CAT की तैयारी में दिखी कमी, रजत कुमार ने खड़ा किया TathaGat
रजत कुमार ने छात्रों को पढ़ाते हुए सही मार्गदर्शन की कमी को करीब से देखा. इसी अनुभव से स्टार्टअफ TathaGat की शुरुआत हुई. जानिए कैसे यह संस्थान CAT और MBA प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में कॉन्सेप्ट, पर्सनल मेंटरिंग और सीखने के बेहतर तरीकों पर जोर दे रहा है.
भारत में हर साल लाखों युवा MBA करने का सपना लेकर CAT जैसे एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी शुरू करते हैं. अच्छे बिजनेस स्कूल तक पहुंचने का रास्ता इन्हीं परीक्षाओं से होकर गुजरता है. लेकिन इस सफर में मुश्किल सिर्फ कठिन सवालों की नहीं होती.
कई बार समस्या कुछ और होती है. किस किताब से शुरुआत करें? कौन-सी रणनीति सही है? कितने मॉक टेस्ट दें? किस टीचर को फॉलो करें?
जानकारी इतनी ज्यादा है कि कई छात्र तैयारी शुरू करने से पहले ही उलझ जाते हैं. और कई ऐसे भी होते हैं जिनमें क्षमता की कोई कमी नहीं होती, लेकिन सही समय पर सही दिशा नहीं मिल पाती.
रजत कुमार ने छात्रों को पढ़ाते हुए इस समस्या को करीब से देखा था. यही अनुभव आगे चलकर स्टार्टअप TathaGat की शुरुआत की वजह बना.
दिलचस्प बात यह है कि रजत के लिए ऑन्त्रप्रेन्योरशिप कोई पहले से तय सपना नहीं था. यह यात्रा किसी बिजनेस प्लान से कम और छात्रों की एक वास्तविक परेशानी को समझने से ज्यादा शुरू हुई थी.
शुरुआत
रजत कुमार ऐसे परिवार से आते हैं जहां शिक्षा को हमेशा महत्व दिया गया. घर में पढ़ाई और अकादमिक विषयों पर बातचीत होना सामान्य बात थी. लेकिन जोर सिर्फ अच्छे नंबर लाने पर नहीं था. सवाल पूछने, चीजों को समझने और जिज्ञासु बने रहने को भी उतनी ही अहमियत दी जाती थी.
बाद में, जब रजत ने पढ़ाना शुरू किया, तो उन्होंने एक पैटर्न बार-बार देखा. कई होनहार छात्र पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद आत्मविश्वास खो देते थे. कुछ गलत दिशा में मेहनत कर रहे थे. कुछ के पास इतने ज्यादा नोट्स, किताबें, वीडियो और रणनीतियां थीं कि उन्हें यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि आखिर शुरुआत कहां से करें.
YourStory से बात करते हुए रजत कहते हैं, “मेरी तैयारी और शिक्षण के शुरुआती अनुभवों ने मुझे यह समझाया कि कई छात्र क्षमता की कमी के कारण पीछे नहीं रह जाते. असली समस्या अक्सर सही मार्गदर्शन की होती है.”
यहीं से धीरे-धीरे एक आइडिया जन्म लेने लगा.
क्या तैयारी को सिर्फ सवाल हल करने की प्रक्रिया से आगे ले जाया जा सकता है? क्या छात्रों को यह समझने में मदद की जा सकती है कि वे जो पढ़ रहे हैं, उसके पीछे का कॉन्सेप्ट क्या है?
इसी सोच ने आगे चलकर साल 2007 में TathaGat की नींव रखी.
रटने से ज्यादा जरूरी है समझना
CAT और दूसरी MBA प्रवेश परीक्षाएं सिर्फ किताबी ज्ञान की परीक्षा नहीं हैं. इनमें तर्क, डेटा को समझने की क्षमता, पढ़ने की आदत और दबाव में फैसले लेने जैसी चीजें भी मायने रखती हैं.
लेकिन रजत को लगा कि तैयारी की दुनिया में धीरे-धीरे एक अलग समस्या पैदा हो रही है. बहुत से छात्र शॉर्टकट और तय तरीकों पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे थे.
कोई तरीका याद कर लेता था, लेकिन उसके पीछे का कॉन्सेप्ट स्पष्ट नहीं होता था.
रजत कहते हैं, “सबसे बड़ा गैप पढ़ाने और वास्तव में सीखने के बीच बढ़ती दूरी थी. बहुत से छात्र तरीके याद कर रहे थे, लेकिन उनके पीछे का कॉन्सेप्ट नहीं समझ रहे थे.”
बड़े क्लासरूम में एक और चुनौती होती है. अक्सर सभी छात्रों के लिए एक जैसी रणनीति तैयार कर दी जाती है, जबकि हर छात्र अलग होता है.
किसी की Quantitative Ability मजबूत हो सकती है, लेकिन Verbal Ability कमजोर. कोई पढ़ने में अच्छा है, लेकिन परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन में पीछे रह जाता है.
नई दिल्ली स्थित TathaGat ने इसी सोच के साथ छोटे बैच, शिक्षकों के साथ बातचीत और नियमित फीडबैक को पढ़ाई की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया.
रजत के मुताबिक, लक्ष्य सिर्फ परीक्षा में अच्छा स्कोर हासिल करना नहीं होना चाहिए. तैयारी के दौरान छात्र की सोचने, विश्लेषण करने और समस्या को समझने की क्षमता भी बेहतर होनी चाहिए.
पैसे से बड़ी भरोसे की चुनौती
आज किसी नए स्टार्टअप या बिजनेस की शुरुआत की बात होती है तो अक्सर सबसे पहला सवाल फंडिंग का आता है. लेकिन TathaGat के शुरुआती दिनों में कहानी कुछ अलग थी.
शुरुआत बड़े निवेश के साथ नहीं हुई. व्यक्तिगत संसाधनों का इस्तेमाल करके क्लासरूम इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया, स्टडी मटीरियल विकसित किया गया और शिक्षकों की टीम बनाई गई.
बाद के वर्षों में संस्थान की ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा अपनी आंतरिक कमाई और अनुशासित ऑपरेटिंग मॉडल से आया. जरूरत पड़ने पर दोस्तों और परिवार का सहयोग भी मिला.
लेकिन रजत कहते हैं कि शुरुआती दौर की सबसे बड़ी चुनौती पैसा नहीं थी. वह कहते हैं, “शुरुआती दौर में सबसे बड़ी चुनौती पैसा नहीं, बल्कि भरोसा था. शिक्षा का क्षेत्र विश्वास पर चलता है और विश्वास बनने में समय लगता है.”
एक नए संस्थान के लिए छात्रों और अभिभावकों का भरोसा जीतना आसान नहीं होता. आखिर शिक्षा में लोग सिर्फ एक कोर्स नहीं खरीदते, वे अपने भविष्य से जुड़ा फैसला लेते हैं.
इसलिए TathaGat ने शुरुआत में तेज विस्तार के बजाय पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान देने का रास्ता चुना.
धीरे-धीरे छात्रों के अनुभव, उनके फीडबैक और परिणामों के जरिए संस्थान की पहचान बनती गई.
AI के दौर में भी टीचर की जरूरत क्यों है?
आज एक छात्र के पास पहले की तुलना में कहीं ज्यादा संसाधन हैं. YouTube पर हजारों वीडियो हैं. ऑनलाइन कोर्स हैं. टेस्ट सीरीज हैं. AI टूल्स हैं. किसी भी सवाल का जवाब कुछ सेकंड में मिल सकता है. लेकिन ज्यादा जानकारी का मतलब हमेशा बेहतर सीखना नहीं होता.
रजत मानते हैं कि AI और डेटा एनालिटिक्स एजुकेशन को अधिक पर्सनलाइज्ड बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. किसी छात्र के टेस्ट पैटर्न को देखकर यह समझा जा सकता है कि वह किन विषयों में लगातार गलतियां कर रहा है, किस तरह के सवालों में समय ज्यादा ले रहा है और उसे किस क्षेत्र में अधिक काम करने की जरूरत है.
वह कहते हैं, “टेक्नोलॉजी सीखने के तरीके को ज्यादा पर्सनलाइज्ड और स्केलेबल बना सकती है. लेकिन मैं टेक्नोलॉजी को टीचर का विकल्प नहीं मानता.”
उनके मुताबिक, एक अच्छे शिक्षक की भूमिका सिर्फ कॉन्सेप्ट समझाने तक सीमित नहीं होती. कई बार छात्र को यह बताने की जरूरत होती है कि वह लगातार गलत क्यों कर रहा है. कभी उसे आत्मविश्वास की जरूरत होती है और कभी सिर्फ किसी ऐसे व्यक्ति की, जो उसे सही समय पर यह कह सके कि दिशा मत बदलो, काम करते रहो.
परीक्षा का दबाव संभालना, आत्मविश्वास बनाए रखना और अपनी गलतियों को समझना, ये सब सिर्फ स्क्रीन के जरिए नहीं सीखे जा सकते.
डिजिटल दुनिया ने एक और दिलचस्प समस्या पैदा की है. आज कई छात्र तैयारी करने से ज्यादा समय तैयारी के बारे में कंटेंट देखने में बिताने लगते हैं. कौन-सी बुक सबसे अच्छी है, किस टीचर का वीडियो देखें, किसकी रणनीति अपनाएं. कई बार इस सब में इतना समय निकल जाता है कि वास्तविक पढ़ाई पीछे छूट जाती है.
99 पर्सेंटाइल की तैयारी में सबसे जरूरी है निरंतरता
CAT परीक्षा के आखिरी महीनों में अक्सर छात्रों के बीच बेचैनी बढ़ जाती है. कोई नई किताब खरीद लेता है. कोई अचानक नया कोर्स शुरू कर देता है. कोई अपनी पूरी रणनीति बदल देता है. फिर मॉक टेस्ट के स्कोर आते हैं और कई छात्रों का आत्मविश्वास उन्हीं नंबरों के साथ ऊपर-नीचे होने लगता है.
रजत का मानना है कि मॉक टेस्ट देना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उसका विश्लेषण करना.
गलती क्यों हुई? कौन-सा सवाल छोड़ देना चाहिए था? क्या समय किसी गलत सवाल पर ज्यादा खर्च हो गया? किस टॉपिक में बार-बार कमजोरी दिखाई दे रही है? इन सवालों के जवाब ढूंढना ही असली तैयारी का हिस्सा है.
रजत कहते हैं, “99 पर्सेंटाइल या उससे ऊपर का लक्ष्य अंतिम कुछ हफ्तों की असाधारण मेहनत से नहीं, बल्कि कई महीनों की निरंतर तैयारी से हासिल होता है. पहले कॉन्सेप्ट मजबूत करें और फिर गति बढ़ाएं.”
यह बात सुनने में साधारण लग सकती है, लेकिन परीक्षा की तैयारी में शायद सबसे मुश्किल काम यही होता है, लगातार एक ही दिशा में काम करते रहना.
आगे की राह
आने वाले वर्षों में TathaGat डिजिटल लर्निंग, AI-समर्थित सपोर्ट और पर्सनल मेंटरिंग सेक्टर में काम करने की योजना रखता है. ऑनलाइन और ऑफलाइन मॉडल के बीच बेहतर संतुलन बनाकर ज्यादा छात्रों तक पहुंचने की कोशिश भी की जा रही है.
लेकिन रजत के लिए विस्तार का मतलब सिर्फ नए शहरों तक पहुंचना या ज्यादा छात्रों को जोड़ना नहीं है. उनके सामने आज भी वही सवाल है, जिससे यह पूरी यात्रा शुरू हुई थी. क्या छात्र वास्तव में सीख रहा है? क्या उसकी सोचने और समझने की क्षमता बेहतर हो रही है? और क्या उसे सही समय पर सही मार्गदर्शन मिल रहा है?
भारत का एजुकेशन सेक्टर तेजी से बदल रहा है. टेक्नोलॉजी नई संभावनाएं लेकर आ रही है और छात्रों के पास पहले से कहीं ज्यादा विकल्प मौजूद हैं. ऐसे समय में रजत कुमार और TathaGat की कहानी एक शिक्षक के अनुभव से शुरू हुई उस सोच की कहानी है, जिसने एक साधारण लेकिन महत्वपूर्ण समस्या को पहचाना. कई बार छात्रों को आगे बढ़ने के लिए ज्यादा जानकारी नहीं चाहिए होती. उन्हें सिर्फ सही दिशा की जरूरत होती है.



