वॉइस AI स्टार्टअप Navana.ai को Ronnie Screwvala की अगुवाई में मिली 40 करोड़ रुपये की फंडिंग
Navana.ai की स्थापना दो भाइयों — राउल नानावटी और जय नानावटी — ने मिलकर की थी. कंपनी का फोकस ऐसी वॉइस AI टेक्नोलॉजी बनाने पर है, जो भारतीय भाषाओं में लोगों और डिजिटल सेवाओं के बीच की दूरी को कम कर सके. इस फंडिंग राउंड में शरद सांघी, Antler India, संदीप सिंघल और पॉला मारीवाला ने भी हिस्सा लिया है.
वॉइस AI स्टार्टअप Navana.ai ने Series A फंडिंग राउंड में 40 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस राउंड का नेतृत्व मशहूर ऑन्त्रप्रेन्योर और इन्वेस्टर रॉनी स्क्रूवाला ने किया है. इस फंडिंग राउंड में शरद सांघी, Antler India, संदीप सिंघल और पॉला मारीवाला ने भी हिस्सा लिया है.
Navana.ai इस ताजा फंडिंग का इस्तेमाल खास तौर पर BFSI (Banking, Financial Services, and Insurance) सेक्टर में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए करेगी. कंपनी भारतीय भाषाओं और अलग-अलग बोलियों के लिए अपने स्पीच मॉडल्स को बेहतर बनाने पर भी काम करेगी.
इसके अलावा कंपनी अपने AI कॉन्टैक्ट सेंटर और ऑटोमेटेड इवैल्यूएशन प्लेटफॉर्म के प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर भी निवेश करेगी.
Navana.ai की स्थापना दो भाइयों — राउल नानावटी और जय नानावटी — ने मिलकर की थी. कंपनी का फोकस ऐसी वॉइस AI टेक्नोलॉजी बनाने पर है, जो भारतीय भाषाओं में लोगों और डिजिटल सेवाओं के बीच की दूरी को कम कर सके.
फाउंडर्स का मानना है कि भारत में बड़ी संख्या में लोग आज भी इंग्लिश फर्स्ट डिजिटल सेवाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाते हैं. कंपनी के मुताबिक, देश में केवल 6 से 10 प्रतिशत लोग ही इंग्लिश बोलते हैं और करीब 38 प्रतिशत घरों को डिजिटल रूप से साक्षर माना जाता है.
ऐसे में Navana.ai लोगों की अपनी भाषा और बोली में काम करने वाली वॉइस AI टेक्नोलॉजी विकसित कर रही है.
कंपनी ने अब तक 12 भारतीय भाषाओं और 45 बोलियों के लिए अपने स्पीच मॉडल्स तैयार किए हैं. इन मॉडल्स को वास्तविक भारतीय आवाजों के आधार पर विकसित किया गया है, ताकि वे शोर, एक साथ कई लोगों के बोलने, भाषा बदलकर बात करने और अलग-अलग क्षेत्रीय उच्चारण जैसी स्थितियों को बेहतर तरीके से समझ सकें.
Navana.ai के मुताबिक, उसने अब तक 10 करोड़ मिनट से अधिक वॉइस AI सेवाएं दी हैं. कंपनी Bajaj Finserv, Protean, Ujjivan Small Finance Bank, Jana Small Finance Bank और Grihum Housing Finance जैसे संस्थानों के साथ काम कर चुकी है.
इन कंपनियों में Navana.ai की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सेल्स, कलेक्शंस, कंप्लायंस और कस्टमर सपोर्ट जैसे कामों में कॉल सेंटर आधारित प्रक्रियाओं को ऑटोमेट करने के लिए किया जा रहा है.
कंपनी ने भारतीय भाषाओं से जुड़ी AI रिसर्च में भी योगदान दिया है. Navana.ai ने IISc Bengaluru, IIT Madras, Microsoft Research और Gates Foundation जैसे संस्थानों के साथ ओपन सोर्स प्रोजेक्ट्स पर काम किया है.
IISc Bengaluru के साथ मिलकर कंपनी ने RESPIN नाम का एक स्पीच कॉर्पस भी ओपन सोर्स किया है. इसमें 45 बोलियों की करीब 10,000 घंटे की स्पीच डेटा शामिल है. कंपनी इसे भारतीय भाषाओं से जुड़े बड़े पब्लिकली अवेलेबल स्पीच डेटासेट्स में से एक बताती है.
Navana.ai के को-फाउंडर और CEO राउल नानावटी ने फंडिंग पर कहा कि कंपनी का लक्ष्य देश के हर व्यक्ति तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच आसान बनाना है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में रहता हो या कोई भी भाषा बोलता हो.
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने आइडेंटिटी, कनेक्टिविटी और पेमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे तैयार किए हैं. अब आने वाले समय में ऑटोमेशन की भूमिका तेजी से बढ़ने वाली है और वॉइस AI इसमें अहम भूमिका निभा सकती है.
वहीं, निवेशक रॉनी स्क्रूवाला का कहना है कि भारत की भाषाई विविधता को समझना ग्लोबल और सामान्य AI मॉडल्स के लिए आसान नहीं है.
उनके मुताबिक, भारत में वॉइस AI एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है. लेकिन एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए केवल कीमत ही महत्वपूर्ण नहीं है. यह भी जरूरी है कि कस्टमर डेटा कहां रखा जा रहा है और AI मॉडल्स रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स के अनुरूप हैं या नहीं.



