ThunderPlus: चार्जिंग की समस्या से जन्मा करोड़ों का मॉडल
IIT और MIT की पढ़ाई, कॉर्पोरेट अनुभव और एक मजबूत विजन के साथ राजीव वाईएसआर ने ThunderPlus की शुरुआत की. जानिए कैसे यह EV स्टार्टअप भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा बदल रहा है और तेजी से ग्रोथ हासिल कर रहा है.
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की चर्चा अब सिर्फ भविष्य की बात नहीं रही. सड़कों पर ईवी की संख्या बढ़ रही है. लोग पर्यावरण और खर्च दोनों को लेकर सजग हो रहे हैं. लेकिन इस बदलाव के रास्ते में एक बड़ी रुकावट लंबे समय तक बनी रही. वह थी चार्जिंग की चिंता. इसी चिंता को अवसर में बदलने का काम किया राजीव वाईएसआर ने.
राजीव वाईएसआर, हैदराबाद स्थित EV स्टार्टअप ThunderPlus के Executive Director और CEO हैं. उनकी कहानी केवल एक कंपनी खड़ी करने की नहीं है. यह सोच, अनुभव और सिस्टम को समझने की कहानी है. उन्होंने तकनीक, नीति और बिजनेस को जोड़कर ऐसा मॉडल बनाया जो भारत की जरूरतों के हिसाब से तैयार हुआ.
उनका मानना है, “उद्यमिता (ऑन्त्रप्रेन्योरशिप) मेरे लिए सिर्फ कंपनी शुरू करना नहीं था. मेरा मकसद बड़े स्तर की समस्याओं का हल ढूंढना था.” यही सोच आगे चलकर ThunderPlus की नींव बनी.
इंजीनियरिंग से उद्यमिता तक का सफर
राजीव का बचपन समस्या हल करने की सोच के साथ बीता. उन्हें चीजों को समझना और सिस्टम के पीछे की प्रक्रिया जानना पसंद था. यही रुचि उन्हें इंजीनियरिंग की ओर ले गई. उन्होंने IIT Madras से B.Tech और M.Tech की पढ़ाई की. यहां उन्हें तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने का मौका मिला.
इसके बाद MIT Sloan School of Management में बिताया समय उनके नजरिए को और व्यापक बना गया. वहां उन्होंने समझा कि इनोवेशन, बिजनेस रणनीति और नीतियां कैसे मिलकर बदलाव लाती हैं.
राजीव कहते हैं, “मैंने हमेशा देखा कि भारत की मोबिलिटी, ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई हैं. इन्हीं सवालों ने मुझे उद्यमिता की ओर धकेला.”
उनका करियर भी काफी विविध रहा. Bosch, Mahindra, TVS Motors, Gati और ETO Motors जैसी कंपनियों में उन्होंने नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभाईं. इससे उन्हें ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग से लेकर सप्लाई चेन और बड़े पैमाने पर ऑपरेशन तक का अनुभव मिला.
सरकारी एजेंसियों और नीति निर्माताओं के साथ काम करने से उन्होंने ईवी इकोसिस्टम की असली चुनौतियों को करीब से देखा. धीरे धीरे एक बात साफ हुई. समस्या वाहन की नहीं, चार्जिंग की है.
ThunderPlus की शुरुआत
जब इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में आने लगे तो लोगों में उत्साह था. लेकिन भरोसा कम था. लोग पूछते थे कि चार्ज कहां करेंगे. कितनी देर लगेगी. रास्ते में चार्जिंग मिलेगी या नहीं.
राजीव को यहीं मौका नजर आया. उन्होंने महसूस किया कि भारत को एक ऐसी कंपनी चाहिए जो सिर्फ चार्जर बेचने तक सीमित न रहे. बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण और संचालन तक सब कुछ खुद संभाले.
इसी सोच के साथ 2024 में ThunderPlus की शुरुआत हुई.
राजीव बताते हैं, “ईवी अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट चार्जिंग कॉन्फिडेंस की कमी थी. हमने उसी पर काम शुरू किया.”
कंपनी ने शुरुआत में अपने संसाधन प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग पर लगाए. शुरुआती निवेश संस्थापक स्तर से आया. लक्ष्य साफ था. मजबूत आधार तैयार करना. तेज प्रचार नहीं, बल्कि टिकाऊ ढांचा बनाना.
आज ThunderPlus AC और DC चार्जर डिजाइन और मैन्युफैक्चर करता है. कंपनी चार्जिंग स्टेशन स्थापित भी करती है और उन्हें खुद ऑपरेट भी करती है. यही वर्टिकली इंटीग्रेटेड मॉडल इसकी खास पहचान है.
बिजनेस मॉडल और बढ़ता नेटवर्क
ThunderPlus का रेवेन्यू मॉडल चार मजबूत स्तंभों पर टिका है. पहला है चार्जर मैन्युफैक्चरिंग. दूसरा है EPC प्रोजेक्ट, जहां बड़ी कंपनियों और संस्थानों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगाया जाता है. तीसरा है चार्ज पॉइंट ऑपरेटर मॉडल, जिसमें पब्लिक और प्राइवेट चार्जिंग स्टेशन शामिल हैं.
चौथा मॉडल सबसे दिलचस्प है. यह फ्रेंचाइजी आधारित विस्तार है. इसमें स्थानीय उद्यमी निवेश करके चार्जिंग स्टेशन शुरू कर सकते हैं और नियमित आय कमा सकते हैं.
राजीव कहते हैं, “हम चाहते हैं कि ईवी चार्जिंग सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर न रहे, बल्कि लोगों के लिए कमाई का मौका भी बने.”
कंपनी ने अपने शुरुआती एक साल में ही दस करोड़ रुपये से अधिक का कुल राजस्व पार किया. यह तेजी से बढ़ते बाजार और मजबूत रणनीति का संकेत है.
आज ThunderPlus की मौजूदगी शहरों, हाईवे, मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन और फ्यूल पंप जैसे भरोसेमंद स्थानों तक फैल रही है. इसका मकसद सिर्फ चार्जर लगाना नहीं, बल्कि यूजर्स को भरोसा देना है.

ThunderPlus की टीम
चुनौतियां, साझेदारियां और 2030 का सपना
भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना आसान नहीं था. हर राज्य के नियम अलग हैं. बिजली व्यवस्था भी हर जगह एक जैसी नहीं है. इसके साथ भारतीय मौसम, वोल्टेज उतार चढ़ाव और अलग अलग वाहन श्रेणियां एक अलग चुनौती बनकर सामने आईं.
राजीव मानते हैं, “भारत के लिए भारत जैसा समाधान जरूरी है. हम पश्चिमी मॉडल की नकल नहीं कर सकते.”
ThunderPlus ने इसी सोच के साथ ऐसे चार्जर बनाए जो दोपहिया और तीनपहिया वाहनों के लिए भी तेज और भरोसेमंद हों. Thunder Tej जैसी पहल इसी दिशा का उदाहरण है.
कंपनी की साझेदारियां भी इसकी ताकत हैं. BPCL के साथ काम करने से चार्जिंग स्टेशन फ्यूल नेटवर्क में शामिल हो रहे हैं. दिल्ली मेट्रो और भारतीय रेलवे जैसे संस्थानों के साथ जुड़ाव ने हाई फुटफॉल लोकेशन तक पहुंच बनाई. Tata Motors के साथ सहयोग ने फ्लीट चार्जिंग को मजबूती दी.
आने वाले वर्षों में कंपनी वायरलेस चार्जिंग, मोबाइल चार्जिंग और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट जैसी तकनीकों पर काम कर रही है.
राजीव कहते हैं, “2030 तक चार्जिंग चिंता नहीं रहेगी. वह रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा बन जाएगी.”
उनकी नजर में भारत का ईवी भविष्य मजबूत है. जैसे जैसे वाहन बढ़ेंगे, वैसे वैसे चार्जिंग नेटवर्क भी जीवन का जरूरी हिस्सा बन जाएगा.
ThunderPlus की कहानी केवल बिजनेस ग्रोथ की कहानी नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जो समस्या को गहराई से समझती है और फिर समाधान तैयार करती है. राजीव वाईएसआर ने अपने तकनीकी ज्ञान, कॉर्पोरेट अनुभव और लंबी दृष्टि को मिलाकर एक ऐसा मॉडल बनाया जो भारत की जमीन से जुड़ा हुआ है.
आज जब देश स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है, ऐसे उद्यमी इस बदलाव की असली ताकत बन रहे हैं. राजीव के शब्दों में, “चार्जिंग भविष्य की जरूरत नहीं है. यह आज की जिम्मेदारी है.”
ThunderPlus का सफर अभी जारी है. लेकिन यह साफ है कि भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कहानी में इसका नाम लंबे समय तक याद रखा जाएगा.



