विज्ञान और कानून का संगम: कैसे उत्तर प्रदेश बना रहा है भारत का फॉरेंसिक भविष्य
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना UPSIFS कानून और विज्ञान का अनोखा संगम है. सीएम योगी के विज़न और डॉ. जीके गोस्वामी के नेतृत्व में यह संस्थान साइबर क्राइम, डेटा सुरक्षा और फॉरेंसिक साइंस का भविष्य गढ़ रहा है. “लॉ विद लैब्स” मॉडल के जरिए यह न्याय को डिजिटल युग में नई दिशा दे रहा है.
“नवाबों के शहर” लखनऊ में इतिहास और तहज़ीब की पहचान है. लेकिन अब यह शहर एक नई पहचान भी गढ़ रहा है. यहाँ भारत का पहला ऐसा संस्थान बन रहा है, जहाँ कानून और विज्ञान साथ-साथ पढ़ाए जा रहे हैं. यह है उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), जो डिजिटल युग में न्याय का नया मॉडल तैयार कर रहा है.
इस परियोजना के सूत्रधार हैं डॉ. जीके गोस्वामी, एडीजी (पुलिस) और संस्थान के पहले निदेशक. उनका मानना है कि बढ़ते साइबर अपराध से निपटने का रास्ता सिर्फ एक ही है: विज्ञान, कानून और तकनीक का मेल.
डॉ. गोस्वामी कहते हैं, “साइंस और लॉ (कानून) मिलकर बनाते हैं फॉरेंसिक साइंस. सिर्फ विज्ञान सच को अदालत तक नहीं पहुँचा सकता, इसके लिए कानून भी जरूरी है.”
सीएम योगी का सपना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न से यह संस्थान दो साल पहले शुरू हुआ. बहुत कम समय में यह नवाचार का हब बन गया है.
यहाँ डीएनए डायग्नोस्टिक सेंटर है, जो जले हुए या मिले-जुले सैंपल से भी पहचान कर सकता है. एक AI ड्रोन और रोबोटिक्स लैब है, जो नए तरह के अपराधों की जांच कर रही है. साथ ही, रिसर्च के लिए अटल लाइब्रेरी भी बनाई गई है.
डॉ. गोस्वामी खुद भी अनोखे सफर से गुज़रे हैं. पहले वे कैंसर शोधकर्ता थे, फिर IPS बने. CBI और संयुक्त राष्ट्र में काम किया. बाद में लॉ की पढ़ाई की और फुलब्राइट FLEX अवॉर्ड पाने वाले अकेले भारतीय बने.
वह कहते हैं, “कई लोग मजाक उड़ाते थे कि इतने पढ़े-लिखे होकर पुलिस क्यों जॉइन की. लेकिन पुलिस अशिक्षित क्यों हो? पुलिस को तकनीकी, पेशेवर और संवेदनशील होना चाहिए.”
“लॉ विद लैब्स” मॉडल
संस्थान की सबसे बड़ी खासियत है इसका “लॉ विद लैब्स” मॉडल. इसमें लॉ पढ़ने वाले छात्र लैब में फॉरेंसिक ट्रेनिंग लेते हैं. वहीं साइंस छात्र सबूतों से जुड़े कानून सीखते हैं.
डॉ. गोस्वामी कहते हैं, “फॉरेंसिक साइंस में दो बातें होती हैं — सिद्धांत और प्रक्रिया. सिद्धांत सही हो सकता है, लेकिन प्रक्रिया गलत हुई तो सच खो जाएगा. इसलिए हम दोनों साथ पढ़ाते हैं.”
यह मॉडल दुनिया का ध्यान खींच रहा है. टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ अक्सर कानून नहीं जानते और वकील टेक्नोलॉजी नहीं. लेकिन यहाँ दोनों का संगम है.
साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा
डॉ. गोस्वामी के अनुसार अपराध के तीन दौर रहे हैं. पहले दौर में शारीरिक अपराध यानी ब्लू कॉलर क्राइम थे. इसके बाद वित्तीय धोखाधड़ी यानी व्हाइट कॉलर क्राइम आए. अब तीसरा दौर साइबर क्राइम का है.
वे कहते हैं, “आज आपकी सबसे कीमती चीज डेटा है. मोबाइल खोना अब पर्स खोने से भी डरावना है.”
भारत ने 2017 में राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकार घोषित किया था. अब डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के जरिए डेटा सुरक्षा को मजबूत किया गया है.
उनका संदेश साफ है: “डेटा प्रोटेक्शन और साइबर सिक्योरिटी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. हर दिन नया सीखो, जिज्ञासा ही जीवन है.”
नए आपराधिक कानून और फॉरेंसिक
नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में फॉरेंसिक का बड़ा रोल है. धारा 176(3) के अनुसार गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक सबूत अनिवार्य कर दिए गए हैं.
डॉ. गोस्वामी इसे “क्रांतिकारी बदलाव” मानते हैं. इससे फॉरेंसिक छात्रों के लिए नौकरियाँ बढ़ेंगी और अपराध स्थल की वैज्ञानिक जांच बेहतर होगी.
भविष्य की झलक
संस्थान अब तीन नई अवधारणाओं पर काम कर रहा है. इनमें डिजिटल ऑडिट शामिल है, जिसमें डिवाइस की नियमित जांच होती है. दूसरा है डेटा इंश्योरेंस, जो व्यक्तिगत और संस्थागत डेटा को चोरी से सुरक्षा देता है. तीसरा है फॉरेंसिक्स-एज-ए-सर्विस, जिसमें नागरिक आसानी से ऑन-डिमांड फॉरेंसिक सेवाएं ले सकेंगे. जैसे फूड डिलीवरी ऐप, वैसे ही ऑन-डिमांड फॉरेंसिक सेवा.
डॉ. गोस्वामी कहते हैं, “जहाँ सच चाहिए, वहाँ फॉरेंसिक होगा. कोर्टरूम से लेकर घर तक, यह विज्ञान सबकी ज़िंदगी छुएगा.”
वे याद करते हैं, “जब सीएम ने मुझे यह जिम्मेदारी दी, तब कुछ भी तैयार नहीं था. न स्टाफ, न संसाधन. लेकिन किसी शैक्षिक संस्थान को शुरुआत से बनाने का मौका कितनी बार मिलता है?”
सीएम का बस एक निर्देश था: “इसे विश्वस्तरीय बनाओ.”
आज यह संस्थान सेना और पुलिस को साइबर फॉरेंसिक की ट्रेनिंग दे रहा है. नागरिकों को भी डेटा सुरक्षा सिखा रहा है. जल्द ही यूपी देश का पहला राज्य होगा, जहाँ साइबर क्राइम से निपटने की संपूर्ण रणनीति लागू होगी.
डॉ. गोस्वामी के शब्दों में “न्याय, सत्य और साक्ष्य: यही हमारा त्रिकोण है. न्याय बिना सत्य के नहीं और सत्य बिना साक्ष्य के नहीं. यही फॉरेंसिक साइंस का सार है.”
Edited by Ravi Pareek



