छोटी मिल से शुरू किया चावल का कारोबार, आज 70 देशों में फैला
हरियाणा के करनाल से शुरू हुई SSIEL Group की विरासत ने दुनिया भर में भारतीय बासमती की खुशबू पहुंचाई. जानिए कैसे Leysha ने एक्सपोर्ट-क्वालिटी चावल को भारत की रसोई तक पहुंचाने का सपना पूरा किया और कैसे यह प्रीमियम ब्रांड देश और दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
भारत की धरती में ऐसी कई कहानियां छुपी हैं जो मेहनत, भरोसे और विरासत से बनती हैं. ऐसी ही एक कहानी हरियाणा के करनाल से निकलकर दुनिया के 70 देशों तक पहुंची है. यह कहानी है SSIEL Group और इसके मैनेजिंग डायरेक्टर अमन गुप्ता की. उनका मानना है कि चावल सिर्फ एक अनाज नहीं है, बल्कि हर घर की खुशबू, हर दावत की रौनक और हर परिवार की यादों का हिस्सा है. यही सोच इस परिवार को एक छोटे से मिल से उठाकर दुनिया के सबसे बड़े बासमती निर्यातकों में शामिल कर देती है.
करीब चालीस साल पहले, अमन गुप्ता के पिता ने एक छोटे से मिल और एक बड़े ख़्वाब के साथ सफर शुरू किया था. उनका विश्वास बहुत सीधा था. हरियाणा और पंजाब की उपजाऊ मिट्टी से निकला सबसे बेहतरीन बासमती सिर्फ यहां तक सीमित न रहे, बल्कि दुनिया के हर कोने में पहुंचे. शुरुआत सीमित साधनों से हुई, पर हौसला बड़ा था. समय बीतने के साथ गुणवत्ता उनकी पहचान बन गई. इसी भरोसे ने SSIEL (Shiv Shakti Inter Globe Exports Pvt. Ltd.) को सत्तर से भी ज़्यादा देशों के घरों तक पहुंचा दिया.
अमन कहते हैं कि विदेशों में भारतीय बासमती को कभी किसी खास मौके के लिए लक्ज़री माना जाता था. धीरे-धीरे यह धारणा बदली. अब यह एक भरोसेमंद, स्वस्थ और हर दिन इस्तेमाल होने वाली अनिवार्य चीज़ बन चुका है. अलग-अलग देशों में लोग इसे सिर्फ चावल नहीं, बल्कि भारतीय तहज़ीब की मेहरबानी समझकर पसंद करते हैं.
कई सालों तक SSIEL का सबसे उत्तम चावल दुनिया भर में जाता रहा. लेकिन अमन गुप्ता के मन में हमेशा एक सवाल उठता था. जब दुनिया को हम इतना बेहतरीन बासमती दे सकते हैं, तो अपने मुल्क की रसोइयों तक वही गुणवत्ता क्यों न पहुंचाई जाए. यही सोच एक दिन ‘आहा’ पल बन गई. इसी से जन्म लिया Leysha ने, जो आज प्रीमियम बासमती चावल का एक भरोसेमंद भारतीय ब्रांड बन रहा है.
अमन बताते हैं कि Leysha सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक वादा है. यह वादा कि हर भारतीय परिवार को वही एक्सपोर्ट-क्वालिटी बासमती मिलेगा, जिसके लिए दुनिया दीवानी है. Leysha का उद्देश्य साफ है. न कोई समझौता, न अत्यधिक कीमतें. सिर्फ असली बासमती, जिसे खाते ही घर में वही पुरानी महक लौट आए.
आज बाज़ार में बासमती की कई किस्में मौजूद हैं. लोग अक्सर समझ नहीं पाते कि कौन-सा चावल उनकी डिश के लिए बेहतर है. Leysha ने इस उलझन को अवसर में बदल दिया. उन्होंने चावल को सिर्फ वर्गीकृत नहीं किया, उसे व्यंजनों के अनुसार डिजाइन किया.
Leysha परंपरा नाम की किस्म मुलायम, सुगंधित दानों के साथ हल्के व्यंजनों जैसे केसर पुलाव और वेज़िटेबल पुलाव के लिए बनाई गई है. वहीं Leysha नायाब बिरयानी अपने लंबे, पतले और शानदार दानों के कारण ऐसी बिरयानी बनाती है जो हर नज़र को खुश कर दे और हर निवाले में अलग लुत्फ़ दे. पैकिंग को भी इस तरह तैयार किया गया है कि ग्राहक पहली नज़र में समझ जाए कि उसके लिए कौन-सा चावल बिल्कुल सही रहेगा.
SSIEL पहले से मध्य-पूर्व में एक मजबूत पहचान रखता है. लेकिन अमन गुप्ता की नज़र अब पश्चिमी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया पर है. वहां स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और वे चाहकर भी असली बासमती तक नहीं पहुंच पाते. ब्राउन बासमती जैसे स्वस्थ विकल्प इन देशों में बड़ी उम्मीदें लेकर आए हैं.
अमन बताते हैं कि आगे का सफर ई-कॉमर्स, गोरमेट स्टोर्स और मजबूत रिटेल चैन से होकर गुजरेगा. उनका लक्ष्य Leysha को सिर्फ देखा जाने वाला नहीं, बल्कि पसंद किया जाने वाला ब्रांड बनाना है.
अमन कहते हैं कि Leysha की रणनीति बहुत साफ है. जहां ग्राहक हैं, वहीं Leysha होगा. चाहे वह मोहल्ले का किराना हो, सुपरमार्केट की गलियां हों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म. मार्केटिंग में भी सिर्फ फीचर्स नहीं, बल्कि परिवार और जश्न की असल कहानियां सुनाई जा रही हैं. Leysha को एक चावल का पैकेट नहीं, बल्कि हर घर का साथी बनने का सपना दिखाया गया है. इसी सोच के साथ गिफ्टिंग बॉक्स और ट्रायल पैक भी तैयार किए गए हैं ताकि लोग इसे बिना झिझक आज़मा सकें.
SSIEL और Leysha दोनों ही टिकाऊ कामों पर पूरा ध्यान देते हैं. अमन की सोच है कि जिस ज़मीन ने यह अनमोल दाना दिया है, उसकी हिफाज़त करना हमारी जिम्मेदारी है. इसलिए कंपनी किसानों को ऐसी खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है जो मिट्टी का ख्याल रखे. मिलों में आधुनिक तकनीक ने ऊर्जा और पानी दोनों की बचत बढ़ाई है. पैकेजिंग भी धीरे-धीरे अधिक रिसाइकल और पर्यावरण अनुकूल बनाई जा रही है.
अमन गुप्ता का विज़न साफ है. आने वाले दो सालों में Leysha को भारत में प्रीमियम बासमती का सबसे भरोसेमंद नाम बनाना है. इसके साथ ही वह दुनिया भर के स्वास्थ्य-सचेत ग्राहकों की पहली पसंद बनने के लिए नए विकल्प तैयार करना चाहते हैं. SSIEL के लिए उनका लक्ष्य वही है, लेकिन पहले से ज्यादा मजबूत. हर दाना भरोसा बताए और हर पैकेट कंपनी की चार दशक पुरानी विरासत को गर्व से आगे ले जाए.
Leysha की कहानी सिर्फ एक बिजनेस की सफलता की कहानी नहीं है. यह एक पिता के ख्वाब, एक बेटे की लगन, और एक किसान की मेहनत की कहानी है. यह वह कहानी है जो बताती है कि जब गुणवत्ता, नीयत और प्यार एक साथ चलते हैं, तो एक छोटी मिल भी दुनिया की थाली तक अपना नाम पहुंचा सकती है. Leysha सिर्फ बासमती नहीं, बल्कि भारतीय मिट्टी की खुशबू है, जिसे अब हर भारतीय रसोई महसूस कर सकेगी.



