भारत को दोबारा बनाना होगा अपना DeepTech इकोसिस्टम: Nurix AI के फाउंडर मुकेश बंसल
TechSparks 2025 के मंच पर बोलते हुए Nurix AI के फाउंडर और सीईओ मुकेश बंसल ने कहा कि भारत को अपना डीपटेक इकोसिस्टम दोबारा मज़बूत बनाना होगा. उन्होंने बताया कि यह बदलाव एक दिन में नहीं होगा, बल्कि इसमें समय लगेगा.
भारत के विकास के लिए एक मज़बूत डीपटेक इकोसिस्टम (DeepTech Ecosystem) का दोबारा निर्माण ज़रूरी है. लेकिन यह बदलाव रातोंरात नहीं होगा, ऐसा कहना है Nurix AI के फाउंडर और सीईओ मुकेश बंसल (Mukesh Bansal) का.
मुकेश बंसल ने यह बातें YourStory की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा से बातचीत के दौरान TechSparks 2025, YourStory के प्रमुख स्टार्टअप-टेक इवेंट में कहीं.
भारत निर्णायक मोड़ पर है
मुकेश बंसल ने कहा, “भारत इस वक्त एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. हमें यह समझना होगा कि अपने डीपटेक इकोसिस्टम को दोबारा कैसे बनाना है. कई लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी. आने वाले पाँच से सात सालों में बहुत बड़ी प्रगति की उम्मीद नहीं है. लेकिन लंबे समय में मुझे पूरा भरोसा है कि भारत इस क्षेत्र में मज़बूत बनेगा.”
उन्होंने बताया कि भारत को पहले से ही डीपटेक के क्षेत्र में बढ़त हासिल थी, लेकिन बीच में प्राथमिकताएं बदल गईं.
उन्होंने कहा, “भारत ने इस दिशा में शुरुआत बहुत पहले की थी — जैसे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), एटॉमिक एनर्जी कमीशन और इसरो (ISRO). लेकिन 1980 और 1990 के दशक में विज्ञान और रिसर्च की प्राथमिकता कम हो गई. अब जब दुनिया में टेक्नोलॉजी ही प्रगति और भू-राजनीतिक ताकत तय कर रही है, तो यह साफ है कि जो टेक्नोलॉजी को नियंत्रित करेगा, वही दुनिया को दिशा देगा.”
“पुरानी सफलता नई गारंटी नहीं देती”
मुकेश बंसल ने बताया कि भले ही वे Myntra और CureFit जैसे सफल स्टार्टअप्स के फाउंडर रह चुके हैं, लेकिन AI स्टार्टअप शुरू करते वक्त उन्हें निवेश जुटाने में मुश्किलें आईं.
उन्होंने कहा, “जिन 100 वेंचर कैपिटलिस्ट्स (VCs) से मैंने बात की, उनमें से 90% ने इनकार कर दिया.”
वे समझते हैं कि ऐसा क्यों हुआ.
उन्होंने कहा, “सिर्फ इसलिए कि मैंने CureFit बनाया, इसका मतलब यह नहीं कि मैं एआई में भी उतना अच्छा रहूंगा. अगर लोग सिर्फ पुराने काम देखकर निवेश कर दें, तो यह किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होगा. असली प्रगति तब होती है जब आपको मजबूर किया जाए कि आप गहराई से सोचें, समझें और अपनी खुद की दिशा तय करें.”
बंसल ने कहा, “शुरुआती दिमाग यानी Beginner’s Mind बहुत शक्तिशाली होता है. जो लोग पहले से सफल हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि पुराना अनुभव हर नई तकनीक में काम नहीं आता. लेकिन हां, अनुभव से एक फायदा जरूर होता है — आप अच्छे लोगों को जोड़ सकते हैं और काम की शुरुआत जल्दी कर सकते हैं. लेकिन कुछ सार्थक बनाना आज भी उतना ही मुश्किल है.”
डीपटेक के लिए जुनून और निवेश
मुकेश बंसल ने बताया कि डीपटेक के प्रति उनके जुनून ने उन्हें निवेशक के रूप में भी प्रेरित किया. उन्होंने 2018 में स्पेसटेक स्टार्टअप Skyroot में निवेश किया था, जब दो इसरो इंजीनियरों ने उनसे रॉकेट बनाने का आइडिया साझा किया.
उन्होंने कहा, “उस समय भारत में निजी कंपनियों को रॉकेट बनाना कानूनी तौर पर अनुमति नहीं थी. लेकिन उनके अंदर जुनून था, इसलिए मैंने कहा— अगर तुम 10 साल तक इसे लेकर गंभीर हो, तो मैं फंड दूंगा. ज्यादा नहीं, लेकिन इतना कि टीम चल सके.”
बाद में सरकार ने 2021 में निजी कंपनियों को रॉकेट बनाने की अनुमति दी और IN-SPACe के ज़रिए उनका समर्थन किया.
उन्होंने गर्व से कहा, “2023 में Skyroot भारत की पहली निजी कंपनी बनी जिसने रॉकेट को अंतरिक्ष में लॉन्च किया. अब वे जल्द ही सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में भेजने की तैयारी कर रहे हैं.”
बंसल के मुताबिक, ऐसे महत्वाकांक्षी उद्यमियों की ज़रूरत है जो लंबी दौड़ में टिक सकें, और निवेशकों को भी धैर्य और जोखिम उठाने की क्षमता रखनी होगी.
उन्होंने कहा, “इसी तरह डीपटेक इकोसिस्टम बनता है.”
AI के बाद अगली क्रांति — क्वांटम और बायो इंजीनियरिंग
मुकेश बंसल का मानना है कि आने वाले दशकों में क्वांटम टेक्नोलॉजी और बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग लोगों की ज़िंदगी को गहराई से बदल देंगी.
उन्होंने कहा, “अगले 20 से 30 सालों में, एआई के साथ-साथ जीवविज्ञान और क्वांटम तकनीकें हमारी ज़िंदगी और इस ग्रह को पूरी तरह बदल देंगी.”
लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर भारत ने डीपटेक पर अभी से ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में हम सिर्फ अमेरिका और चीन की टेक कॉलोनी बनकर रह जाएंगे.

Edited by रविकांत पारीक



