खेल के शौक ने बनाया सफल व्यापारी, इटावा के एस.पी. गुप्ता की कहानी
इटावा के एस.पी. गुप्ता पिछले तीन दशकों से खेल सामग्री का कारोबार चला रहे हैं. यूपी सरकार की CM YUVA Yojana के तहत मिली आर्थिक मदद से उन्होंने रैकेट स्ट्रिंगिंग मशीन खरीदी, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को नई सुविधा मिली और उनका व्यवसाय और स्थिर हुआ.
इटावा जिले में एस.पी. गुप्ता का नाम खेल सामग्री के कारोबार से जुड़ा हुआ है. पिछले तीस साल से अधिक समय से वह इसी काम में लगे हैं. न उन्होंने पेशा बदला और न ही दिशा. उनका दिन दुकान, ग्राहकों और खेल उपकरणों के बीच गुजरता है.
गुप्ता का काम रैकेट, बैट, कैरम बोर्ड और अन्य खेल सामग्री की बिक्री से जुड़ा है. साथ ही वह स्कूलों और सरकारी संस्थानों को भी सप्लाई करते हैं. हाल के वर्षों में रैकेट स्ट्रिंगिंग का काम भी उनकी दुकान का अहम हिस्सा बन गया है.
गुप्ता बताते हैं कि शुरुआत बहुत छोटी थी. उस समय इटावा में संगठित खेल सामग्री की दुकानें कम थीं. वह मेरठ जाते थे. वहां से सामान खरीदते. बस से पैक कराकर इटावा लाते. फिर स्थानीय खिलाड़ियों और स्कूलों को बेचते.
यह काम आसान नहीं था. बार बार यात्रा करनी पड़ती थी. खर्च और मेहनत दोनों थे. लेकिन इसी दौरान उन्होंने बाजार को समझा. किस सामान की मांग है. कौन सा उत्पाद टिकाऊ है. किस कीमत पर ग्राहक संतुष्ट रहते हैं.
धीरे धीरे भरोसा बना. स्कूलों और खिलाड़ियों ने उन्हें पहचानना शुरू किया. रिपेयर और बदलने के लिए लोग बार बार उनकी दुकान पर लौटने लगे.
आज उनका कारोबार परिवार के दो शोरूम से चलता है. पैमाना बढ़ा है. लेकिन काम की प्रकृति वैसी ही है. मौसमी मांग, स्कूलों की जरूरत और स्थानीय खिलाड़ियों पर ही बिक्री निर्भर रहती है.
हाल के वर्षों में उन्होंने एक बड़ा बदलाव किया. रैकेट स्ट्रिंगिंग मशीन जोड़ी. पहले इस काम के लिए रैकेट मेरठ या दिल्ली भेजने पड़ते थे. इसमें समय और खर्च दोनों लगते थे.
एस.पी. गुप्ता को यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में स्थानीय अधिकारियों से जानकारी मिली. उन्होंने आवेदन किया. उद्देश्य था इस महंगी मशीन को लगाना.
मशीन से रैकेट में उच्च गुणवत्ता की स्ट्रिंग तय तनाव के साथ लगाई जाती है. इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार होता है. इस काम के लिए उन्होंने और उनके बेटे ने ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया. सप्लायर से भी मार्गदर्शन मिला.
अब यह काम दुकान में ही होता है. स्थानीय मांग बढ़ी है. खिलाड़ियों को अब अपने रैकेट बाहर नहीं भेजने पड़ते.
गुप्ता कहते हैं, “इस मदद से मैं यह काम यहीं ला सका.” उनके अनुसार इससे सेवा बेहतर हुई और कारोबार में स्थिरता आई.
आज दुकान में गुप्ता, उनका बेटा और प्रशिक्षित कर्मचारी मिलकर काम संभालते हैं. रैकेट स्ट्रिंगिंग से अलग एक नियमित काम का प्रवाह बना है. इससे कर्मचारियों को भी रोजगार मिला है.
गुप्ता मानते हैं कि यह विकास अचानक नहीं हुआ. बस से सामान लाने के दिनों से लेकर आज के दो शोरूम तक का सफर धीरे धीरे तय हुआ है. इसमें तेजी नहीं थी. लेकिन निरंतरता थी.
उनका मानना है कि कारोबार को समझने में समय लगता है. जल्दबाजी से नहीं, बल्कि अनुभव और धैर्य से स्थिरता आती है. इटावा में उनका खेल सामग्री का व्यवसाय इसी सोच का उदाहरण है.
क्या है CM YUVA योजना?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है.
इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग की कार्यकारी संस्था उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ (CM YUVA) योजना संचालित की जा रही है.
इस योजना के तहत युवाओं को अपना उद्योग या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का 100% ब्याज मुक्त और बिना गारंटी का ऋण (लोन) उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी दिया जाता है.
CM YUVA योजना युवाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, मेंटरशिप, बाजार तक पहुंच और संसाधन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें.
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Edited by Ravi Pareek



