कुणाल कपूर की कंटेंट क्रिएटर्स को सीख — “वायरल नहीं, वैल्यू बनाइए”
YourStory के प्रमुख इवेंट TechSparks 2025 के मंच पर एक्टर और ऑन्त्रप्रेन्योर कुणाल कपूर ने कंटेंट क्रिएटर्स को सलाह दी कि वे वायरलिटी के बजाय वैल्यू पर ध्यान दें. Ketto के को-फाउंडर कुणाल ने कहा कि असली कहानी वही है जो सच्ची, उद्देश्यपूर्ण और लोगों को कार्रवाई के लिए प्रेरित करे.
TechSparks 2025 के मंच पर एक्टर और ऑन्त्रप्रेन्योर कुणाल कपूर (Kunal Kapoor) ने आज के दौर में कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को एक अहम सलाह दी. उन्होंने कहा कि कंटेंट बनाते समय वैल्यू पर ध्यान दें, न कि सिर्फ वायरल होने पर.
कुणाल कपूर, जो क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म Ketto के को-फाउंडर हैं, YourStory की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ मंच पर बात कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक कंटेंट बनाना सिर्फ कुछ खास लोगों के हाथ में था, जैसे फिल्म इंडस्ट्री के लोग. लेकिन अब मोबाइल फोन और एक आइडिया रखने वाला कोई भी व्यक्ति कहानी बना सकता है. इसलिए यह जरूरी है कि हर कहानी समाज में कुछ मूल्य जोड़ने वाली हो.
कुणाल ने बताया कि आज एक अच्छी कहानी न सिर्फ दर्शकों को जोड़ती है, बल्कि भरोसा, पूंजी और एक मजबूत समुदाय भी बनाती है. उन्होंने कहा कि कहानियां व्यक्तिगत, स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए.
Ketto की शुरुआत और असली कहानियों की ताकत
कुणाल कपूर ने 2012 में Ketto की स्थापना की थी. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो ज़रूरतमंद लोगों और मदद करने वालों के बीच पुल का काम करता है. उन्होंने बताया कि Ketto पर मिलने वाली कहानियां स्क्रिप्टेड नहीं होतीं, लेकिन बेहद प्रभावशाली होती हैं.
उन्होंने कहा, “कई बार कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा होता है, लेकिन फीस देने में असमर्थ होता है. कोई मरीज इलाज करा सकता है, लेकिन पैसे नहीं हैं. कुछ खिलाड़ी प्रतिभाशाली हैं, लेकिन संसाधन नहीं मिलते. इन कहानियों को रोशनी में लाना जरूरी है.”
कुणाल के लिए Ketto का अनुभव एक नए तरह की कहानी कहने की कला लेकर आया.
उन्होंने कहा, “सिनेमा ने मुझे सिखाया कि कैसे लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया जा सकता है. लेकिन Ketto ने मुझे सिखाया कि कैसे लोगों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया जाए.”

TechSparks 2025 के मंच पर YourStory की फाउंडर और सीईओ श्रद्धा शर्मा के साथ कुणाल कपूर
सोशल मीडिया पर एक्सपेरिमेंट और सीख
कुणाल ने एक दिलचस्प प्रयोग किया. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने एक महीने तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्क्रॉल किया, तो उन्हें याद नहीं था कि उन्होंने क्या सीखा.
उन्होंने कहा, “क्योंकि आप बस लगातार स्क्रॉल करते रहते हैं. लेकिन अगर मैं वही समय किसी किताब पढ़ने या खुद को शिक्षित करने में लगाऊं, तो वह ज़्यादा फायदेमंद है.”
कहानी में सच्चाई हो, हाइप नहीं
कुणाल ने कहा कि आज के दौर में फाउंडर्स और क्रिएटर्स को सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि उद्देश्य के साथ कहानी कहनी चाहिए.
उन्होंने बताया कि फंडरेज़िंग में भी कहानी का असली असर तभी दिखता है जब वह सच्ची और व्यक्तिगत हो.
उन्होंने कहा, “लोगों को यह न कहें कि मैं गरीब बच्चों के लिए स्कूल बना रहा हूं. कहें कि मैं अपने गांव में स्कूल बना रहा हूं क्योंकि मैंने वहां की हालत खुद देखी है. यह जरूरी है क्योंकि अगर अब नहीं हुआ तो लड़कियां पढ़ नहीं पाएंगी.”
कुणाल कपूर ने यह भी कहा कि आज के समय में फाउंडर हाइप से नहीं, बल्कि भरोसे और सच्चाई से आगे बढ़ सकते हैं. एक सच्ची कहानी हमेशा अपने दर्शक खुद ढूंढ लेती है.

Edited by Ravi Pareek



