TechSparks 2025: Zepto फाउंडर कैवल्य वोहरा ने क्यों कहा — पैसे से नहीं मिलती खुशी!
Zepto के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा ने TechSparks 2025 के मंच पर मानसिक स्वास्थ्य, खुशी और पैसे के रिश्ते पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि स्टार्टअप का असली सहारा को-फाउंडर, परिवार और दोस्त होते हैं, न कि पैसा या माइंडफुलनेस.
के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा (Kaivalya Vohra) के लिए स्टार्टअप बर्नआउट (थकान और मानसिक तनाव) का इलाज न तो माइंडफुलनेस है और न ही पैसा. उनके अनुसार, असली सहारा वो शांत और भरोसेमंद को-फाउंडर होता है, जो तब जिम्मेदारी संभालता है जब आप खुद थक जाते हैं.
YourStory के TechSparks 2025 समिट में बोलते हुए वोहरा ने अपने मानसिक स्वास्थ्य और उद्यमी सफर के बारे में ईमानदारी से बात की. उन्होंने बताया कि कैसे भारत के सबसे युवा स्टार्टअप फाउंडर्स में से एक होने के बावजूद, वे तेज़ी से बढ़ती कंपनी की चुनौतियों को संभालते हैं.
जब उनसे पूछा गया कि वे मानसिक रूप से कैसे संतुलित रहते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब किसी ध्यान या योग की प्रैक्टिस में नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद को-फाउंडर में छिपा है.
वोहरा ने कहा, “सिलिकॉन वैली में एक आम धारणा है कि अकेला फाउंडर होने के बजाय को-फाउंडर होना बेहतर होता है. और इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि स्टार्टअप चलाना बहुत मुश्किल काम है.” उन्होंने अपने को-फाउंडर आदित पालिचा (Aadit Palicha), जो उनके स्कूल के दोस्त हैं, का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों के बीच का रिश्ता उन्हें संभाले रखता है.
उन्होंने आगे कहा, “कई बार ऐसा होता है कि हम दोनों में से कोई एक बहुत निराश हो जाता है. तब दूसरा संभाल लेता है. यही चीज़ सबसे ज्यादा मदद करती है — कोई ऐसा व्यक्ति जो आपके साथ हर दिन, हर चुनौती में खड़ा हो.”
वोहरा ने मुस्कुराते हुए कहा, “कभी-कभी ऐसा भी होता है कि दोनों ही एक साथ परेशान होते हैं. लेकिन ज्यादातर ऐसा नहीं होता.”
को-फाउंडर के अलावा, वोहरा ने अपने दोस्तों और परिवार के सपोर्ट को भी बहुत अहम बताया. उन्होंने कहा, “मेरे पास बहुत शानदार दोस्त और परिवार हैं, जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया है.”
वोहरा बोले, “अगर कभी कुछ बहुत परेशान करता है, तो हमारे पास एक स्थिर और भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम है. दोस्तों और परिवार से बात करने से बहुत राहत मिलती है.”
Zepto के CTO निखिल मित्तल (Nikhil Mittal) ने भी यही बात दोहराई. उन्होंने कहा, “किसी भी चुनौती से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है खुलकर बात करना — चाहे वह साथी हो, टीममेट या दोस्त. हमारे परिवार और दोस्त हमेशा मदद करते हैं.”
दिलचस्प बात यह है कि वोहरा किसी खास मानसिक स्वास्थ्य प्रैक्टिस को नहीं अपनाते. उन्होंने कहा, “कुछ भी जानबूझकर नहीं करता. ये चीज़ें हमें किसी हद तक किस्मत से मिली हैं.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या पैसा खुशी खरीद सकता है, तो उन्होंने बहुत सोच-समझकर जवाब दिया. वोहरा बोले, “क्या पैसा खुशी खरीद सकता है? शायद नहीं. लेकिन कुछ हद तक यह आपको आज़ादी ज़रूर देता है.”
उन्होंने कहा, “पैसा समय और सुविधा जैसी चीज़ों पर नियंत्रण दे सकता है, लेकिन खुशी शायद उससे नहीं मिलती. असली खुशी कहीं गहराई में होती है, पैसे से नहीं.”

Edited by Ravi Pareek



