अब ड्रोन के पुर्जे भी भारत में बनेंगे, सरकार R&D से जोड़ेगी नई PLI स्कीम: उड्डयन मंत्री नायडू
TechSparks 2025 के मंच पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजारापु ने भारत के एविएशन सेक्टर का नया विज़न साझा किया. उन्होंने कहा कि एयर सेक्टर सिर्फ परिवहन नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का इंजन है. सरकार ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को R&D और आत्मनिर्भर भारत से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है.
भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजारापु (Rammohan Naidu Kinjarapu) ने TechSparks 2025 के मंच पर भारत की एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक नया और दमदार विज़न पेश किया. उन्होंने कहा कि एविएशन सेक्टर (विमानन क्षेत्र) सिर्फ एक परिवहन माध्यम नहीं, बल्कि यह अर्थव्यवस्था का इंजन और नवाचार की नींव है.
YourStory और The Bharat Project की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “एविएशन की बुनियाद ही इनोवेशन पर टिकी है. बिना इनोवेशन के इस उद्योग में आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश नहीं है. यह उद्योग पूरी तरह टेक्नोलॉजी पर आधारित है, और इसमें लगातार प्रयोग और परीक्षण होते रहते हैं.”
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन चुका है. यात्री यातायात हर साल 10 से 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. मंत्री नायडू के अनुसार, नागरिक उड्डयन भारत की आधुनिकता का प्रतीक है और रोजगार व इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ा गुणक साबित हो रहा है.
उन्होंने कहा, “जब मैं 1.4 अरब लोगों को आसमान से देखता हूं, तो मुझे सिर्फ एक देश नहीं दिखता, बल्कि 1.4 अरब अवसर दिखते हैं. यह सेक्टर हर साल 10-12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला क्षेत्र है.”
नायडू ने उदाहरण देते हुए कहा कि हैदराबाद जैसा एक बड़ा एयरपोर्ट, जो हर साल लगभग 5 करोड़ यात्रियों को संभालता है, करीब पांच लाख लोगों को सीधा या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है.
मंत्री ने कहा कि इनोवेशन जरूरी है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, “हवाई यात्रा में सुरक्षा सबसे अहम है. इसे बाद में जोड़ा नहीं जा सकता. सुरक्षा की संस्कृति शुरू से ही अपनानी होगी.”
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ऐसे सैंडबॉक्स बना रहा है जहां स्टार्टअप्स नियंत्रित वातावरण में नई तकनीक और उत्पादों का परीक्षण कर सकें. इसका मकसद यह है कि इनोवेशन और सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बना रहे.
नायडू ने बताया कि वह मंत्रालय को ज्यादा स्टार्टअप-फ्रेंडली बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. पहले जहां पायलटों और कंपनियों को हर आवेदन के लिए दिल्ली तक फाइल भेजनी पड़ती थी, अब वे ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर तुरंत मंजूरी पा सकते हैं.
उन्होंने कहा, “लोग सोचते हैं कि सरकार देरी करती है, लेकिन असल में यह प्रक्रिया लंबी होती है. अब हम हर प्रक्रिया को डिजिटल बना रहे हैं. इससे काम आसान, तेज और पारदर्शी हुआ है.”
TechSparks में मंत्री ने बताया कि सरकार ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को बढ़ाने और उसे रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) से जोड़ने की योजना बना रही है.
उन्होंने कहा, “हम अभी ड्रोन सिस्टम्स को बाहर से इंपोर्ट कर रहे हैं और यहां असेंबली कर रहे हैं. लेकिन हमारा लक्ष्य है कि हर नट-बोल्ट भारत में ही बने.”
मंत्री ने बताया कि सरकार ने ड्रोन इंपोर्ट पर बैन लगाया है ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने कहा कि मंत्रालय नए ड्रोन कानून पर काम कर रहा है, और उसे लागू करने से पहले व्यापक परामर्श किया जाएगा.
उन्होंने कहा, “हमारे पास अभी ड्रोन रूल्स हैं, लेकिन हमें इसे एक्ट में बदलना होगा. इससे पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है ताकि नीति बिल्कुल सटीक हो.”
नायडू ने कहा कि ड्रोन केवल रक्षा क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि कृषि, सर्वे, लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में काम आ सकते हैं. उन्होंने बताया कि ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दे रही हैं और कृषि में दक्षता बढ़ा रही हैं.
उन्होंने कहा, “ड्रोन निर्माता कंपनियां अगर पुर्जे बाहर से लाएंगी तो यह आत्मनिर्भरता की भावना के खिलाफ है. हमारा उद्देश्य है कि हर पुर्जा भारत में बने, तभी हम सच्चे मायनों में मेक इन इंडिया को सफल बना पाएंगे.”
TechSparks 2025 के मंच से नायडू का संदेश साफ था: इनोवेशन, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी साथ चलें. उन्होंने कहा, “हमारे प्रयास लगातार इस दिशा में हैं कि हर नए विचार को जगह और समर्थन मिले. भारत की उड़ान अब टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता पर आधारित होगी.”

Edited by Ravi Pareek



