बर्तन धोने वाले के बेटे ने पास की NEET परीक्षा, श्रवण कुमार बनेंगे डॉक्टर
राजस्थान के श्रवण कुमार, एक बर्तन धोने वाले के बेटे, ने NEET-UG 2025 परीक्षा में तीसरे प्रयास में सफलता पाई. गरीबी, मजदूरी और संघर्ष के बीच पढ़ाई जारी रखकर उन्होंने 556 अंक हासिल किए. उनकी यह कहानी बताती है कि सच्ची लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है.
राजस्थान (Rajasthan) के रेगिस्तान में बसी एक छोटी-सी झोपड़ी (mud house) में, जहां छत टपकती है, दीवारें मिट्टी की हैं और हर दिन दो वक्त की रोटी जुटाना भी एक चुनौती है — वहीं से निकली है एक ऐसी कहानी जो लाखों लोगों को उम्मीद और हौसले की नई रोशनी दे रही है. इस झोपड़ी में रहने वाले श्रवण कुमार (Shrawan Kumar) ने NEET UG 2025 पास करके न केवल अपने परिवार की किस्मत बदली है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है.
बालोतरा जिले की ग्राम पंचायत नरेवा (खट्टू) के निवासी श्रवण कुमार पुत्र रेखाराम सियाग ने NEET-2025 परिणाम में 556 अंक के साथ देश भर में 9754वीं रैंक हासिल करके वो कर दिखाया, जो कभी केवल सपना लगता था.
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, श्रवण के पिता रेखाराम सियाग शादी-ब्याह में बर्तन धोते हैं और खेती के मौसम में मजदूरी करते हैं. उसी मजदूरी के पैसों से परिवार चलता था — मां, दादी, छोटी बहन और खुद श्रवण. कई बार घर में खाने को कुछ नहीं होता था, और पढ़ाई के लिए किताबें या कोचिंग का खर्च उठाना तो नामुमकिन जैसा लगता था. लेकिन इसी अभाव और गरीबी के बीच श्रवण ने सपना देखा — डॉक्टर बनने का, और उसी सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की.
तीन साल तक लगातार प्रयास करने के बाद, तीसरे प्रयास में श्रवण ने NEET (National Eligibility-cum-Entrance Test) में 556 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 9754 तथा ओबीसी कैटेगरी रैंक 4071 के साथ चयनित हुए. उनकी इस सफलता ने न केवल उनके परिवार को गर्व से भर दिया, बल्कि पूरे गांव के लिए एक प्रेरणा बन गई.
संघर्षों से भरा बचपन, पढ़ाई के साथ की मजदूरी
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्कूल से पढ़े श्रवण ने 10वीं में 97% और 12वीं में 87.80% अंक हासिल किए, लेकिन आर्थिक तंगी ने आगे की पढ़ाई की राह बंद कर दी. ऐसे समय में ‘Fifty Villagers’ (फिफ्टी विलेजर्स) नाम की एक एनजीओ ने श्रवण की मदद की और उनकी 11वीं-12वीं की पढ़ाई और NEET की तैयारी का पूरा खर्च उठाया.
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
पहले प्रयास में 519 अंक मिले और दूसरे में 620, लेकिन दोनों बार कटऑफ से पीछे रह गए. फिर भी श्रवण रुके नहीं. डॉक्टर भरत सारण और शिक्षक चिमनाराम ने उन्हें हौसला दिया और तीसरे प्रयास में उन्होंने इतिहास रच दिया.
गांव में जश्न का माहौल, सांसद ने दी बधाई
जब रिजल्ट आया, श्रवण के पिता अपनी झोपड़ी की टूटी छत ठीक कर रहे थे. बेटे की सफलता की खबर सुनकर उन्होंने भावुक होकर कहा, “अब मुझे बर्तन नहीं धोने पड़ेंगे.” गांव में मिठाइयों का दौर चला और सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने भी सोशल मीडिया पर श्रवण को बधाई दी.
श्रवण की कहानी बताती है कि सच्ची लगन, निरंतर प्रयास और समाज के सहयोग से कोई भी बच्चा अपनी किस्मत खुद लिख सकता है. यह सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि लाखों गरीब परिवारों के सपनों की उम्मीद है.
बता दें कि राजस्थान के महेश कुमार ने ‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा- स्नातक' (नीट-यूजी — NEET UG) में शीर्ष स्थान हासिल किया है, जबकि मध्यप्रदेश के उत्कर्ष अवधिया ने दूसरा स्थान हासिल किया है. इस मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल कुल 22.09 लाख परीक्षार्थियों में से 12.36 लाख से अधिक अभ्यर्थी पास हुए हैं.
(feature image: instagram/UpscTheMission)




