कभी LIC एजेंट थे, फिर 64 की उम्र में शुरू किया बिजनेस, दिवालिया हुए, आज 45600 करोड़ रु की संपत्ति के मालिक
कभी 20 हजार रुपये लगाकर बिजनेस में असफल हुए लक्ष्मण दास मित्तल ने रिटायरमेंट के बाद सोनालीका ट्रैक्टर्स की शुरुआत की. 95 साल की उम्र में वह भारत के सबसे उम्रदराज अरबपतियों में शामिल हैं. जानिए उनकी संघर्ष, मेहनत और सफलता की प्रेरक कहानी.
अक्सर लोग उम्र बढ़ने के साथ अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं. उन्हें लगता है कि एक समय के बाद जिंदगी सिर्फ जिम्मेदारियां निभाने और आराम करने के लिए बचती है. लेकिन लक्ष्मण दास मित्तल (Lachhman Das Mittal) ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया. जिस उम्र में लोग रिटायर होकर घर बैठ जाते हैं, उस उम्र में उन्होंने एक नई कंपनी शुरू की.
शुरुआत आसान नहीं थी. कभी बिजनेस में नुकसान झेला, दिवालिया हुए और फिर नौकरी में लौटना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार मानना नहीं सीखा. 64 साल की उम्र में शुरू हुई उनकी छोटी सी कोशिश आज सोनालीका ट्रैक्टर्स (Sonalika Tractors) के रूप में दुनिया के 150 देशों तक पहुंच चुकी है और उन्हें भारत के सबसे उम्रदराज अरबपतियों में शामिल कर चुकी है.
आज 95 साल की उम्र में लक्ष्मण दास मित्तल भारत के सबसे उम्रदराज अरबपतियों में गिने जाते हैं. सोनालीका ट्रैक्टर्स के पीछे उनका ही दिमाग और मेहनत है. उनकी कंपनी सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में किसानों की ताकत बनी हुई है.
लेकिन इस सफलता तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. इसमें संघर्ष था, असफलता थी और खुद पर भरोसा बनाए रखने की जिद थी.
लक्ष्मण दास मित्तल का जन्म साल 1931 में पंजाब के होशियारपुर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था. परिवार साधारण था, लेकिन सोच बड़ी थी. बचपन से ही उन्हें पढ़ाई का बहुत शौक था. वह मानते थे कि शिक्षा इंसान की जिंदगी बदल सकती है.
उन्होंने मेहनत से पढ़ाई की और अंग्रेजी और उर्दू में मास्टर डिग्री हासिल की. पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला. उस दौर में गांव से निकलकर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं था.

फोर्ब्स के मुताबिक लक्ष्मण दास मित्तल की कुल संपत्ति 4.9 बिलियन डॉलर (करीब ₹45,600 करोड़) से ज्यादा है. वह भारत के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं.
LIC की नौकरी से शुरू हुआ सफर
साल 1955 में उन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC में एजेंट के रूप में काम शुरू किया. यह नौकरी स्थिर थी. परिवार चल रहा था. जिंदगी ठीक चल रही थी. लेकिन उनके मन में हमेशा कुछ अपना करने की इच्छा थी.
वह सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहते थे. उनके अंदर एक कारोबारी बनने का सपना था.
20 हजार रुपये लगाए और हो गए दिवालिया
साल 1970 में उन्होंने पहली बार बिजनेस में हाथ आजमाया. उस समय वह LIC में नौकरी भी कर रहे थे. उन्होंने 20 हजार रुपये लगाकर पंजाब में गेहूं निकालने वाली मशीन यानी थ्रेशर बनाने का काम शुरू किया.
वह स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर किसानों के लिए बेहतर मशीनें बनाना चाहते थे. लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया. कारोबार सिर्फ एक साल में बंद हो गया. उन्हें भारी नुकसान हुआ और वह दिवालिया हो गए.
कई लोग ऐसी असफलता के बाद सपने छोड़ देते हैं. लेकिन लक्ष्मण दास मित्तल ने हार नहीं मानी. उन्होंने इसे अंत नहीं, बल्कि सीख माना. वह फिर से अपनी नौकरी में लौट गए. लेकिन उनके भीतर का सपना जिंदा रहा.
रिटायरमेंट के बाद लिया रिस्क
साल 1990 में वह LIC से रिटायर हो गए. 35 साल नौकरी करने के बाद अब समाज उनसे आराम करने की उम्मीद कर रहा था. लेकिन उन्होंने कुछ और ही सोच रखा था.
जिस उम्र में लोग पेंशन और आराम की बात करते हैं, उस उम्र में लक्ष्मण दास मित्तल फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहे थे.
उन्होंने बाजार को समझा. उन्हें महसूस हुआ कि भारतीय किसानों को ऐसे ट्रैक्टर चाहिए जो मजबूत हों, भरोसेमंद हों और भारतीय खेतों के हिसाब से बने हों.
64 साल की उम्र में शुरू की सोनालीका ट्रैक्टर्स
साल 1995 में 64 साल की उम्र में उन्होंने सोनालीका ट्रैक्टर्स की शुरुआत की. यह वही उम्र थी जब ज्यादातर लोग काम छोड़ देते हैं. लेकिन मित्तल ने उसी उम्र में नया सपना शुरू किया.
उन्होंने अपने पुराने अनुभव और असफलताओं से बहुत कुछ सीखा था. यही सीख उनके काम आई. उन्होंने किसानों की जरूरतों को समझते हुए ऐसे ट्रैक्टर बनाए जो मजबूत भी थे और किफायती भी.
देखते ही देखते सोनालीका ट्रैक्टर्स किसानों के बीच लोकप्रिय होने लगी. कंपनी तेजी से आगे बढ़ी और कुछ ही सालों में देश की बड़ी ट्रैक्टर कंपनियों में शामिल हो गई.
150 देशों में फैला कारोबार
लक्ष्मण दास मित्तल सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहना चाहते थे. उनका सपना बड़ा था. उनका मानना था कि अगर उनके ट्रैक्टर भारतीय खेतों में अच्छा काम कर सकते हैं, तो दुनिया के किसी भी खेत में चल सकते हैं.
उन्होंने गुणवत्ता और तकनीक पर खास ध्यान दिया. इसी सोच के साथ उन्होंने जापान की मशहूर कंपनी यानमार के साथ साझेदारी की. आज इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स में यानमार की करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
धीरे-धीरे सोनालीका ट्रैक्टर्स का नाम पूरी दुनिया में फैलने लगा. आज कंपनी के ट्रैक्टर 150 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट होते हैं. हर साल कंपनी 1.5 लाख से ज्यादा ट्रैक्टर बेचती है.
बेटों और पोतों को सौंपी जिम्मेदारी
आज कंपनी का संचालन उनके बेटे अमृत सागर और दीपक संभाल रहे हैं. उनके पोते रमन, सुषांत और राहुल भी बिजनेस में सक्रिय हैं. लेकिन लक्ष्मण दास मित्तल अब भी कारोबार में दिलचस्पी लेते हैं.
95 साल की उम्र में भी वह रोज ऑफिस जाते हैं. उनके लिए काम बोझ नहीं, बल्कि जिंदगी जीने का तरीका है.
फोर्ब्स के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 4.9 बिलियन डॉलर (करीब ₹45,600 करोड़) से ज्यादा है. वह भारत के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं.
लक्ष्मण दास मित्तल की कहानी सिर्फ एक अरबपति बनने की कहानी नहीं है. यह उम्मीद की कहानी है. यह बताती है कि उम्र कभी भी सपनों के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती.
उन्होंने साबित किया कि असफलता अंत नहीं होती. अगर इंसान सीखने और आगे बढ़ने की हिम्मत रखे, तो जिंदगी किसी भी मोड़ पर बदल सकती है.
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो जल्दी हार मान लेते हैं. यह उन लोगों के लिए भी संदेश है जो सोचते हैं कि अब बहुत देर हो चुकी है.
लक्ष्मण दास मित्तल ने अपनी जिंदगी से एक बात साफ कर दी. सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती.
(नोट: तथ्यात्मक जानकारी के साथ लेख को पुन:प्रकाशित किया गया है)




