5 लाख के लोन से आत्मनिर्भर बनीं प्रियंका गुप्ता, खड़ा किया फोल्डेबल फर्नीचर बिजनेस
उत्तर प्रदेश के एटा शहर की प्रियंका गुप्ता ने घरों में जगह की कमी को समझते हुए फोल्डेबल और पोर्टेबल फर्नीचर का बिजनेस शुरू किया. मोबाइल पर मिले एक आइडिया, सरकारी योजना और ट्रेनिंग की मदद से वह आज आत्मनिर्भर महिला उद्यमी बन चुकी हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छोटे शहर एटा में प्रियंका गुप्ता ने एक साधारण-सी समस्या को अवसर में बदला. उन्होंने देखा कि घरों और दुकानों में जगह लगातार कम होती जा रही है. बड़े और भारी फर्नीचर हर किसी के लिए उपयोगी नहीं रह गए हैं. इसी जरूरत को समझते हुए उन्हें कॉम्पैक्ट और फोल्डेबल फर्नीचर का आइडिया आया. ऐसा फर्नीचर जो छोटे बॉक्स में पैक हो जाए, आसानी से कहीं भी ले जाया जा सके और कुछ ही मिनटों में असेंबल हो जाए.
मोबाइल पर वीडियो देख शुरू हुआ यह सफर आज एक माइक्रो एंटरप्राइज बन चुका है और उनके लिए आत्मनिर्भरता की पहचान भी है.
वीडियो देख शुरू किया खुद का बिजनेस
प्रियंका का पालन-पोषण ऐसे परिवार में हुआ जहां उनके पति फैमिली बिजनेस संभालते थे. रोजमर्रा के कामकाज को देखते हुए उन्होंने सोर्सिंग, कीमत तय करने और ग्राहकों से बात करने की बुनियादी समझ विकसित की. इसी दौरान मोबाइल पर पोर्टेबल रैक और फोल्डेबल टेबल से जुड़े वीडियो उनके सामने आने लगे.
उन्होंने इन प्रोडक्ट्स को ध्यान से समझा, तुलना की और अपने आसपास के छोटे घरों और दुकानों से इस जरूरत को जोड़ा. यहीं से उन्होंने अपने नाम से फर्म रजिस्टर कराने का फैसला लिया.
प्रियंका कहती हैं कि वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थीं और उद्यमिता ने उन्हें यह आत्मविश्वास दिया.
ट्रेनिंग और सरकारी योजना का फायदा
शुरुआत में पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी. इसी दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में पता चला. चूंकि उनका बैंक खाता पहले से पंजाब नेशनल बैंक में था, इसलिए वह जानकारी लेने बैंक शाखा पहुंचीं. बैंक स्टाफ ने दस्तावेजों को समझने में मदद की और जिला उद्योग केंद्र (DIC) ने उन्हें सात दिन की ओरिएंटेशन ट्रेनिंग दिलाई. इस ट्रेनिंग में बुककीपिंग, पैसे के सही उपयोग और मुनाफा समझने जैसी जरूरी बातें सिखाई गईं.
योजना के तहत प्रियंका को पांच लाख रुपये का ब्याज मुक्त लोन मिला, जिससे उन्हें हर महीने के आर्थिक दबाव से राहत मिली और वह अपने काम पर फोकस कर पाईं.
एक-एक ऑर्डर से बढ़ा कारोबार
प्रियंका का फर्नीचर सादा, किफायती और मॉड्यूलर है. इसे प्लाई बोर्ड और स्टैंडर्ड फिटिंग्स से तैयार किया जाता है. हर बॉक्स के साथ आसान इंस्ट्रक्शन शीट दी जाती है और अधिकतर फर्नीचर दस मिनट के अंदर असेंबल हो जाता है. कई डिजाइन ऐसे हैं जो एक से ज्यादा जरूरतों को पूरा करते हैं. फ्लैट पैक होने की वजह से ट्रांसपोर्ट सस्ता पड़ता है और नुकसान का खतरा भी कम रहता है. बार बार घर बदलने वालों और छोटे फ्लैट्स में रहने वालों के लिए यह फर्नीचर खास तौर पर उपयोगी है.
प्रियंका फिलहाल अपने शहर में मांग को मजबूत करना चाहती हैं और फिर रेफरल के जरिए धीरे धीरे विस्तार की योजना बना रही हैं. वह चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कमाई की दिशा में कदम बढ़ाएं, भले ही शुरुआत छोटी क्यों न हो.
आगे चलकर वह महिलाओं के लिए पार्ट टाइम काम के अवसर भी बनाना चाहती हैं. प्रियंका आज खुद को सिर्फ गृहिणी नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वासी उद्यमी के रूप में देखती हैं. यह छोटा सा उद्यम उन घरों की जरूरत को पूरा कर रहा है जहां जगह कम है और यह दिखाता है कि सही सोच और थोड़ी हिम्मत से बड़ा बदलाव संभव है.
Edited by रविकांत पारीक



