वकालत छोड़ शुरू की खेती, केले के बिस्कुट का पेटेंट कराया, अब सालाना 25 लाख की कमाई
अशोक गाडे केले से बने कई प्रोडक्ट तैयार करते हैं. इनमें केले के चिप्स, जैम, कैंडी, पापड़, चिवड़ा, लड्डू और सबसे खास केले के बिस्कुट शामिल हैं. इन्हीं केले के बिस्कुट ने उन्हें पूरे देश में पहचान दिलाई. इस प्रोडक्ट का पेटेंट भी उन्हें केंद्र सरकार से मिल चुका है. उनकी सालाना कमाई करीब 25 लाख रु+ है.
महाराष्ट्र के जलगांव के रहने वाले 67 वर्षीय अशोक गाडे की कहानी उन लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं. अशोक गाडे ने अपनी सोच और मेहनत से यह साबित कर दिया कि अगर किसान खेती में नई तकनीक और नए प्रयोग अपनाए, तो वही खेती करोड़ों सपनों को पूरा कर सकती है.
आज अशोक गाडे केले से बने कई प्रोडक्ट तैयार करते हैं. इनमें केले के चिप्स, जैम, कैंडी, पापड़, चिवड़ा, लड्डू और सबसे खास केले के बिस्कुट शामिल हैं. इन्हीं केले के बिस्कुट ने उन्हें पूरे देश में पहचान दिलाई. इस प्रोडक्ट का पेटेंट भी उन्हें केंद्र सरकार से मिल चुका है. उनकी सालाना कमाई करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच गई है.
अशोक गाडे की शुरुआत खेती से नहीं हुई थी. उन्होंने कानून की पढ़ाई की थी और करीब पांच साल तक वकालत भी की. लेकिन पिता के निधन के बाद उन्हें परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी. ऐसे में उन्होंने अपने पुश्तैनी काम यानी खेती की ओर रुख किया.
उनके परिवार के पास करीब 12.5 एकड़ जमीन थी, जहां केले की खेती होती थी. शुरुआत में वह दूसरे किसानों की तरह बाजार में कच्चे केले बेचते थे. लेकिन केले का कारोबार आसान नहीं था. कभी दाम गिर जाते थे तो कभी माल खराब हो जाता था. मेहनत बहुत होती थी, लेकिन मुनाफा कम मिलता था.
इसी परेशानी ने अशोक गाडे को कुछ नया सोचने के लिए मजबूर किया. उनकी पत्नी कुसुम गाडे ने भी इस काम में उनका पूरा साथ दिया. दोनों ने मिलकर तय किया कि केवल कच्चे केले बेचने से बेहतर है कि उससे नए प्रोडक्ट बनाए जाएं. यहीं से उनकी जिंदगी का बड़ा बदलाव शुरू हुआ.
उन्होंने केले से अलग अलग चीजें बनाना शुरू किया. धीरे धीरे लोगों को उनके प्रोडक्ट पसंद आने लगे. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके केले के बिस्कुट की हुई. यह एक अनोखा आइडिया था. लोगों ने इसे खूब पसंद किया. बाद में उन्हें इस प्रोडक्ट का पेटेंट भी मिल गया.
पेटेंट मिलने के बाद उनके कारोबार को नई पहचान मिली. अब उनके केले के बिस्कुट महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में बिकते हैं. एक किलो बिस्कुट की कीमत 400 से 500 रुपये तक है. हर हफ्ते करीब 60 से 100 किलो बिस्कुट की बिक्री हो जाती है.
इस सफलता के पीछे सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि सही सोच भी थी. अशोक गाडे ने यह समझ लिया था कि खेती में केवल उत्पादन बढ़ाने से फायदा नहीं होगा. असली कमाई वैल्यू एडिशन में है. यानी फसल को सीधे बेचने के बजाय उससे नया प्रोडक्ट तैयार करना.
उनकी सफलता का असर पूरे गांव पर पड़ा. उन्होंने अपने गांव के करीब 50 केले किसानों को भी साथ जोड़ा. सभी ने मिलकर ‘संकल्प एंटरप्राइजेज’ नाम से एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की. अब ये किसान केवल कच्चे केले बेचने पर निर्भर नहीं हैं. वे प्रोसेस्ड प्रोडक्ट बनाकर ज्यादा कमाई कर रहे हैं.
अशोक गाडे की कहानी यह बताती है कि खेती में अगर नए प्रयोग किए जाएं तो किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं. आज जब युवा खेती से दूर भाग रहे हैं, तब अशोक गाडे जैसे किसान यह संदेश दे रहे हैं कि खेती में भी बड़ा भविष्य छिपा है. जरूरत सिर्फ नई सोच, धैर्य और मेहनत की है.
Edited by Ravi Pareek




