Zepto IPO: 8,010 करोड़ रु जुटाने की तैयारी, जमा किए अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर
Zepto ने अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया है. इसके तहत कंपनी अब 8,010 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इसके अलावा मौजूदा निवेशक 11.34 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री भी करेंगे.
क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है. कंपनी ने अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल किया है. इसके तहत अब 8,010 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इसके अलावा मौजूदा निवेशक 11.34 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री भी करेंगे.
यह आईपीओ बाजार में काफी चर्चा का विषय माना जा रहा है. इसकी वजह यह है कि Zepto देश के तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स बाजार में Blinkit और Instamart जैसी बड़ी कंपनियों से सीधी प्रतिस्पर्धा कर रही है.
कंपनी के कुछ प्रमुख निवेशक इस ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपने शेयर बेचेंगे. इनमें Nexus Ventures, Contrary ZEP Holdings, Razor Ventures Zepto, Kaiser Foundation Hospitals और Kaiser Permanente Group Trust शामिल हैं.
इससे पहले, बीते माह खबर आई कि कंपनी इस साल जुलाई में अपना ₹11,000 करोड़ का IPO ला सकती है.
Zepto की शुरुआत साल 2020 में आदित पालीचा और कैवल्य वोहरा ने की थी. महज कुछ वर्षों में कंपनी ने तेजी से विस्तार किया है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 22,624 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 11,110 करोड़ रुपये था.
हालांकि, कंपनी अभी भी घाटे में है. वित्त वर्ष 2026 में उसका घाटा बढ़कर 5,905 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 4,700 करोड़ रुपये था.

कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल नए डार्क स्टोर खोलने, टेक्नोलॉजी को मजबूत बनाने, मार्केटिंग बढ़ाने और संभावित अधिग्रहणों के लिए किया जाएगा.
अपने दस्तावेज में Zepto ने कहा है कि भारत का किराना बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है. पहले लोग पारंपरिक दुकानों पर निर्भर थे. इसके बाद संगठित रिटेल, ऑनलाइन खरीदारी और निर्धारित समय वाली डिलीवरी का दौर आया. अब क्विक कॉमर्स इस बदलाव का नया चेहरा बन चुका है.
कंपनी का कहना है कि ग्राहक अब तेजी से डिलीवरी, बेहतर गुणवत्ता, ज्यादा विकल्प और सुविधाजनक खरीदारी चाहते हैं. इसी मांग ने क्विक कॉमर्स को तेजी से बढ़ने का अवसर दिया है.
दस्तावेज के अनुसार, भारत का ऑनलाइन ग्रॉसरी बाजार वर्ष 2025 में 0.9 से 1.1 ट्रिलियन रुपये के बीच पहुंच चुका है. इसके बावजूद बाजार में इसकी हिस्सेदारी केवल 1.7 से 2 प्रतिशत के आसपास है. यह अमेरिका और चीन जैसे देशों की तुलना में काफी कम है, जहां ऑनलाइन ग्रॉसरी की पहुंच क्रमशः लगभग 12 प्रतिशत और 7 प्रतिशत है.
पिछले तीन वर्षों में क्विक कॉमर्स के ग्रॉसरी कारोबार में लगभग 78 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2025 तक इसका सकल व्यापार मूल्य यानी जीएमवी लगभग 685 अरब रुपये तक पहुंच गया.
Zepto का मानना है कि इतनी तेज वृद्धि के बावजूद भारत में क्विक कॉमर्स बाजार अभी शुरुआती दौर में है. खासकर देश के शीर्ष 50 शहरों में अभी भी बड़े अवसर मौजूद हैं. यही वजह है कि कंपनी आने वाले वर्षों में विस्तार पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी कर रही है.
अब निवेशकों की नजर Zepto के आईपीओ पर टिकी हुई है, क्योंकि यह भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम और तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है.



