मिलें लिट-ओ-फेस्ट की डायरेक्टर स्मिता पारिख से, देश की तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा है इस सिंगल मदर की कहानी

By रविकांत पारीक
January 23, 2020, Updated on : Tue Feb 18 2020 04:44:49 GMT+0000
मिलें लिट-ओ-फेस्ट की डायरेक्टर स्मिता पारिख से, देश की तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा है इस सिंगल मदर की कहानी
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स्मिता पारिख एक सेल्फ मेड वुमन, आंत्रप्रेन्योर, टेडेक्स स्पीकर, आरजे (रेडियो जॉकी), अभिनेत्री और एक लेखक हैं। स्मिता ने मुंबई में लिट-ओ-फेस्ट की शुरुआत की जो नए और पुराने लेखकों, कवियों और गीतकारों को प्रदर्शन करने और बढ़ने के समान अवसर देता है। वह EBuzz एंटरटेनमेंट कंपनी की प्रबंध निदेशक और सीईओ भी हैं। वह कई लोगों के लिए प्रेरणा हैं और युवाओं को उनके सपने पुरा करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।


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स्मिता पारिख ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा मध्य-प्रदेश के इंदौर शहर में की और उसके बाद कॉमर्स में स्नातकोत्तर की डिग्री राजस्थान के उदयपुर शहर से हासिल की।


स्मिता बताती हैं,

"मैं बचपन से ही कविताएँ और कहानियाँ लिखने की शौक़ीन रही हूँ। मैं जब 11वीं कक्षा में थी तब 15 साल की उम्र में मुझे राजस्थान साहित्य अकादमी से कहानी लेखन के लिए युवा साहित्यकार पुरस्कार प्राप्त हुआ। उसी साल कविता लेखन के लिए महाराणा मेवाड़ फ़ाउंडेशन पुरस्कार और मालवा सम्मान से सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने मुझे और अधिक लिखने के लिए प्रोत्साहित किया।"


स्मिता आगे बताती हैं,

“साल 2014 में मेरा पहला कविता संग्रह "मैं पंथ निहारूँ" प्रकाशित हुआ और उसके बाद "नज़्म" - नज़्मिन इंतेज़ार की " प्रकाशित हुआ।”


अपनी यात्रा के बारे में जानकारी साझा करते हुए स्मिता कहती हैं,

“मैंने अपने पिताजी को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए बहुत पहले काम करना शुरू कर दिया था। पहले मैंने होम ट्यूशन लेना शुरू किया और उसके बाद मैंने चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में A.I.R (ऑल इंडिया रेडियो) में काम किया। मैंने अपनी शिक्षा अपने दम पर की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद मुझे उदयपुर के A.I.R में कैजुअल अनाउंसर की जॉब मिल गई। उसके बाद मैं 101 एफएम रेनबो की पहली आवाज़ों में से एक थी।"
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रेडियो के समय के अपने अनुभवों को याद करते हुए स्मिता आगे बताती हैं,

"रेडियो एक ऐसी चीज है जिसे मैंने हमेशा प्यार किया था क्योंकि रेडियो एक ऐसा माध्यम है जो एक साथ हजारों लोगों को जोड़ता है। रेडियो करने के बाद मुझे मीडिया की ताकत का पता चला। रेडियो के बाद मैंने अनूप जलोटा, उदित नारायण, सुखविंदर सिंह, शान, सोनू निगम के साथ लाइव शो करना शुरू किया। मैंने सलमान खान और शाहरुख खान और हरिहरनजी के साथ भी शो किए।"


रेडियो और लाइव शो से मिली अपार सफलता और आत्मविश्वास के कारण स्मिता ने टेलीविज़न की ओर रूख किया। टेलीविजन में किए गए काम के बारे में अपने अनुभव शेयर करते हुए स्मिता बताती है,

टेलीविजन पर मेरा पहला शो “अपने मेरे अपने” था, जिसमें मैंने एक टिपिकल बहू का किरदार निभाया था। इसके बाद मैंने “जाएँ कहाँ”  में भी मुख्य भूमिका निभाई। दूरदर्शन के नैशनल चैनल पर कई सफल कार्यक्रमों जैसे- बायोस्कोप, सिने सतरंगी, डीडी टॉप 10 का संचालन भी किया।


स्मिता EBuzz एंटरटेनमेंट के अपने सफर के बारे में आगे बताती हैं,

मैंने EBuzz एंटरटेनमेंट में बतौर मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव शुरूआत की। 3-4 साल बाद मैं उसी कंपनी में मैनेजिंग पार्टनर बन गई।


अपनी प्रेरणा के बारे में बात करते हुए स्मिता कहती हैं,

“मेरी प्रेरणा मेरा बेटा आर्यमान है जिसने मुझे सिखाया कि कैसे प्रेशर और स्ट्रेस को हैंडल करना है। उसने न केवल मुझे परफेक्शन के साथ काम करना सिखाया बल्कि पर्सनल लाइफ को बेलेंस करना भी सिखाया।
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अपने बेटे आर्यमान के साथ स्मिता पारिख

अपने बल पर अकेले इतना सब करने और इसके साथ अपनी लाइफ को बेलेंस करने के बारे में पुछने पर वे कहती हैं,

“मैं काम और निजी जिंदगी दोनों के साथ रणनीतिक तरीके से व्यवहार करती हूं, मैं गिल्ट से निपटने के बजाय काम के लिए क्वालिटी टाइम बिताने में विश्वास करती हूं। यह देखने-देखे जाने जैसा है, कभी-कभी आप जीवन को संतुलित नहीं करने का दर्द महसूस करते हैं लेकिन लाभ के बिना कोई दर्द नहीं होता है। लेकिन एक समझ वाले परिवार के साथ हम आसानी से संतुलन बना सकते हैं।”


लिट-ओ-फेस्ट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा,

“लिट-ओ-फेस्ट की शुरुआत 5 साल पहले उन छात्रों और युवा कलाकारों को मंच देने के लिए की गई जो सपोर्ट और मार्गदर्शन करने के लिए एक प्लेटफॉर्म की तलाश में हैं। पहले ही साल में इसमें हमें अच्छी सफलता मिली। अब तक लगभग हर बड़े पब्लिशिंग हाउस जैसे कि- हार्पर कॉलिंस, वाणी प्रकाशन, राजपाल एंड संस, जुगोरनॉट बुक्स, विश्वकर्मा प्रकाशन, क्रिमिंग प्रकाशन आदि हमारी 40 से अधिक किताबें प्रकाशित कर चुके हैं। अब लिट-ओ-फेस्ट अंतरराष्ट्रीय हो गया है, पिछले साल यह लंदन में आयोजित किया गया था। एक मंच के रूप में लिट ओ फेस्ट भी समाज को वापस देने में विश्वास रखता है। हमने इस उत्सव के तहत महाराष्ट्र के शाहपुर जिले के एक गांव 'दहीगांव' को भी गोद लिया है। यह विचार देश के साहित्य को साक्षरता से जोड़ने का है।"


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स्मिता आगे बताती हैं कि लिट-ओ-फेस्ट मुंबई ने प्रसिद्ध और महत्वाकांक्षी लेखकों की 150 पुस्तकों को लॉन्च और बढ़ावा दिया है। उनमें से कुछ हैं गुलज़ार साहब, अश्विन सांघी, डॉ. राधाकृष्णन पिल्लई, किरण मनराल, किरण नागरकर, राम जेठमलानी, उदयप्रकाश जी, केदारनाथ जी, प्रो. नरेन्द्र माली, श्री अभय कुमार दुबे, जनरल वीके सिंह, दिव्या दत्ता, नोवोनिल चक्रवर्ती, अनीता नायर आदि।


लिट ओ फेस्ट से सफलता प्राप्त करने वाले प्रमुख लेखकों के बारें में स्मिता ने बताया,

“कृतिका सहगल एक राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी से लेखिका बनी हैं। निलाशी शुक्ला जो कि Whiter Slates की कॉ-फाउंडर हैं। निलाशी वर्तमान में NITI Aayog, भारत सरकार के साथ अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति पर काम कर रही है। सावन गोयल, जो pseudonym (छद्म नाम) सावन विंचेस्टर के तहत लिखते हैं। गौरव गुप्ता जो कि मूलतः बिहार से हैं वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं, नवोदित कवि हैं।"


अवार्ड और उपलब्धियां

साल 2017 में स्मिता पारिख को वुमन ऑफ सबस्टांस ग्लोबल वुमन अचीवर्स अवार्ड और 101 व्हूज हू ऑफ राजस्थान कॉफी टेबल बुक (101 Who’s Who Of Rajsthan Coffee Table Book) अवार्ड से नवाजा गया। अगले ही साल यानि कि 2018 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर फिनिक्स मार्केटसिटी पावरवुमन अवार्ड भी स्मिता को दिया गया। साहित्य में योगदान के लिए आइकोनिक वू (Iconic woo) वुमन अचीवर्स अवार्ड दिया गया। स्मिता को भारतीय साहित्य में योगदान के लिए भारतीय उच्चायोग द्वारा इंडिया हाउस लंदन में अंतर्राष्ट्रीय वतन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही सामाजिक कार्य में योगदान के लिए यूनीफाइड ब्रेन्स (Unified Brains) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार से भी स्मिता पारिख को सम्मानित किया गया है।

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बहुमुखी प्रतिभा की धनी और प्रेरक स्मिता पारिख के साक्षात्कार का समापन उनकी एक कविता की कुछ पंक्तियों के साथ-

फिर नींद गुम… ख़्वाब जागे हैं अभी

बसने दो पलकों में सुलगती यादों को

उन गुज़रे हुये पलों के

भीगे एहसासों से…..

एक रात में भी कुछ लम्स जी लूँ…..

फिर सवारूँ सूनी पलकों को….

कि जिनसे रौशन होता है

मेरी रूह का कोना कोना


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