नौकरी छोड़ वर्कशॉप खोली और गांव में बनाया रोजगार का मॉडल
सहारनपुर के लाखनौर गांव के बीरपाल सिंह ने नौकरी छोड़ मोटर रिपेयरिंग की वर्कशॉप शुरू की. मेहनत, हुनर और यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना के तहत मिले ब्याज मुक्त लोन से उन्होंने अपना कारोबार खड़ा किया और गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बने.
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से करीब सात किलोमीटर दूर लाखनौर गांव में रहने वाले बीरपाल सिंह ने मेहनत और हुनर के दम पर अपनी पहचान बनाई है. एक दौर ऐसा था जब वह फैक्ट्रियों में बतौर इलेक्ट्रीशियन नौकरी करते थे. आज वह अपने गांव में मोटर रिपेयरिंग और रिवाइंडिंग की वर्कशॉप चलाकर न सिर्फ अपनी आजीविका कमा रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रहे हैं.
करीब दो दशकों तक उन्होंने फैक्ट्रियों में काम किया. सहारनपुर के आईएमटी कॉलेज में तकनीकी जिम्मेदारियां भी संभालीं. लेकिन मन में कहीं न कहीं यह इच्छा बनी रही कि कुछ अपना किया जाए. साल 2020 में उन्होंने साहसिक फैसला लिया और नौकरी छोड़ दी. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनके आत्मविश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी.
एक बात जिसने सोच बदल दी
कॉलेज परिसर में मेंटेनेंस ड्यूटी के दौरान एक मैनेजर की कही बात उनके मन में बस गई. उसने कहा था कि दूसरों के लिए काम करने से बेहतर है अपना काम खड़ा करना. यही शब्द उनके लिए दिशा बन गए. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने जल्दबाजी नहीं की. करीब एक साल तक खुद को आर्थिक रूप से तैयार किया. फिर पूरे मन से स्व रोजगार की राह पर चल पड़े.
बीरपाल सिंह मानते हैं कि नौकरी सुरक्षा देती है, लेकिन खुद का बिजनेस आत्मसम्मान देता है. यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही.
छोटी वर्कशॉप, बड़ा हौसला
लाखनौर में शुरू की गई उनकी वर्कशॉप में इलेक्ट्रिक मोटर की मरम्मत और रिवाइंडिंग का काम होता है. इसके साथ ही कटिंग और फिटिंग जैसे जरूरी काम भी किए जाते हैं. शुरुआत साधारण थी. जैसे जैसे भरोसा बढ़ा, काम भी बढ़ता गया. उन्होंने आधुनिक मशीनें खरीदीं ताकि काम तेजी और बेहतर गुणवत्ता के साथ हो सके.
काम बढ़ने पर उन्होंने दो से तीन युवाओं को साथ जोड़ा. अब वह नियमित काम के साथ आपातकालीन ब्रेकडाउन कॉल्स भी संभाल पाते हैं. यह उनके लिए सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बन गया है.
सरकारी मदद बनी सहारा
साल 2024-25 में उन्हें यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना (CM YUVA Yojana) के बारे में पता चला. इस योजना के तहत मिलने वाली ब्याज मुक्त राशि उनके लिए बड़ा सहारा बनी. उन्होंने सही प्रक्रिया अपनाई. बैंक और जिला उद्योग केंद्र से जानकारी ली. फिर ऑनलाइन आवेदन किया.
आवेदन स्वीकृत होते ही हर महीने ब्याज सब्सिडी सीधे खाते में आने लगी. इससे आर्थिक दबाव कम हुआ. वह सिर्फ मूलधन चुका रहे हैं. इस मदद से उन्होंने नई मशीनें खरीदीं और अपनी छोटी टीम को मजबूत किया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाई गई ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार पाने वाले से रोजगार देने वाला बनाना है. योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के उद्योगों/सेवा परियोजनाओं पर 100% ब्याज मुक्त एवं बिना गारंटी के लोन दिया जाता है. साथ ही परियोजना लागत पर 10% मार्जिन मनी अनुदान भी मिलता है.
गांव के युवाओं के लिए मिसाल
बीरपाल सिंह के परिवार के कई सदस्य बाहर के राज्यों में काम करते हैं. लेकिन उन्होंने गांव में रहकर कुछ करने का फैसला किया. आज उनकी वर्कशॉप गांव के युवाओं के लिए सीखने की जगह बन चुकी है.
यहां आईटीआई के छात्र प्रशिक्षण लेते हैं. उन्हें डायग्नोस्टिक्स, रिवाइंडिंग और सुरक्षा से जुड़े जरूरी कौशल सिखाए जाते हैं. बीरपाल मानते हैं कि अगर युवा सही दिशा में सीख लें, तो नौकरी के साथ साथ स्वरोजगार का रास्ता भी खुल जाता है.
नए उद्यमियों के लिए सलाह
बीरपाल सिंह कहते हैं कि बड़े सपनों की शुरुआत छोटे कदमों से होती है. वह युवाओं को सलाह देते हैं कि शुरुआत साइड बिजनेस से करें. धीरे धीरे उसे मुख्य काम बनाएं. नियमों का पालन करें. रिकॉर्ड साफ रखें. और सरकारी योजनाओं से डरें नहीं, बल्कि उन्हें समझें.
नौकरी छोड़े अब पांच साल हो चुके हैं. आज उनका काम स्थिर है. आमदनी बढ़ रही है. ग्राहकों का भरोसा मजबूत हो रहा है.
बीरपाल सिंह की कहानी यह साबित करती है कि गांव में रहकर भी आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है. जरूरत है तो बस हिम्मत, हुनर और सही फैसलों की.
Edited by रविकांत पारीक



