36 रु में सीखी मशरूम की खेती, और बनाया करोड़ों का कारोबार — संतोष मिश्रा की कहानी
सिर्फ 36 रुपये से मशरूम खेती की ट्रेनिंग लेने वाले संतोष मिश्रा आज ओडिशा के सफल ‘मशरूम मिलियनेयर’ बन चुके हैं. जानिए कैसे आर्थिक तंगी से जूझते हुए उन्होंने कलिंगा मशरूम सेंटर खड़ा किया और लाखों लोगों को रोजगार व ट्रेनिंग देकर प्रेरणा बने.
ओडिशा के पुरी जिले के पिपली कस्बे में स्थित कलिंगा मशरूम सेंटर आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है. इस सेंटर की सफलता के जनक हैं संतोष मिश्रा, जिन्होंने संघर्षों से भरी जिंदगी को अपनी मेहनत और सोच के दम पर सफलता की मिसाल बना दिया.
संतोष मिश्रा पुरी जिले के दंडमुकुंदपुर गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने भुवनेश्वर के बीजेबी कॉलेज से पढ़ाई की. पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. घर की हालत ऐसी नहीं थी कि वह आगे की पढ़ाई कर सकें. लेकिन संतोष ने हालात के आगे हार नहीं मानी.
साल 1989 में उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. कई सालों में बचाए गए सिर्फ 36 रुपये लेकर उन्होंने ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) में मशरूम खेती की ट्रेनिंग में दाखिला लिया. यही फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ.
शुरुआत आसान नहीं थी. मशरूम की खेती सामान्य खेती से काफी अलग होती है. इसमें तापमान, नमी, रोशनी और साफ सफाई का बहुत ध्यान रखना पड़ता है. शुरुआत में संतोष को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कभी ज्यादा नमी की वजह से फसल खराब हो जाती, तो कभी फंगल संक्रमण नुकसान पहुंचाता.
इन समस्याओं से घबराने की बजाय उन्होंने OUAT के वैज्ञानिकों से सलाह ली. लगातार सीखते रहे और अपने काम में सुधार करते रहे. धीरे धीरे उन्हें सफलता मिलने लगी.
संतोष ने अपने पिता से कर्ज लेकर एक छोटे शेड में 100 बेड के साथ मशरूम की खेती शुरू की. मई 1989 तक उन्होंने करीब 150 किलो मशरूम का उत्पादन कर लिया. यह उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी.
उनकी पहली बड़ी बिक्री तब हुई जब उन्होंने अपने कॉलेज के पास मौजूद कॉर्पोरेट ऑफिसों में 5.2 किलो ऑयस्टर मशरूम 120 रुपये में बेचे. उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि यह छोटा कदम एक दिन उन्हें मशरूम इंडस्ट्री का बड़ा नाम बना देगा.
इसके बाद संतोष ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्हें 60 हजार रुपये का एक और लोन मिला. इस पैसे से उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाया और 3000 बेड तक पहुंच गए. 1990 के दशक में उनकी रोजाना कमाई 2500 रुपये से ज्यादा होने लगी. उस दौर में यह बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी. इसी वजह से लोग उन्हें ‘मशरूम मिलियनेयर’ कहने लगे.
लेकिन संतोष मिश्रा की सफलता सिर्फ पैसे तक सीमित नहीं रही. उन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान को समाज के साथ बांटना शुरू किया. उन्होंने खास तौर पर महिलाओं और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों को मुफ्त ट्रेनिंग देना शुरू किया.
अब तक वह एक लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त ट्रेनिंग दे चुके हैं. वहीं उनकी पेड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स से अलग अलग राज्यों के 9 लाख से ज्यादा लोग लाभ उठा चुके हैं. उनके प्रयासों की वजह से हजारों लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला.
आज कलिंगा मशरूम सेंटर हर दिन 2000 बोतल मशरूम स्पॉन तैयार करता है. यहां ऑयस्टर और पैडी स्ट्रॉ जैसे कई तरह के मशरूम की खेती होती है. संतोष अब अपने बिजनेस को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं.
वह करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने पर काम कर रहे हैं. इस यूनिट में मशरूम से आटा, अचार, स्नैक्स और कई दूसरे प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे. इससे किसानों और स्थानीय लोगों को नए अवसर मिलेंगे.
संतोष मिश्रा की कहानी बताती है कि अगर इंसान सीखने और मेहनत करने के लिए तैयार हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है. आर्थिक तंगी, संघर्ष और मुश्किलें उनके रास्ते में जरूर आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.
आज वह सिर्फ एक सफल उद्यमी नहीं हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का नाम बन चुके हैं.




