समाज ने 'अनपढ़' का ताना मारा — प्रियंका और कोमल ने कूड़ा उठाकर की पढ़ाई; 10वीं पास
“अनपढ़” कहे जाने वाली दो महिलाओं ने पास की 10वीं की परीक्षा, समाज को दिया करारा जवाब! संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल बनीं पुणे की प्रियंका कांबले और कोमल गायकवाड़. पढ़िए कूड़ा बीनने से क्लासरूम तक का सफर तय करने वाली दो महिलाओं की प्रेरक कहानी.
“अनपढ़” — ये शब्द सालों तक प्रियंका कांबले (Priyanka Kamble) और कोमल गायकवाड़ (Komal Gaikwad) के लिए एक ताना बनकर गूंजता रहा. लेकिन साल 2025 में, दोनों महिलाओं ने इस शब्द को गर्व के तमगे में बदल दिया. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे (Pune) की कूड़ा चुनने (waste pickers) का काम करने वाली ये दोनों महिलाएं अब 10वीं पास (SSC Pass) हैं, और उन्होंने यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और इरादे मजबूत हों तो कुछ भी असंभव नहीं.
प्रियंका कांबले: तीसरी के बाद स्कूल छोड़ा, अब 10वीं पास
27 वर्षीय प्रियंका कांबले, कभी स्कूल छोड़ने को मजबूर हुई थीं. शादी के बाद ससुरालवालों से “अनपढ़” कहकर अपमानित होना उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया था. लेकिन इस अपमान ने ही उनके अंदर एक आग जलाई.
पुणे आने के बाद, प्रियंका ने SWaCH सहकारी संस्था के साथ काम करते हुए 2022 में रामाबाई रानाडे स्कूल में दाखिला लिया. दिन में कूड़ा बीनने, बेटे के लिए खाना बनाने और फिर स्कूल जाने की जद्दोजहद को उन्होंने मुस्कुराते हुए झेला.
SSC परीक्षा में उन्होंने 48% अंक हासिल किए. उनके पति ने फोन कर बधाई दी और मिठाई बांटने को कहा — ये पल उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. अब उनका सपना है कि वे आंगनवाड़ी सेविका बनें और महिलाओं-बच्चों के लिए काम करें.
कोमल गायकवाड़: पति खोया, हौसला नहीं! 58% अंकों से 10वीं पास
26 साल की कोमल गायकवाड़ की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं. शादी के बाद अक्सर ससुराल में उन्हें “अनपढ़” कहकर ताना मारा जाता. कोविड महामारी के दौरान पति की मौत और प्रेग्नेंसी ने उनकी दुनिया तोड़ दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
कोमल ने रात के स्कूल में दाखिला लिया और दिनभर कूड़ा चुनने के बाद रात में पढ़ाई की. मेहनत रंग लाई और उन्होंने SSC में 58% अंक प्राप्त किए.
उनके लिए सबसे गर्व का पल था जब उनकी बेटी ने गर्व से उन्हें गले लगाया. अब कोमल जूनियर कॉलेज में पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, ताकि अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य दे सकें.
समाज को दिया करारा जवाब
प्रियंका और कोमल की ये जीत सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं है — ये उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा की कहानी है, जो समाज द्वारा सीमित कर दी जाती हैं. उन्होंने साबित किया है कि “अनपढ़” होना एक स्थिति है, स्थायी पहचान नहीं. उनका संदेश साफ है: ताने झेलना आसान है, लेकिन उन्हें जवाब देना असली ताकत है. सीखना कभी बंद नहीं होता. हर महिला के पास अपनी किस्मत खुद लिखने की ताकत होती है.
(feature image: TOI)



