कैसे चैत्रा वेदुल्लापल्ली बना रहीं Women In Cloud से नई इकॉनमी? जानिए...
चैत्रा वेदुल्लापल्ली की कहानी बताती है कैसे Women In Cloud के जरिए वह टेक्नोलॉजी को इकॉनमिक एक्सेस का जरिया बना रही हैं. उनका मिशन है महिलाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़कर 2030 तक एक अरब डॉलर की इकॉनमी बनाना.
आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी सिर्फ इनोवेशन का नाम नहीं है. यह मौके बनाने का जरिया भी है. लेकिन हर किसी तक ये मौके बराबर नहीं पहुंचते. कहीं नेटवर्क की कमी है. कहीं एक्सपोजर का अभाव है. और कई बार सिस्टम ही ऐसा होता है जो कुछ लोगों को आगे बढ़ाता है और कुछ को पीछे छोड़ देता है. इसी फर्क को समझना और उसे बदलने की कोशिश करना आसान नहीं होता.
चैत्रा वेदुल्लापल्ली (Chaitra Vedullapalli) ने इसी चुनौती को अपने जीवन का मकसद बनाया. उन्होंने सिर्फ एक कंपनी नहीं बनाई, बल्कि एक नई सोच को जन्म दिया. उनका मानना है कि अगर सिस्टम को सही तरीके से डिजाइन किया जाए, तो मौके अपने आप सब तक पहुंच सकते हैं. Women In Cloud इसी सोच का नतीजा है, जो आज दुनिया भर में महिलाओं को आर्थिक और पेशेवर अवसरों से जोड़ रहा है.
अमेरिका में रहने वाली चैत्रा का जन्म बेंगलुरु में हुआ. उनके पिता भारतीय सेना में थे. इस वजह से उन्हें अलग अलग शहरों में रहने का मौका मिला. बचपन से ही उन्होंने समाज में फर्क देखा. कुछ लोगों के पास मौके थे. कुछ के पास नहीं थे. यही बात उनके मन में घर कर गई.
वह सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहीं. उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि सिस्टम कैसे काम करता है. कौन फैसले लेता है. किसे फायदा होता है और कौन पीछे रह जाता है.

Women In Cloud की टीम
YourStory से बात करते हुए चैत्रा बताती हैं, “मैंने बहुत जल्दी समझ लिया था कि टेक्नोलॉजी सिर्फ इनोवेशन का टूल नहीं है. यह इकॉनमिक एक्सेस का जरिया है. अगर इसे सही तरह से इस्तेमाल किया जाए तो यह लोगों के बीच का फर्क कम कर सकती है. लेकिन अगर गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ तो यह गैप और बढ़ा सकती है. यही सोच मुझे हमेशा आगे बढ़ाती रही.”
चैत्रा ने बेंगलुरु के RV कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से पढ़ाई की. उनकी पढ़ाई ने उन्हें एक मजबूत आधार दिया. लेकिन असली सीख उन्हें लोगों को देखकर मिली.
उन्होंने देखा कि कई डिग्री वाले लोग संघर्ष कर रहे हैं. वहीं कुछ लोग बिना बड़ी डिग्री के भी आगे बढ़ रहे हैं. इससे उन्हें समझ आया कि सिर्फ पढ़ाई ही काफी नहीं है.
उनका मानना है कि असली फर्क मौके और नेटवर्क से पड़ता है.
वह कहती हैं, “मैंने एक बात बहुत साफ देखी. इंटेलिजेंस से ज्यादा जरूरी होता है एक्सपोजर. जिन लोगों के पास मौके के करीब रहने का मौका होता है, वे तेजी से आगे बढ़ते हैं. उस समय मैंने तय किया कि मैं सिर्फ सिस्टम का हिस्सा नहीं बनूंगी. मैं बेहतर सिस्टम बनाना सीखूंगी.”
चैत्रा अपने करियर की शुरुआत में ही Oracle में सबसे युवा डायरेक्टर में से एक बन गईं. यह उनके लिए बड़ा अनुभव था. यहां उन्होंने देखा कि बड़े सिस्टम कैसे काम करते हैं. फैसले कैसे लिए जाते हैं. कंपनियां कैसे स्केल करती हैं.
उन्हें तीन बड़ी बातें समझ आईं. पहला, काम को सही तरीके से करना जरूरी है. दूसरा, कोई भी कंपनी अकेले नहीं बढ़ती. तीसरा, मौके के करीब रहना बहुत मायने रखता है.
चैत्रा बताती हैं, “कॉर्पोरेट दुनिया ने मुझे दिखाया कि स्केल कैसे बनता है. लेकिन मैंने यह भी देखा कि कई काबिल लोग सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनके पास मार्केट, कैपिटल और विजिबिलिटी का एक्सेस नहीं होता. यही गैप मुझे हमेशा खटकता रहा और यही आगे चलकर मेरी सोच का आधार बना.”
इस अनुभव के बाद चैत्रा ने एक बड़ा सवाल पूछा. क्या ऐसा सिस्टम बनाया जा सकता है जहां एक्सेस खुद सिस्टम का हिस्सा हो.
यहीं से Women In Cloud और Meylah की शुरुआत हुई. इन प्लेटफॉर्म्स का मकसद सिर्फ नेटवर्किंग नहीं है. इनका मकसद है लोगों को असली मौके देना.

Women In Cloud की को-फाउंडर और प्रेसिडेंट और Meylah की को-फाउंडर व CMO चैत्रा वेदुल्लापल्ली कहती हैं, “हमने कभी कम्युनिटी बनाने का लक्ष्य नहीं रखा. हमारा फोकस था इकॉनमिक एक्सेस को सिस्टम का हिस्सा बनाना. हमने देखा कि महिलाओं के पास टैलेंट है, लेकिन उनके पास मार्केट, कैपिटल और विजिबिलिटी की कमी है. हमने उसी गैप को भरने के लिए यह प्लेटफॉर्म बनाया.”
आज Women In Cloud के जरिए 100 से अधिक देशों में 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा के आर्थिक अवसर पैदा किए जा चुके हैं. यह सफर आसान नहीं था. सबसे बड़ी चुनौती लोगों को यह समझाना था कि यह सिर्फ एक नेटवर्क नहीं है. यह एक इन्फ्रास्ट्रक्चर है. धीरे-धीरे पार्टनरशिप्स बढ़ीं. बड़े एंटरप्राइज जुड़ते गए. सिस्टम मजबूत होता गया.
चैत्रा बताती हैं, “स्केल हासिल करने के लिए हमें सोच बदलनी पड़ी. हमने प्रोग्राम्स नहीं बनाए. हमने सिस्टम बनाए. हमने ऐसे मॉडल तैयार किए जो बार बार काम कर सकें. इससे हमें इंडिविजुअल सक्सेस से आगे बढ़कर सिस्टमेटिक इम्पैक्ट बनाने में मदद मिली.”
आगे की योजना भी उतनी ही बड़ी है. चैत्रा का लक्ष्य है 2030 तक एक अरब (बिलियन) डॉलर की इकॉनमी एक्सेस क्रिएट करना.
चैत्रा कहती हैं, “अगला दौर बहुत अहम है. यह तय करेगा कि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की दुनिया में असली मालिक कौन होगा. हम चाहते हैं कि महिलाएं सिर्फ हिस्सा न बनें, बल्कि ओनरशिप लें. हम ऐसे सिस्टम बना रहे हैं जहां एक्सेस कुछ लोगों की खासियत नहीं, बल्कि सभी के लिए एक सामान्य बात हो.”



