Netflix से ChatGPT तक: वाणी कोला ने समझाया ‘Compression Effect’ का जादू!
TechSparks 2025 के मंच पर अपने मुख्य भाषण में Kalaari Capital की मैनेजिंग डायरेक्टर वाणी कोला ने कहा कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति ने विकास की रफ्तार को तेज किया है, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी इससे अलग नहीं है.
“कंप्रेशन इफेक्ट” यानी ऐसा दौर, जब हर बड़ी तकनीकी क्रांति मूल्य (value) बनाने की गति को कई गुना बढ़ा देती है. आज यह शब्द निवेशकों की प्रेजेंटेशन में खूब सुनाई देता है. लेकिन, जैसा कि Kalaari Capital की मैनेजिंग डायरेक्टर वाणी कोला (Vani Kola) ने YourStory के TechSparks 2025 इवेंट में अपने मुख्य भाषण “The VC’s Compass: Resilience & Reinvention in India’s AI Decade” में कहा, ‘यह विचार नया नहीं है’.
वाणी कोला ने बताया कि हर बड़ी तकनीकी उपलब्धि चाहे इंटरनेट हो, मोबाइल हो या अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ने बिजनेस की यात्रा को तेज बना दिया है. उन्होंने कहा, “AI समय को छोटा कर रहा है.” यानी इनोवेशन और इम्पैक्ट के बीच का फासला अब तेजी से घट रहा है.
इस बात को समझाने के लिए उन्होंने Netflix और OpenAI के ChatGPT का उदाहरण दिया. नेटफ्लिक्स को 200 मिलियन यूज़र्स तक पहुंचने में करीब साढ़े तीन साल लगे, जबकि ChatGPT ने लॉन्च के एक हफ्ते में ही 100 मिलियन यूज़र्स पार कर लिए. यह फर्क दिखाता है कि AI “समय को तेज कर रहा है” और अब स्टार्टअप्स को यह सोचना होगा कि वे कितनी जल्दी असरदार परिणाम दे सकते हैं.
नए ‘इंफ्लेक्शन पॉइंट्स’ का दौर
वाणी कोला ने कहा कि हर नई तकनीक, चाहे वो AI हो, मोबाइल या क्लाउड, समय को संकुचित (compress) करती है. यानी, अब वैल्यू पहले से बहुत तेज बनाई, दी और बढ़ाई जा सकती है. इस तेजी से लागत घटती है, अपनाने की रफ्तार बढ़ती है, और नई क्षमताएं सामने आती हैं.
इसी से नए इंफ्लेक्शन पॉइंट्स (नए मोड़) पैदा होते हैं, जहां से फाउंडर्स के लिए नए अवसर खुलते हैं. उन्होंने कहा कि एक अच्छे फाउंडर को इन नए मोड़ों को पहचानने की समझ होनी चाहिए.
उन्होंने ई-कॉमर्स के उदाहरण से समझाया कि कैसे सस्ती डेटा कीमतों ने ई-कॉमर्स की दुनिया में बड़ा मौका बनाया. उसी तरह, आज जब कंप्यूटिंग सस्ती और तेज हो गई है, तो AI को भी नई ऊंचाई मिली है.
वाणी कोला ने कहा, “AI कोई नया कांसेप्ट नहीं है. यह 1950 के दशक से लैब्स में था, लेकिन कंप्यूटिंग की शक्ति और कीमत को उस मोड़ तक पहुंचना था, जहां बड़े लैंग्वेज मॉडल और रियल टाइम में विशाल डेटा को प्रोसेस करना संभव हो सके.”
निवेशकों की नजर में AI स्टार्टअप्स
वाणी कोला ने कहा कि आज वेंचर कैपिटल फर्म्स ऐसे स्टार्टअप्स में निवेश करना चाहती हैं जो तेजी से वैल्यू क्रिएट करें, सिर्फ जल्दी लॉन्च नहीं.
उन्होंने बताया कि अब निवेशक गहरे, सीमित और उच्च मूल्य वाले समस्याओं पर काम करने वाली कंपनियों को प्राथमिकता देते हैं.
“कलारी में हमने ज्यादातर निवेश ऐसे स्टार्टअप्स में किए हैं जो वर्टिकल AI पर काम कर रहे हैं. यानी खास इंडस्ट्री या डोमेन की समस्याओं को सुलझाने पर केंद्रित हैं.”
वाणी कोला ने एक और दिलचस्प बात कही, आज निवेशकों के बीच Founder-Market Fit की सोच भी मजबूत हो रही है. यानी, जिस समस्या को कोई स्टार्टअप सुलझाना चाहता है, उस पर संस्थापक का व्यक्तिगत या पेशेवर अनुभव होना चाहिए. ऐसा फाउंडर तेजी से काम कर सकता है क्योंकि वह उस समस्या के संदर्भ को गहराई से समझता है.
AI के दौर में समय ही सबसे बड़ी पूंजी है. वाणी कोला का संदेश साफ है — जो फाउंडर तेजी से ‘वैल्यू’ बना सकते हैं, वही आने वाले वक्त में टिकेंगे. टेक्नोलॉजी अब सिर्फ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि समय का पैमाना बदल रही है.

Edited by Ravi Pareek



