पाकिस्तान से आकर बनीं भारत की ‘बिस्किट क्वीन’, कैसे रजनी बेक्टर ने 300 रु से खड़ा किया 7000000000 का साम्राज्य
पाकिस्तान से भारत आई रजनी बेक्टर ने घर में 300 रुपये से बेकिंग शुरू की और आज 7,000 करोड़ रुपये का Cremica फूड एम्पायर खड़ा किया. Padma Shri से सम्मानित रजनी ने McDonald's, Subway जैसी वैश्विक ब्रांड्स को सप्लाई कर भारत का नाम दुनिया में चमकाया.
कुछ कहानियाँ वक्त से भी बड़ी होती हैं. यह कहानी है रजनी बेक्टर की. एक ऐसी महिला जो एक विभाजन के दर्द से गुज़री, कराची (पाकिस्तान) से भारत आईं, नई ज़िंदगी शुरू की, और फिर घर के छोटे से आँगन में 300 रुपये से शुरुआत कर भारत की फूड इंडस्ट्री की मल्लिका बन गईं.
आज उनका ब्रांड Cremica (क्रेमिका) न केवल भारतीय स्वाद का सम्मान बढ़ाता है, बल्कि दुनिया भर में भारतीय उद्यमिता की मिसाल है. यह कहानी (Rajni Bector success story) बताती है कि जब सपनों में जुनून हो और हिम्मत में कोई कमी न हो, तो साधारण शुरुआत भी असाधारण इतिहास लिखती है. रजनी बेक्टर आज उन लाखों भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो घर में रहकर भी बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं.
बचपन, संघर्ष और सीखने की चाह
रजनी बेक्टर का जन्म कराची में हुआ. उनका बचपन आरामदायक था और परिवार में कई सदस्य ब्रिटिश इंडिया शासन में उच्च पदों पर थे. लेकिन 1947 का विभाजन सब कुछ बदलकर चला गया. परिवार को अपना घर-बार छोड़कर दिल्ली आना पड़ा. नई भूमि, नई शुरुआत, और अनिश्चित भविष्य.
दिल्ली में बसने के बाद रजनी की शादी मात्र 17 वर्ष की उम्र में पंजाब के एक बिजनेस परिवार में हुई. उस दौर में लड़कियों से घर सँभालने और परिवार के सपनों को पूरा करने की उम्मीद रहती थी. लेकिन रजनी के मन में सीखने की आग कभी कम नहीं हुई. शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और Miranda House से ग्रेजुएशन पूरा किया, जो उन दिनों महिलाओं के लिए बहुत बड़ी बात थी.
जब उनके बच्चे बोर्डिंग स्कूल चले गए, तब उन्होंने खुद को फिर से पहचाना. उन्होंने पंजाब एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी में बेकरी का कोर्स किया. वहाँ उन्होंने बेकिंग की तकनीकें सीखीं, नए फ्लेवर बनाए, और अपने हुनर में निखार लाया. यह सीख ही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

2021 में रजनी बेक्टर को भारत के 14वें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
₹300 से घर में शुरू की बेकरी
सीखी हुई कला को रजनी ने घर में आज़माना शुरू किया. उनके बनाये केक, ब्रेड और आइसक्रीम धीरे-धीरे लोगों की पसंद बनने लगे. पास-पड़ोस के लोग ऑर्डर देने लगे.
फिर उन्होंने सिर्फ 300 रुपये में छोटा सा ओवन खरीदा और अपने घर के आंगन में आइसक्रीम बनाना शुरू किया. शुरुआत कठिन थी. कई बार नुकसान भी हुआ और कई लोगों ने कहा कि यह सिर्फ शौक है, इससे कारोबार नहीं बनेगा. लेकिन रजनी ने हार नहीं मानी. उनका विश्वास और मेहनत उनके सबसे बड़े साथी थे.
Cremica की शुरुआत
साल 1978 आया और इसके साथ एक नया मोड़ भी. उनके पति धरमवीर बेक्टर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 20,000 रुपये देकर उन्हें प्रोडक्शन यूनिट शुरू करने में मदद की. इसी के साथ जन्म हुआ ब्रांड Cremica का, जिसका अर्थ है “cream से बना.”
रजनी ने आइसक्रीम से शुरुआत की, फिर ब्रेड, बिस्किट, मेयोनेज और सॉस लाइन जोड़ीं. स्वाद, गुणवत्ता और नवाचार के कारण Cremica ने स्थानीय मार्केट में पहचान बनाई और फिर पूरे उत्तर भारत में तेज़ी से लोकप्रिय हुई. रजनी खुद रेसिपी तैयार करती थीं, गुणवत्ता पर पूरा ध्यान देती थीं और यही उनकी सफलता की कुंजी बनी.
McDonald's का टेंडर और 69 देशों में फैला कारोबार
साल 1995 में Cremica को वह मौका मिला जिसने इतिहास बदल दिया. कंपनी को McDonald's के लिए बर्गर बन्स सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला. इसके लिए लुधियाना में बड़ा प्लांट लगाया गया. बाद में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में भी यूनिट्स खोली गईं.
McDonald's ने Cremica को Quaker Oats से परिचित कराया और वहाँ से कंपनी ने सॉस और ड्रेसिंग सेगमेंट में कदम रखा. आज Cremica दुनिया भर के 69 देशों में अपने प्रोडक्ट्स बेचती है और McDonald's, Subway, KFC, Pizza Hut, Taco Bell और भारतीय रेल जैसी दिग्गज कंपनियों को सप्लाई करती है.
घर के आँगन से शुरू हुई यह यात्रा अब करोड़ों उपभोक्ताओं के स्वाद तक पहुँच चुकी है.
₹7,000 टर्नओवर, मिला पद्म श्री
आज Cremica का टर्नओवर लगभग 7,000 करोड़ रुपये है. Mrs. Bectors Food Specialities Limited 2020 में NSE पर लिस्ट हुई और वित्त वर्ष 24 में 1,623 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया.
2021 में रजनी बेक्टर को भारत के 14वें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के हाथों पद्म श्री पुरस्कार (Padma Shri Award) से सम्मानित किया गया, जो उनके संघर्ष और उपलब्धि की आधिकारिक पहचान है. आज उनके बेटे कंपनी के विभिन्न हिस्सों का संचालन करते हैं, लेकिन ब्रांड की आत्मा अब भी रजनी की मेहनत और दृष्टि में बसती है.
रजनी बेक्टर की कहानी हमें सिखाती है कि सपने कितने भी बड़े हों, शुरुआत छोटी हो सकती है. चुनौतियाँ आएँ, तो दृढ़ता ताकत बन जाती है. और जब जुनून और मेहनत साथ हों, तो घर का आँगन भी उद्योग का जन्मस्थल बन सकता है.
विभाजन के दर्द से लेकर वैश्विक पहचान तक का सफर. 300 रुपये से 7,000 करोड़ तक की उड़ान. रजनी बेक्टर केवल एक उद्यमी नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं, घरेलू उद्यमों और आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण हैं.
हर वह महिला जो चुपचाप सपने देखती है और उन्हें पूरा करने की इच्छा रखती है, उसके लिए यह कहानी उम्मीद का सूरज है.




