स्टील मैन ऑफ इंडिया जे जे इरानी का 86 साल की उम्र में निधन

By yourstory हिन्दी
November 01, 2022, Updated on : Tue Nov 01 2022 05:56:13 GMT+0000
स्टील मैन ऑफ इंडिया जे जे इरानी का 86 साल की उम्र में निधन
जे जे इरानी टाटा स्टील से 43 सालों तक जुड़े रहे. इरानी ने 2011 में टाटा स्टील के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था. उन्हें मेटलर्जी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया था.
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टाटा स्टील के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और 'स्टील मैन ऑफ इंडिया' कहे जाने वाले जमशेद जे इरानी का सोमवार की रात 86 साल की उम्र में निधन हो गया. टाटा स्टील ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी.


टाटा स्टील ने बयान में लिखा, 'दी स्टील मैन ऑफ इंडिया अब इस दुनिया में नहीं रहे. बड़े दुख के साथ टाटा स्टील ये बताना चाहता है कि पद्म भूषण डॉ. जमशेद जे इरानी का निधन हो गया है. उन्हें हमेशा एक दूरदर्शी नेता की तरह याद रखा जाएगा जिसने आर्थिक उदारीकरण के दौर में टाटा स्टील को लीड किया और भारत में स्टील इंडस्ट्री की ग्रोथ और डिवेलपमेंट में योगदान दिया. उनके निधन पर केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने भी ट्वीट कर शोक जताया.


इरानी चार दशकों से भी अधिक से टाटा स्टील के साथ जुड़े हुए थे. 2011 में उन्होंने टाटा स्टील के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था. उनकी अगुवाई में टाटा स्टील को ग्लोबल स्तर पर पहचान मिली. डॉक्टर इरानी को मेटलर्जी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार से 2008 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला.


जीजी और खुर्शीद इरानी के बेटे जमशेद जे इरानी 2 जून, 1936 को नागपुर में पैदा हुए थे. उन्होंने 1956 में साइंस कॉलेज से बीएससी किया और नागपुर यूनिवर्सिटी से जियोलॉजी में एमएससी की डिग्री ली.


इसके बाद जमशेद जे इरानी को जे एन टाटा स्कॉलर के तौर पर यूके की शेफील्ड यूनिवर्सिटी जाने का मौका. वहां उन्होंने 1960 में मेटलर्जी में मास्टर्स और 1963 में मेटलर्जी में पीएचडी भी की.


पीएचडी के बाद शेफील्ड में ही ब्रिटीश आयरन एंड स्टील रिसर्च असोसिएशन के साथ 1963 में अपने करियर की शुरुआत की. काम तो उन्होंने विदेश में शुरू कर दिया मगर उनके मन में हमेशा अपने देश को आगे ले जाने की चाहत थी.


1968 में इरानी वापस इंडिया आ गए और टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी को जॉइन कर लिया. वहां वो डायरेक्टर (रिसर्च एंड डिवेलपमेंट) के असिस्टेंट के तौर पर काम करते थे.


10 साल बाद इरानी टाटा स्टील में ही जनरल सुपरिनटेंडेंट बन गए, फिर 1979 में जनरल मैनेजर और 1985 में प्रेजिडेंट बना दिए गए. उनकी तरक्की का दौर यहीं नहीं रुका. 1988 में इरानी को जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर फिर 1992 में मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया. आखिर में 2011 में वो कंपनी से रिटायर हो गए.


1981 में उन्हें टाटा स्टील बोर्ड का हिस्सा बनाया गया और 2001 में नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर की तरह 10 साल तक अपनी सेवा दी. डॉक्टर इरानी ने टाटा स्टील ही नहीं टाटा ग्रुप की कई और कंपनियों जैसे-टाटा मोटर्स, टाटा टेलीसर्विसेज में भी डायरेक्टर बनकर अपनी सेवा दी.


Edited by Upasana

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