बजट 2021 से भारतीय इकोसिस्टम को हैं ये उम्मीदें

By Ranjana Tripathi|21st Jan 2021
मांग को तेज करने वाला, बुनियादी संरचना पर खर्च बढ़ाने वाला हो बजट: भारतीय उद्योग
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"उद्योग संगठन फिक्की और ध्रुव एडवाइजर्स के द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार, उद्योग जगत को सरकार से उम्मीद है कि वह बजट में विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, अनुसंधान व विकास को बढ़ावा देने और आगामी बजट में भविष्य की प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करने पर नीतिगत पहलों को जारी रखेगी।"

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

देश का आम बजट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश करेंगी। इस साल बजट का सत्र 29 जनवरी से शुरू होगा, जो 15 फरवरी तक चलेगा। ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार का बजट काफी खास होगा। सरकार ने आम जनता से भी उनके सुझावों की मांग की है।


पीटीआई के अनुसार, एक सर्वेक्षण में भारतीय उद्योग जगत ने इस तरह की राय जाहिए की है, कि आगामी बजट में मांग सृजन, बुनियादी अवसंरचना पर खर्च बढ़ाने और सामाजिक क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उद्योग संगठन फिक्की और ध्रुव एडवाइजर्स के द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार, उद्योग जगत को सरकार से उम्मीद है कि वह बजट में विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, अनुसंधान व विकास को बढ़ावा देने और आगामी बजट में भविष्य की प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करने पर नीतिगत पहलों को जारी रखेगी।


सर्वेक्षण में कहा गया कि देश में एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। ऐसे में समय आ गया है कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों में और तेजी लायी जाये। सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत प्रतिभागियों को लगता है कि 'व्यक्तिगत कर राहत' इस वर्ष के बजट में प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों का प्रमुख विषय होना चाहिये। 


साथ ही ऐसा भी माना जा रहा है कि इस बजट में रेलवे से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जायेगा। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रेल बजट भी अब आम बजट में शामिल होता है और रेल बजट से जुड़ी तमाम तरह की घोषणाएं भी उसी दिन होती हैं। तो ऐसे में इस बार 1 फरवरी को आने वाले बजट में कई विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशनों पर काम करने से संबंधित घोषणा की उम्मीद की जा रही है। केंद्रीय बजट 2021 में रेलवे के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की उम्मीद है। पिछले साल फरवरी से शुरू हुई कोविड-19 महामारी के चलते रेलवे को बहुत भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई की उम्मीद इस बजट से की जा सकती है।


गौरतलब है कि कोरोनावायरस महामारी होने के बावजूद भारतीय रेलवे ने कई विशेष ट्रेनों की शुरुआत कर यात्रियों की ज़रूरत और आराम का पूरी तरह से ख्याल रखा, साथ ही सुविधा स्थगित नहीं की। महामारी में भी स्टेशन पुनर्विकास परियोजना पर काम रुका नहीं, चलता रहा। आपको बता दें, कि इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन देश के पहले दो हवाई अड्डे जैसे विश्व-स्तरीय रेलवे स्टेशन- हबीबगंज और गांधीनगर स्टेशनों के पुनर्विकास पर काम कर रहा है। ऐसे में हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि इस बार के बजट में रेलवे स्टेशनों के विकास को लेकर कई तरह की घोषणाएं हो सकती हैं।


वहीं दूसरी तरफ यदि रोज़गार देने वाले सेक्टर्स की बात करें, तो बजट का फोकस सर्विस सेक्टर्स पर भी रह सकता है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इस बार का यूनियन बजट देश में इकोनॉमिक रिफॉर्म के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा। निर्मला सीतारमण द्वारा यह बजट ऐसे समय में पेश हो रहा है, जब कोरोनावायरस महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था को ऐतिहासिक तौर पर प्रभावित किया है और देश ने आर्थिक तौर पर बड़ी गिरावट का सामना किया है। ऐसे कई सेक्टर्स हैं जो कोरोनावायरस महामारी की मार झेल रहे हैं।


तो यह मुमकिन है कि बजट में सरकार का फोकस भारत की गिरती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए होगा। जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और MSME सेक्टर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बजट में सरकार का इन दो सेक्टर पर खास फोकस रहने वाला है, जिसकी वजह से इनसे जुड़े अन्य सेक्टर्स की कंपनियों को भी फायदा मिलेगा। ब्रोकरेज हाउस ने तो बजट से पहले ही अपनी पसंद के 14 शेयरों की लिस्ट तक जारी कर दी है।


बजट में अर्थव्यवस्था को मजबूती से सहारा देने वाले MSME सेक्टर के लिए कई बड़े एलान होने की संभावना है। एमएसएमई को हमेशा से ही सरकार सपोर्ट कर रही है और महामारी के बाद तो सरकार का रुझान इस ओर कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। कोरोनावायरस महामारी से हुई क्षतिपूर्ति को भरने के लिए इस बार के बजट में सरकार ऐसे सेक्टर्स में निवेश पर भी फोकस कर सकती है, जिनसे अधिक से अधिक रोज़गार की संभावना होती है, जिनमें MSME के अलावा टेक्सटाइल, कंस्ट्रक्शन और अफोर्डेबल हाउसिंग भी शामिल हैं।


यदि ब्रोकरेज हाउस की मानें तो कुछ रिफॉर्म कैपिटल मार्केट को ऊपर लेकर जा सकते हैं, जिनमें लेबर लॉ और जूडिशियल रिफॉर्म शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार को अगले कई साल के लिए एक ऐसा रोडमैप बजट में लेकर आना चाहिए, जिससे देश की डूब रही इकोनॉमी को एक मजबूत सपोर्ट मिल सके। ऐसे में जीडीपी को बूस्ट देने के लिए कुछ पॉलिसीज़ के सामने आने की उम्मीद की जा सकती है।


वहीं दूसरी तरफ यह भी उम्मीद की जा रही है कि घर से काम कर रहे, यानि कि वर्क फ्रॉम होम कर रहे सेक्टर्स को तोहफा मिल सकता है। कोरोनावायरस महामारी ने जिस तरह वर्क फ्रॉम होम कल्चर को हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बनाया है, ऐसे में कई कंपनियां इसे आगे बढ़ाने पर गंभीर विचार कर रही हैं। वर्क फ्रॉम होम कल्चर से कंपनियां या संस्थानों को कई तरह के आर्थिक फायदे और बचत मिली हैं। यदि हम मीडिया रिपोर्ट्स की बात करें तो 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार इस ओर भी कुछ राहत दे सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि 2021 के बजट में घर से काम करने वाले कर्मचारियों के टैक्स में छूट देने की उम्मीद है।


इन सभी के साथ ही 2021 के बजट में हेल्थ केयर के लिए एक अलग पैकेज की जरूरत है। जिस पर सरकार का करम होने की उम्मीद जताई जा रही है।


गौरतलब है कि साल बजट का सत्र 29 जनवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा। इसका दूसरा चरण 8 मार्च से शुरू होकर 8 अप्रैल तक चलेगा। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 29 जनवरी को दोनों सदनों को संबोधित करेंगे और 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करेंगी। वित्तमंत्री ने बजट को लेकर इशारा भी किया था। उन्होंने कहा था, कि इस साल का बजट कोरोनावायरस महामारी से जूझ रहे देश के लिए नई दिशा और दशा तय करेगा।