दशरथ सिंह: 16 साल आर्मी में रहे, अब 55 की उम्र में 138 डिग्रियां... 3 PhD और 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड
कभी 10वीं के बाद पढ़ाई छूटती नजर आई थी. आज वही दशरथ सिंह 138 डिग्रियों के साथ एक मिसाल बन चुके हैं. सेना की नौकरी के बीच और रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा. यह कहानी जुनून, धैर्य और खुद को साबित करने की है.
राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो पढ़ाई के मायने बदल देती है. यह कहानी है दशरथ सिंह (Dashrath Singh) की. एक पूर्व सैनिक, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद आराम करने की जगह किताबों को अपना साथी बना लिया.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दशरथ सिंह आज 55 साल के हैं. उनके पास 138 डिग्रियां, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट हैं. आमतौर पर लोग एक या दो डिग्री लेकर अपनी पढ़ाई पूरी मान लेते हैं, लेकिन उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया.
हाल ही में उन्होंने Indira Gandhi National Open University (IGNOU) के दीक्षांत समारोह में वैदिक अध्ययन में मास्टर डिग्री हासिल की. खास बात यह है कि उन्होंने यह डिग्री डिस्टिंक्शन के साथ पूरी की.
दशरथ सिंह का बचपन आसान नहीं था. उनका जन्म राजस्थान के खीरोड़ गांव में एक किसान परिवार में हुआ. परिवार में पढ़ाई का माहौल नहीं था. उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई की. इसके बाद आगे की पढ़ाई उनके लिए एक सपना बनकर रह गई. पैसों की कमी सबसे बड़ी बाधा थी.
साल 1988 में उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. उन्होंने भारतीय सेना (Indian Army) जॉइन कर ली. अगले 16 साल तक उन्होंने पंजाब, जम्मू कश्मीर और कई अन्य जगहों पर देश की सेवा की.
लेकिन उनके मन में एक बात हमेशा रहती थी. उन्हें लगता था कि उनकी पढ़ाई अधूरी है. यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही. जब भी उन्हें सालाना दो महीने की छुट्टी मिलती, वह घर आकर आराम नहीं करते थे. वह पढ़ाई करते थे.
साल 2004 में सेना से रिटायर होने के बाद उनका यह जुनून और तेज हो गया. उन्होंने सबसे पहले बीकॉम किया. इसके बाद एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी और बीएड जैसी डिग्रियां नियमित छात्र के रूप में पूरी कीं. साथ ही उन्होंने कई कोर्स ओपन यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों से किए.
आज उनकी उपलब्धियां हैरान कर देती हैं. उनके पास तीन पीएचडी हैं. सात ग्रेजुएशन डिग्रियां हैं. 46 पोस्टग्रेजुएशन डिग्रियां हैं. 23 डिप्लोमा हैं. सेना से जुड़े सात कोर्स हैं और 52 सर्टिफिकेट हैं.
दशरथ सिंह का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई सिर्फ डिग्रियां इकट्ठा करने के लिए नहीं की. उनके पीछे एक मकसद था. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने महसूस किया कि सैनिकों के लिए कुछ करना चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने कानून की पढ़ाई की.
आज वह आर्मी के सप्त शक्ति कमांड में लीगल एडवाइजर के रूप में काम करते हैं. वह सेवा में मौजूद और रिटायर हो चुके सैनिकों के केस संभालते हैं.
वह दावा करते हैं कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए हैं. इनमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और अन्य संस्थाओं से मान्यता शामिल है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
फिर भी उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है. यह कहानी बताती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर सीखने की भूख जिंदा है तो कोई भी मंजिल दूर नहीं.
दशरथ सिंह ने यह साबित कर दिया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. और जब इरादा मजबूत हो, तो एक गांव का लड़का भी 138 डिग्रियों का मालिक बन सकता है.




