रायबरेली की टीचर प्रज्ञा सिंह ने शुरू किया अचार और मसालों का कारोबार, गांव की महिलाओं को दे रही रोजगार
रायबरेली की प्रज्ञा सिंह ने यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिले ब्याज मुक्त लोन से अचार और मसालों का कारोबार खड़ा किया. 5 लाख के लोन और महिलाओं के सहयोग से शुरू हुआ यह सफर आज आत्मनिर्भरता और ग्रामीण रोजगार की प्रेरक सफलता कहानी बन चुका है.
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचंदपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत टांडा में एक ऐसी कहानी लिखी जा रही है, जो चुपचाप कई लोगों के जीवन में बदलाव ला रही है. यह कहानी है प्रज्ञा सिंह की. उन्होंने परंपरा और उद्यमिता को जोड़कर एक ऐसा ग्रामीण व्यवसाय खड़ा किया, जिसने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदली बल्कि गांव की कई महिलाओं को भी नई पहचान दी.
आज उनका उद्यम ‘आर्याभी एंटरप्राइजेज’ अचार और ताजे पिसे मसालों के लिए जाना जाता है. लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था. इसकी शुरुआत तीन साल पहले बहुत छोटे स्तर से हुई थी. कुछ महिलाओं के साथ मिलकर घर पर अचार बनाने का काम शुरू किया गया. धीरे धीरे लोगों को स्वाद पसंद आने लगा और मांग बढ़ने लगी.
प्रज्ञा सिंह पहले से व्यवसायी नहीं थीं. वह एक शिक्षक के रूप में काम कर चुकी थीं. बाद में उन्होंने एरिया सेल्स मैनेजर की नौकरी भी की. नौकरी से नियमित आय होती थी और जिंदगी स्थिर चल रही थी. लेकिन समय के साथ घर की जरूरतें बढ़ने लगीं. महंगाई का असर भी महसूस होने लगा. परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं तो उन्होंने सोचना शुरू किया कि अब कुछ नया करना होगा.
प्रज्ञा बताती हैं कि उन्हें लगा कि परिवार की आर्थिक मजबूती के लिए उन्हें खुद भी आगे आना होगा. नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं था. दो बच्चों की जिम्मेदारी थी और आर्थिक सुरक्षा भी सीमित थी. फिर भी उन्होंने जोखिम उठाया. उस समय वह एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई थीं. वहीं से उन्होंने महिलाओं के साथ मिलकर अचार बनाने का काम शुरू किया.
शुरुआत में काम छोटा था, लेकिन मेहनत और गुणवत्ता की वजह से मांग बढ़ती गई. जल्द ही स्थिति ऐसी हो गई कि ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होने लगा. यही वह समय था जब प्रज्ञा को लगा कि अब इस काम को बड़े स्तर पर ले जाना जरूरी है.
उन्हें जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में जानकारी मिली. योजना के तहत लोन के लिए आवेदन करने से पहले उन्होंने बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान से प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र प्राप्त किया. इस प्रशिक्षण ने उन्हें व्यवसाय को समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया.
इसके बाद उन्हें योजना के तहत पांच लाख रुपये का ब्याज मुक्त लोन मिला. उन्होंने अपनी तरफ से सत्तर हजार रुपये भी लगाए. इस योजना की खास बात यह थी कि लोन पर ब्याज नहीं था और शुरुआत के छह महीने तक ईएमआई देने की जरूरत नहीं थी. इससे उन्हें व्यवसाय को संभालने और मजबूत करने का समय मिला. वह कहती हैं कि अगर शुरुआत में ही किस्तों का दबाव होता तो काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता.
फंड मिलने के बाद उत्पादन बढ़ाया गया. बेहतर कच्चा माल खरीदा गया और काम को व्यवस्थित किया गया. धीरे धीरे आसपास की और महिलाएं भी इस काम से जुड़ने लगीं. यह सिर्फ एक बिजनेस नहीं रहा, बल्कि सामूहिक प्रयास बन गया.
काम आगे बढ़ा तो प्रज्ञा ने एक और जरूरत को पहचाना. अचार बनाने के लिए मसाले बाहर से खरीदने पड़ते थे. इससे लागत बढ़ती थी और गुणवत्ता पर पूरा नियंत्रण नहीं रहता था. उन्होंने फैसला किया कि अब मसालों की प्रोसेसिंग खुद की जाएगी.
यहीं से ‘आर्याभी एंटरप्राइजेज’ का नया अध्याय शुरू हुआ. अब यहां साबुत मसालों की सफाई, पिसाई और पैकेजिंग की जाती है. इससे उत्पाद की शुद्धता बनी रहती है और आय का एक नया स्रोत भी तैयार हुआ. आज उनका उद्यम दो पहचान के साथ काम करता है. मसालों के लिए आर्याभी एंटरप्राइजेज और अचार सप्लाई के लिए ‘शक्ति माता’ नाम से उत्पाद बाजार में जाते हैं. मौसम के अनुसार पापड़ और चिप्स जैसे उत्पाद भी बनाए जाते हैं.
प्रज्ञा सिंह की मेहनत को पहचान भी मिली. लखनऊ में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें ‘बेस्ट पिकल मेकर’ के सम्मान से नवाजा गया और दस हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी मिला. यह सम्मान उनके लिए सिर्फ पुरस्कार नहीं था, बल्कि इस बात का प्रमाण था कि गांव से शुरू हुआ काम भी बड़ी पहचान बना सकता है.
आज यह उद्यम कई ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मविश्वास का माध्यम बन चुका है. प्रज्ञा कहती हैं कि उनका लक्ष्य सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनना नहीं था, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था.
एक समय नौकरी छोड़ने का फैसला जोखिम भरा लग रहा था. आज वही फैसला उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. अचार और मसालों से शुरू हुई यह कहानी बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो और सही दिशा मिल जाए, तो गांव से भी बड़ा बदलाव संभव है.
प्रज्ञा सिंह की कहानी दिखाती है कि असली उद्यमिता वही है जो खुद के साथ साथ समाज को भी आगे बढ़ाए.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



