8वीं में खोली दुकान, आज हैं आयुर्वेदिक ब्रांड के मालिक — राजस्थान के हरि राम रिणवां की कहानी
यह कहानी है राजस्थान के हरि राम रिणवां की, जिन्होंने बचपन के छोटे कारोबार से सीख लेकर Ashpveda जैसे आयुर्वेदिक ब्रांड की नींव रखी. परंपरागत ज्ञान को आधुनिक जरूरतों से जोड़ते हुए उन्होंने भरोसे, शोध और धैर्य के साथ एक अलग पहचान बनाई.
हर बड़े सफर की शुरुआत अक्सर बहुत साधारण होती है. राजस्थान के हरि राम रिणवां (Hari Ram Rinwa) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे हरि राम ने बचपन से ही जिम्मेदारी को करीब से देखा. घर की परिस्थितियों ने उन्हें जल्दी समझा दिया कि मेहनत और भरोसा ही आगे बढ़ने का रास्ता है.
आठवीं कक्षा में उन्होंने अपनी बचत से एक छोटी किराना दुकान शुरू की. यह कदम किसी बड़े सपने का हिस्सा नहीं था, बल्कि सीखने की शुरुआत थी. दुकान चलाते हुए उन्होंने ग्राहक से बात करना सीखा. रोजमर्रा की चुनौतियों को समझा. सामान का हिसाब रखा. भरोसे की अहमियत जानी.
हरि राम कहते हैं, “वह छोटी दुकान मेरी पहली बिजनेस स्कूल थी. वहां मैंने सीखा कि कारोबार सिर्फ मुनाफे का खेल नहीं, रिश्तों का मामला भी है.”
यही अनुभव उनके भीतर उद्यमिता की सोच बनाते गए. पढ़ाई के साथ यह व्यवहारिक समझ जुड़ती रही. धीरे धीरे उन्हें एहसास हुआ कि बिजनेस का मतलब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि भरोसा और लंबी सोच है.
राजस्थान की धरती हमेशा से आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा की कहानियों से भरी रही है. राजवैद्यों की परंपरा ने हरि राम को गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने देखा कि कभी शाही परिवारों में इस्तेमाल होने वाले आयुर्वेदिक नुस्खे अब किताबों और सीमित दायरों में सिमट गए हैं.
यहीं से एक सवाल पैदा हुआ. क्या इन पारंपरिक फॉर्मूलेशन को आधुनिक जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है. क्या पुराने ज्ञान को नए तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है.
हरि राम कहते हैं, “मेरा मानना था कि असली आयुर्वेद को सही रूप में पेश करना जरूरी है. अगर उसे आधुनिक रूप दिया जाए तो वह आज की जिंदगी में भी फिट बैठ सकता है.”
इसी सोच ने साल 2019 में उन्होंने Ashpveda की नींव रखी. यह विचार किसी एक दिन में नहीं आया. यह धीरे धीरे बना. इंडस्ट्री के करीब काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि बाजार में मौजूद कई उत्पाद या तो शोध आधारित नहीं थे या फिर उनमें पारदर्शिता की कमी थी. उन्हें लगा कि अगर असली आयुर्वेद को सम्मान के साथ पेश करना है, तो अपना मंच बनाना ही होगा.
Ashpveda की शुरुआती सोच साफ थी. आयुर्वेद को आसान बनाना है, लेकिन उसकी असलियत को खोए बिना. आज का उपभोक्ता तेज जिंदगी जीता है. उसके पास समय कम है, लेकिन वह असरदार और सुरक्षित उत्पाद चाहता है.
ब्रांड ने चरक संहिता जैसे पारंपरिक ग्रंथों से प्रेरणा ली. साथ ही आधुनिक टेक्सचर, खुशबू और उपयोग में आसान फॉर्मेट तैयार किए गए. यह संतुलन ही Ashpveda की पहचान बना.
हरि राम कहते हैं, “हमारा लक्ष्य आयुर्वेद को सरल बनाना था, कमजोर नहीं. पुरानी समझ और नई सुविधा साथ चल सकती है.”
शुरुआती निवेश भी सीमित था. कंपनी पूरी तरह बूटस्ट्रैप रही. डायरेक्टर्स की बचत से शुरुआत हुई. बाहरी निवेश के बजाय उन्होंने धीमी लेकिन मजबूत ग्रोथ को चुना. उनका मानना था कि जल्दबाजी ब्रांड की आत्मा को कमजोर कर सकती है.
आज कंपनी का बिजनेस मॉडल कई चैनलों पर आधारित है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ऑफलाइन स्टोर, फ्रेंचाइजी और कॉर्पोरेट ऑर्डर जैसे रास्ते इसके हिस्से हैं. स्किनकेयर और गिफ्टिंग प्रोडक्ट्स इसकी प्रमुख कैटेगरी हैं. इनहाउस मैन्युफैक्चरिंग की वजह से मार्जिन बेहतर रहते हैं और गुणवत्ता पर नियंत्रण बना रहता है.
प्रीमियम आयुर्वेदिक ब्रांड बनाना आसान नहीं था. बाजार पहले से भरा हुआ था. ग्राहकों के मन में शक भी था. सबसे बड़ी चुनौती भरोसा बनाना थी. लोगों को समझाना था कि परंपरा और गुणवत्ता साथ चल सकती है.
हरि राम मानते हैं, “शुरुआत में ग्रोथ धीमी लगी, लेकिन हमने शॉर्टकट नहीं चुना. आज वही फैसला हमारी ताकत बना.”
सप्लाई चेन को मजबूत रखना, शुद्ध सामग्री जुटाना और ग्राहकों को शिक्षित करना एक साथ चलने वाली प्रक्रिया थी. कंपनी ने सस्टेनेबिलिटी और रिसर्च को अपनी नींव बनाया. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और ट्रैकेबल सोर्सिंग जैसे कदम इसी सोच का हिस्सा हैं.
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने स्थिर गति से विकास किया है. हरि राम के मुताबिक ब्रांड लगभग दो गुना की रफ्तार से बढ़ रहा है. भारत के साथ कनाडा और यूएई जैसे बाजारों में भी रुचि दिखाई दे रही है.
आने वाले समय में Ashpveda नए स्किनकेयर और फ्रेगरेंस प्रोडक्ट्स पर काम करना चाहता है. भारत में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों नेटवर्क मजबूत करने की योजना है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आयुर्वेद को नई पहचान देने का लक्ष्य भी है.
हरि राम कहते हैं, “हम चाहते हैं कि दुनिया आयुर्वेद को सिर्फ परंपरा नहीं, एक भरोसेमंद समाधान के रूप में देखे.”
एक छोटी किराना दुकान से शुरू हुआ सफर आज एक ऐसे ब्रांड तक पहुंचा है जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.
इस कहानी की सबसे खास बात यह है कि यहां चमकदार दावों से ज्यादा भरोसे की बात होती है. हरि राम रिणवां का सफर बताता है कि उद्यमिता हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि साफ सोच और लगातार मेहनत से बनती है.
आखिर में उनकी एक बात इस पूरी यात्रा का सार बन जाती है. “कारोबार में असली ताकत भरोसे की होती है. अगर वह बन गया, तो सफर अपने आप आगे बढ़ता है.”



