिलाई मशीनें खरीदीं और घर में ही एक छोटा गारमेंट यूनिट शुरू किया. आज 10–12 लोग उनके साथ काम कर रहे हैं.
हाथरस में रहने वाली पूजा देवी की जिंदगी लंबे समय तक घर और सिलाई के बीच सिमटी रही. शादी के बाद करीब अठारह से बीस साल तक वह घर से ही कपड़े सिलती रहीं. जो काम मिला, वही कर लिया. कभी फॉल लगाना, कभी छोटे मोटे कपड़े तैयार करना. रोज की कमाई सौ या दो सौ रुपये तक रहती थी. हाथ चलते थे, पर आमदनी स्थिर नहीं थी.
उन्हें सिलाई का हुनर था. लेकिन काम बढ़ाने के लिए मशीन चाहिए थी. और मशीन के लिए पैसा. घर पर अतिरिक्त बोझ डालना आसान नहीं था.
बदलाव की शुरुआत एक फॉर्म भरने से हुई. उन्हें बताया गया कि सहायता मिल सकती है. ऑफिस से फोन आया. बुलाया गया. वहां उनसे पूछा गया कि वह रोज कितना कमा लेती हैं. जब उन्होंने अपनी आमदनी बताई, तो उन्हें समझाया गया कि मशीन आने पर काम बढ़ सकता है.
पूजा देवी मानती हैं कि उस समय डर था. लोन चुकाने का डर. काम न मिलने का डर. उन्होंने कुछ दिन सोचने में लगाए. फिर हिम्मत करके प्रक्रिया पूरी की. बैंक ने आकर उनका काम देखा. सब ठीक पाया. उन्हें यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के तहत आर्थिक सहायता मिली.
मशीन आने के बाद उन्होंने काम को नए तरीके से व्यवस्थित किया. शुरुआत छह मशीनों से की. कुछ ही महीनों में काम बढ़ा तो और मशीनें जोड़ीं. आज उनके घर में दस से बारह लोग रोज काम करते हैं.
यह यूनिट महिलाओं के कपड़े सिलता है. फ्रॉक, पलाजो, गाउन, लहंगा चोली जैसे परिधान तैयार होते हैं. सुबह साढ़े आठ बजे काम शुरू होता है. शाम छह बजे तक चलता है. पूजा देवी खुद हर पीस को देखती हैं. अगर सिलाई ढीली है या नाप में गलती है, तो तुरंत ठीक करवाती हैं. वह कहती हैं, “हर पीस को जाने से पहले मैं जांचती हूं.”
उनके लिए गुणवत्ता सबसे जरूरी है. यही भरोसा बनाए रखता है.
आज उनके यहां तैयार कपड़े सिर्फ हाथरस में नहीं रुकते. ऑर्डर दिल्ली और मुंबई तक जाते हैं. पहले जहां काम कभी आता था, कभी नहीं आता था, अब रोज का एक तय रूटीन है.
पूजा देवी कहती हैं कि इस योजना ने उन्हें आत्मविश्वास दिया. पहले सिलाई घर का छोटा काम माना जाता था. अब यह एक व्यवस्थित यूनिट है. कई परिवारों की रोजी इससे जुड़ी है.
लोन लेने का डर आज भी उन्हें याद है. लेकिन अब मशीनें चलती हैं. लोग रोज काम पर आते हैं. आमदनी नियमित है. यह बदलाव एक दिन में नहीं हुआ. लेकिन धीरे धीरे आया.
हाथरस की पूजा देवी की कहानी दिखाती है कि अगर हुनर है और सही समय पर सहारा मिल जाए, तो घर की चारदीवारी के भीतर भी एक छोटा उद्योग खड़ा किया जा सकता है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



