स्टार्टअप Finkeda बना गांवों का सबसे बड़ा डिजिटल साथी, कैसे?
Finkeda ने छोटे दुकानदारों को मिनी बैंक में बदलकर भारत की बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया है. जानें कैसे मनीष गोयल का आइडिया लाखों लोगों के लिए उम्मीद, भरोसा और डिजिटल सुविधा लेकर आया. एक ऐसे मॉडल की कहानी, जो गांवों तक आधुनिक बैंकिंग पहुंचा रहा है.
साल 2019. गुरुग्राम के एक ऑफिस में बैठा एक शख्स लगातार एक सवाल का जवाब सोच रहा था कि भारत के छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए बैंकिंग इतनी मुश्किल क्यों है. बैंक तक पहुंचने में घंटों लग जाते थे. डिजिटल सेवाओं को लोग समझ नहीं पाते थे. और कई बार तो लोग सिर्फ़ इसलिए पैसा घर में रख लेते थे क्योंकि बैंक तक जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाते थे.
यह शख्स थे मनीष गोयल, Finkeda के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर. उन्हीं की सोच से जन्म लिया एक ऐसे मॉडल ने, जिसने लाखों दुकानदारों और करोड़ों ग्राहकों की ज़िंदगी को आसान बना दिया. Finkeda ने छोटे दुकानदारों को मिनी बैंक में बदल दिया. वे अब अपने ही मोहल्ले, गली और बस्ती के लोगों तक बैंक सेवाएं पहुंचा रहे हैं. यह कहानी है सपने, कोशिश, भरोसे और बदलाव की.
मनीष गोयल का सफर
Finkeda शुरू करने से पहले मनीष गोयल ने FMCG (Fast-Moving Consumer Goods), टेलीकॉम और फिनटेक जैसी कई इंडस्ट्री में काम किया. इस अनुभव ने उन्हें यह समझ दी कि भारत का असली ग्राहक क्या चाहता है. लोग क्या समस्याएं झेलते हैं. क्या सुधार हो सकता है. और कैसे टेक्नोलॉजी लोगों के लिए उम्मीद और सहूलियत का ज़रिया बन सकती है.
छोटे शहरों की यात्रा के दौरान उन्होंने देखा कि गांव या कस्बे के लोग सिर्फ़ इसलिए बैंक नहीं जा पाते थे क्योंकि दूरी ज़्यादा थी या समय नहीं मिलता था. कई बार डर भी होता था कि कहीं कोई गलती न हो जाए. बस इसी समय उन्हें एक आइडिया आया. क्यों न दुकानदारों को ही बैंकिंग की ताकत दे दी जाए. वही दुकानदार जिन पर इलाके के लोग भरोसा करते हैं. जो हर दिन उनसे मिलते हैं. उसी भरोसे, उसी रूह से Finkeda बना.
Finkeda की शुरुआत
YourStory हिंदी से बात करते हुए, मनीष बताते हैं कि उन्हें किताब Zero to One ने बहुत प्रेरित किया. इसमें लिखा था कि दुनिया वही लोग बदलते हैं जो कुछ नया करते हैं. कुछ ऐसा जिसे पहले कभी नहीं किया गया. इसके अलावा रतन टाटा जैसे दिग्गज लीडर्स ने उन्हें यह एहसास कराया कि बिजनेस का मक़सद सिर्फ़ मुनाफ़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को ऊपर उठाना चाहिए.
और सबसे बड़ी ताकत थी उनकी टीम. उन लोगों का उत्साह जिन्होंने छोटे शहरों तक डिजिटल बैंकिंग पहुंचाने को अपना सपना बना लिया. Finkeda इसी सपने और इसी जुनून का नतीजा है.
बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल
Finkeda का बिजनेस मॉडल बेहद साफ़ और पारदर्शी है. वे प्रत्येक लेनदेन पर कमीशन कमाते हैं. दुकानदार भी कमाते हैं. सेवाओं की संख्या बढ़ने के साथ कमाई भी बढ़ती है. इंश्योरेंस, ट्रैवल, निवेश, लेंडिंग जैसे नए सेक्टर में विस्तार हो रहा है. कंपनी खुद भी स्थिर है और आगे की फंडिंग को लेकर रणनीतिक निवेशकों से बात कर रही है.
हालांकि मनीष ने कंपनी के रेवेन्यू के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया.
दुकानदारों को बनाया डिजिटल बैंक
Finkeda का मॉडल बहुत सरल है. वे किसी बड़े और जटिल सेटअप पर निर्भर नहीं. उनकी असली ताकत है हर गली और मोहल्ले का दुकानदार.
Finkeda उन्हें टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग देता है. दुकानदार अपने मोबाइल या सिस्टम पर Finkeda का प्लेटफ़ॉर्म चलाता है. ग्राहक उसके पास जाकर पैसे जमा कर सकता है, निकाल सकता है, बिल भर सकता है, बीमा या निवेश कर सकता है, यात्रा बुक कर सकता है और अपने रोज़मर्रा के काम निपटा सकता है.
लोग किसी अजनबी पर भरोसा नहीं करते. लेकिन अपने मोहल्ले के दुकानदार पर भरोसा करते हैं. यह भरोसा ही Finkeda का सबसे बड़ा फ़र्क है. Finkeda दुकानदार को कमाने का नया ज़रिया देता है. ग्राहक को सुविधा देता है. और भारत को डिजिटल और इनक्लूसिव बैंकिंग की राह पर आगे ले जाता है.
मनीष बताते हैं, “आज बाज़ार में कई फिनटेक कंपनियां हैं. लेकिन Finkeda अपने आप में अलग है. वह दुकानदार को ग्राहक नहीं, पार्टनर मानता है. उसे सिर्फ़ डिजिटल टूल नहीं देता, बल्कि उसकी कमाई बढ़ाता है. Finkeda का मिशन है कि टेक्नोलॉजी इंसान को पीछे न छोड़े, बल्कि उसे आगे बढ़ाए. जहां दूसरे सिर्फ़ टेक्नोलॉजी पर भरोसा करते हैं, Finkeda टेक्नोलॉजी और भरोसे को साथ-साथ चलाता है.”
Finkeda ने पिछले कुछ सालों में शानदार ग्रोथ देखी है. आज देश के लाखों लोग इस प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. छोटे दुकानदार बैंकिंग सेवाओं के केंद्र बन रहे हैं. लाखों लेनदेन हर महीने हो रहे हैं. लोग बिल भर रहे हैं, पैसे भेज रहे हैं, इंश्योरेंस और निवेश कर रहे हैं. ट्रैवल से लेकर यूटिलिटी तक, Finkeda हर सेवा एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध करवा रहा है.
चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं
Finkeda की सबसे बड़ी चुनौती थी भरोसा जीतना. कई लोग डिजिटल सेवाओं से डरते थे. उन्हें लगता था कि पैसा कहीं फंस न जाए. धोखा न हो जाए. इस डर को मिटाया दुकानदारों ने. Finkeda ने दुकानदारों को ट्रेनिंग दी. उन्हें समझाया. उन्हें मजबूत सपोर्ट दिया. और धीरे धीरे लोगों का डर भरोसे में बदल गया.
मनीष गोयल के अनुसार Finkeda आने वाले दो सालों में अपनी सेवाओं को और गहराई तक ले जाना चाहता है. नए शहर, नई सेवाएँ और नया विस्तार. लक्ष्य यह है कि डिजिटल बैंकिंग भारत के हर कोने तक पहुँचे. दुकानदार मजबूत हों. ग्राहक सुरक्षित हों. और समाज आगे बढ़े.



