सेमीकंडक्टर क्रांति: यूपी के ग्रेटर नोएडा में बनेगा 3700 करोड़ रु का प्लांट; HCL-Foxconn का जॉइंट वेंचर
इससे पहले भारत में पांच सेमीकंडक्टर यूनिट्स निर्माण की उन्नत अवस्था में हैं और इस छठी यूनिट की स्वीकृति के साथ भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आज भारत सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) के तहत उत्तर प्रदेश में एक और सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना को मंजूरी दे दी है. यह देश में स्वदेशी चिप निर्माण को बढ़ावा देने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
यह नई यूनिट HCL और Foxconn का जॉइंट वेंचर होगी और इसे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट के पास बनाया जाएगा. यह प्लांट मोबाइल फोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, पीसी और अन्य डिस्प्ले युक्त उपकरणों के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन करेगा.
इस सेमीकंडक्टर यूनिट की क्षमता हर महीने 20,000 वेफर्स और 3.6 करोड़ यूनिट्स के उत्पादन की होगी. इस परियोजना में 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जो उत्तर प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग के एक महत्वपूर्ण हब के रूप में उभारने में मदद करेगा.
इससे पहले भारत में पांच सेमीकंडक्टर यूनिट्स निर्माण की उन्नत अवस्था में हैं और इस छठी यूनिट की स्वीकृति के साथ भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है.
भारत सरकार का उद्देश्य है कि सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की जाए, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता घटे. इससे मोबाइल, लैपटॉप, सर्वर, मेडिकल डिवाइस, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस इक्विपमेंट और कंज़्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा.
देश भर के 270 शैक्षणिक संस्थानों और 70 स्टार्टअप्स में छात्र और उद्यमी अत्याधुनिक डिज़ाइन तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इन संस्थानों में विकसित किए गए 20 उत्पादों को पहले ही SCL मोहाली द्वारा "टेप आउट" किया जा चुका है, जो इस क्षेत्र में भारत की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है.
भारत में अब सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक सहयोगी उद्योग भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. दुनिया की अग्रणी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियाँ जैसे कि Applied Materials और Lam Research भारत में अपनी गतिविधियाँ बढ़ा रही हैं. इसके अलावा Merck, Linde, Air Liquide, Inox जैसे गैस और केमिकल आपूर्तिकर्ता भी भारत में निवेश कर रहे हैं.
भारत सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा कर रहा है. उत्तर प्रदेश में स्थापित होने वाली यह नई यूनिट भारत को सेमीकंडक्टर उत्पादन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई तक ले जाने की क्षमता रखती है.
जैसा कि भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने की ओर अग्रसर है, इसलिए यह सेक्टर 2026 तक विभिन्न क्षेत्रों में 10 लाख नौकरियां देने के लिए तैयार है. बीते साल, नवंबर 2024 में प्रकाशित एनएलबी सर्विसेज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मांग विभिन्न श्रेणियों में देखी जाने की उम्मीद है, जिसमें चिप सेमीकंडक्टर निर्माण में अनुमानित 3,00,000 नौकरियां, एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) में लगभग 2,00,000 पद और चिप डिजाइन, सॉफ्टवेयर विकास, सिस्टम सर्किट और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन मैनेजमेंट में अतिरिक्त भूमिकाएं शामिल.


