खत्म हुई ईस्ट इंडिया कंपनी, पटरी पर दौड़ी ‘डेक्कन क्वीन’ और नेपाल राजघराने की त्रासदी
1 जून का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, उपलब्धियों और त्रासदियों का साक्षी रहा है. नेपाल राजघराने की हत्या, डेक्कन क्वीन की शुरुआत, CNN की स्थापना से लेकर विश्व दुग्ध दिवस तक—जानें क्यों 1 जून को याद रखता है भारत और दुनिया का इतिहास.
हर तारीख अपने भीतर इतिहास के कई महत्वपूर्ण पन्नों को समेटे होती है. 1 जून (1 June Ka Itihas) का दिन भी भारत और विश्व के इतिहास में कई ऐतिहासिक घटनाओं, उपलब्धियों और दुखद घटनाओं का साक्षी रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 1 जून के दिन (1 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
इस लेख में हम जानेंगे कि 1 जून के दिन किन अहम घटनाओं ने इतिहास को नई दिशा दी.
भारत और विश्व के इतिहास में 1 जून की प्रमुख घटनाएं
1835 - कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की शुरुआत
1 जून 1835 को भारत में आधुनिक चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत हुई, जब कलकत्ता मेडिकल कॉलेज (Calcutta Medical College) ने छात्रों के लिए अपने द्वार खोले. यह दिन भारतीय चिकित्सा इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि यहीं से भारत में पश्चिमी शैली की चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण की नींव रखी गई.
इस कॉलेज की स्थापना लॉर्ड विलियम बैंटिक (Lord William Bentinck), जो उस समय भारत के गवर्नर-जनरल थे, के प्रयासों से की गई थी. इसका उद्देश्य भारतीय छात्रों को आधुनिक एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में प्रशिक्षित करना और भारत में योग्य डॉक्टरों की एक नई पीढ़ी तैयार करना था. इससे पहले चिकित्सा शिक्षा पारंपरिक पद्धतियों — जैसे आयुर्वेद और यूनानी — तक सीमित थी या यूरोपीय डॉक्टरों की निगरानी में सीमित रूप से दी जाती थी.
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज न केवल भारत का, बल्कि एशिया का भी पहला ऐसा संस्थान था जो पूरी तरह से पश्चिमी चिकित्सा शिक्षा प्रदान करता था. यह कॉलेज भारत में चिकित्सा शिक्षा का स्तंभ बन गया और बाद में देशभर में कई अन्य मेडिकल कॉलेजों की प्रेरणा बना.
1874 — ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत
ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company), जिसे एक व्यापारिक संगठन के रूप में 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम (Queen Elizabeth I) के चार्टर के तहत स्थापित किया गया था, धीरे-धीरे भारत में एक शक्तिशाली राजनीतिक और सैन्य शक्ति बन गई. 18वीं और 19वीं शताब्दी तक यह कंपनी भारत के बड़े हिस्से पर शासन कर रही थी.
लेकिन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम (जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है) (Revolt of 1857) ने कंपनी के शासन की नींव हिला दी. इस विद्रोह के बाद ब्रिटिश संसद ने “भारत सरकार अधिनियम 1858” पारित किया, जिसके तहत कंपनी से भारत का नियंत्रण छीनकर ब्रिटिश क्राउन (ब्रिटिश ताज) को सौंप दिया गया. इसके बाद भारत में सीधे ब्रिटिश सरकार का शासन शुरू हुआ.
अंततः, 1 जून 1874 को ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया. इसके साथ ही यह ऐतिहासिक संगठन, जिसने भारत पर लगभग दो शताब्दियों तक शासन किया था, हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा बन गया. ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की नई शुरुआत का प्रतीक था, जिसने स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी को और अधिक तेज़ कर दिया.
1930 — पटरी पर दौड़ी भारत की पहली लक्ज़री सुपरफास्ट ट्रेन ‘डेक्कन क्वीन’
1 जून 1930 को भारत की पहली प्रतिष्ठित डीलक्स ट्रेन “डेक्कन क्वीन” (Deccan Queen) ने अपनी पहली यात्रा शुरू की. यह ट्रेन मुंबई (तब बंबई) और पुणे के बीच चली और भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा. डेक्कन क्वीन को विशेष रूप से ब्रिटिश अधिकारियों और उच्च वर्ग के यात्रियों के लिए शुरू किया गया था. यह ट्रेन भारतीय उपमहाद्वीप की पहली इलेक्ट्रिक सुपरफास्ट डीलक्स पैसेंजर ट्रेन थी. शुरुआत में यह सप्ताह में एक बार चलती थी, लेकिन बाद में इसकी लोकप्रियता के कारण नियमित सेवा शुरू की गई. और यह आज भी मध्य रेलवे द्वारा चलाई जाती है. यह भारत की पहली लक्ज़री सुपरफास्ट ट्रेन मानी जाती है.
1980 — CNN की शुरुआत, 24 घंटे न्यूज़ देने वाला पहला टीवी चैनल
1 जून 1980 को अमेरिकी मीडिया मुग़ल टेड टर्नर (Ted Turner) ने CNN (Cable News Network) की स्थापना की, जो दुनिया का पहला 24 घंटे समाचार प्रसारित करने वाला चैनल बना. अटलांटा, जॉर्जिया से शुरू हुए इस चैनल का उद्घाटन डेविड वॉकर (David Walker) और लोइस हार्ट (Lois Hart) ने किया. CNN ने खबरों के प्रसारण का तरीका बदल दिया, क्योंकि इससे पहले समाचार सिर्फ दिन के निश्चित समय पर आते थे. CNN को वैश्विक पहचान 1991 की खाड़ी युद्ध (Persian Gulf War) की कवरेज से मिली, जब उसने युद्ध को लाइव दिखाया.
2001 — नेपाल राजघराने की त्रासदी
1 जून 2001 को नेपाल के इतिहास (Nepalese royal massacre) की सबसे दुखद और चौंकाने वाली घटनाओं में से एक घटी, जब राजा बीरेन्द्र (King Birendra), रानी ऐश्वर्या (Queen Aiswarya) और शाही परिवार के कुल 10 सदस्यों की हत्या कर दी गई. यह घटना काठमांडू स्थित नारायणहिती राजमहल में एक पारिवारिक भोज के दौरान हुई. इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी क्राउन प्रिंस दीपेन्द्र (Crown Prince Dipendra) को माना गया, जो कथित रूप से शराब और नशे की हालत में था और पारिवारिक विवादों, विशेषकर विवाह को लेकर असहमति, से नाराज़ था. गोलीबारी के बाद दीपेन्द्र ने खुद को भी गोली मार ली, लेकिन वह कोमा में रहते हुए कुछ दिनों तक राजा घोषित रहा. उसकी मृत्यु के बाद राजा बीरेन्द्र के भाई ज्ञानेंद्र नेपाल के नए राजा बने. इस घटना ने न केवल नेपाल की जनता को सदमे में डाल दिया, बल्कि देश की राजशाही व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गहरा असर डाला, जो बाद में नेपाल को एक गणराज्य बनने की दिशा में ले गई.
1 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1926 — मर्लिन मुनरो, हॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री
1929 — नरगिस दत्त, भारतीय फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री
1938 — बलदेव वंशी, समकालीन कवि एवं लेखक
1958 — अशोक कुमार, भारत के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ियों में से एक
1975 — कर्णम मल्लेश्वरी, भारत की प्रसिद्ध भारोत्तोलक
1972 — डॉ. मनसुख मांडविया, भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ
1991 — राजेश्वरी गायकवाड़, भारतीय महिला क्रिकेटर
1 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1969 — विलियम मैल्कम हेली, पंजाब, उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल
1987 — ख़्वाजा अहमद अब्बास, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और उर्दू लेखक
1996 — नीलम संजीव रेड्डी, भारत के छठे राष्ट्रपति
2001 — राजा बीरेन्द्र, नेपाल के लोकप्रिय राजा, जिनकी मृत्यु शाही महल में गोलीबारी के दौरान हुई
2020 — वाजिद ख़ान, प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी 'साजिद-वाजिद' में से एक
1 जून को क्यों याद रखा जाए?
- अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस (International Day for Protection of Children): प्रत्येक वर्ष 1 जून को मनाया जाता है. यह दिवस सबसे पुराना अंतर्राष्ट्रीय उत्सव है जो 1950 से मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है. रूस में अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस पहली बार सन 1949 में मनाया गया था. इसका निर्णय मॉस्को में अंतर्राष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की एक विशेष बैठक में किया गया था. 1 जून सन 1950 को दुनिया भर के 51 देशों में 'अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस' पहली बार मनाया गया था.
- विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day): प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है. विश्व दुग्ध दिवस वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा एक वैश्विक आहार के रूप में दूध के महत्त्व को रेखांकित करने के लिये स्थापित किया गया. इस दिन का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान आकर्षित करने का अवसर प्रदान करना है.
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