31 मई: तिरंगा बना राष्ट्रगौरव, राजीव गांधी बने नेता और मिकी माउस ने तोड़ी चुप्पी!
31 मई का दिन इतिहास में खास है – पहली बार बोला मिकी माउस, भारत को मिला तिरंगा झंडा, राजीव गांधी ने रखा राजनीति में कदम और लखनऊ में जली आज़ादी की मशाल. जानिए इस तारीख से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं, क्रांति और बदलाव की कहानियां.
हर तारीख अपने भीतर इतिहास की कई कहानियाँ समेटे होती है. 31 मई (31 May Ka Itihas) भी एक ऐसा ही दिन है, जो विश्व और भारत दोनों के इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 31 मई के दिन (31 May History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं इस दिन से जुड़ी कुछ प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जिन्होंने समय की धारा को नया मोड़ दिया.
भारत और विश्व के इतिहास में 31 मई की प्रमुख घटनाएं
1578 – मार्टिन फ्रोबिशर की तीसरी आर्कटिक यात्रा
ब्रिटिश खोजकर्ता मार्टिन फ्रोबिशर (Martin Frobisher) ने 31 मई 1578 को अपनी तीसरी आर्कटिक यात्रा शुरू की थी. इस अभियान में कुल 15 जहाज और लगभग 400 व्यक्ति शामिल थे. यह उस समय तक का सबसे बड़ा इंग्लिश आर्कटिक अभियान था. उनका उद्देश्य उत्तरी अमेरिका के रास्ते एशिया पहुंचने के लिए 'नॉर्थवेस्ट पैसेज' (Northwest Passage) की खोज करना था. यह यात्रा उस दौर की भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक बनी. यह पहली बार था जब इंग्लैंड ने किसी क्षेत्र में अर्ध-स्थायी उपनिवेश की योजना बनाई थी — हालांकि यह असफल रहा. इंग्लैंड उस समय समुद्री शक्ति बनने की कोशिश कर रहा था.
1857 – लखनऊ में स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला
31 मई 1857 को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लखनऊ और उसके आसपास के क्षेत्रों में विद्रोह ने उग्र रूप ले लिया. यह तिथि पहले से तय की गई थी जब विभिन्न क्षेत्रों में सिपाही और आम जनता ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकसाथ उठ खड़े होंगे. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व बेगम हज़रत महल (Begum Hazrat Mahal) ने किया, जिन्होंने अपने नाबालिग पुत्र बिरजिस कादर को नवाब घोषित किया. इस दिन ब्रिटिश प्रतिष्ठानों, सेना छावनियों और सरकारी इमारतों पर हमले हुए. सिपाहियों के साथ आम जनता ने भी इस आंदोलन में भाग लिया, जिससे यह आंदोलन बड़ी जनक्रांति बन गया. यह दिन 1857 की क्रांति के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक था, जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी.
1910 – दक्षिण अफ्रीका बना यूनियन ऑफ साउथ अफ्रीका
31 मई 1910 को ब्रिटेन ने चार उपनिवेशों — केप कॉलोनी, नटाल, ट्रांसवाल, और ऑरेंज फ्री स्टेट — को मिलाकर यूनियन ऑफ साउथ अफ्रीका की स्थापना की. लुईस बोथा (Louis Botha) पहले प्रधानमंत्री बने. यह एक डोमिनियन स्टेटस वाली सरकार थी, जो ब्रिटिश सम्राट के अधीन लेकिन आंतरिक रूप से स्वायत्त थी. इस नई राजनीतिक संरचना में श्वेत अल्पसंख्यकों को सत्ता और अधिकार मिले, जबकि काले अफ्रीकी, एशियाई और रंगभेद श्रेणी के लोगों को मताधिकार और समान अधिकारों से वंचित रखा गया. यही व्यवस्था आगे चलकर रंगभेद (Apartheid) नीति की नींव बनी, जिसने दक्षिण अफ्रीका को दशकों तक जातिवाद, भेदभाव और संघर्ष के दौर में डाले रखा.
1921 – कांग्रेस का झंडा बना 'भारत का तिरंगा'
31 मई 1921 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विजयवाड़ा अधिवेशन में पहली बार पार्टी के झंडे को अनौपचारिक मान्यता दी. यह झंडा स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया (Pingali Venkayya) द्वारा डिज़ाइन किया गया था, जिसमें दो रंग — लाल (हिंदू) और हरा (मुस्लिम) थे, और बीच में चरखा था. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के सुझाव पर इसमें सफेद रंग जोड़ा गया, जो अन्य समुदायों और शांति का प्रतीक बना. यह झंडा आगे चलकर कुछ बदलावों के साथ 22 जुलाई 1947 को भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना, जिसमें चरखे की जगह अशोक चक्र आया. इस तरह 1921 का यह झंडा तिरंगे की नींव बना.
1929 – पहली बार बोला 'मिकी माउस'
31 मई 1929 को मिकी माउस (Mickey Mouse) को पहली बार स्थायी आवाज मिली, और यह आवाज खुद वॉल्ट डिज़्नी (Walt Disney) ने दी थी. इससे पहले मिकी माउस के शुरुआती शॉर्ट फिल्मों में कोई स्थायी संवाद या स्पष्ट आवाज नहीं थी. लेकिन 1929 में आई फिल्म 'The Karnival Kid' में मिकी माउस ने पहली बार बोलना शुरू किया और उसका पहला संवाद (डायलॉग) था: "Hot Dogs!" यह मिकी माउस की 9वीं शॉर्ट फिल्म थी. यह मिकी माउस के करियर में एक बड़ा मोड़ था क्योंकि इससे वह एक मूक कार्टून कैरेक्टर से एक जीवंत और बोलने वाले किरदार में बदल गया. इसने न सिर्फ मिकी को लोकप्रिय बनाया, बल्कि वॉल्ट डिज़्नी स्टूडियो (Walt Disney Studio) को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
1984 – राजीव गांधी चुनाव जीतकर ससंद पहुंचे
31 मई 1984 को राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से उपचुनाव में जीत हासिल की. यह सीट उनके भाई संजय गांधी के 1980 में हुए विमान हादसे में निधन के बाद खाली हुई थी. कांग्रेस पार्टी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के आग्रह पर राजनीति में आए राजीव गांधी के लिए यह पहला चुनाव था. राजीव गांधी ने अमेठी से भारी मतों से जीत दर्ज की, और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा का औपचारिक आरंभ हुआ. वे जनता के बीच एक युवा, शिक्षित और आधुनिक नेता के रूप में उभरे. इसी वर्ष 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी देश के 6वें और सबसे युवा प्रधानमंत्री (उम्र 40 वर्ष) बने. यह जीत राजीव गांधी के राजनीतिक कॅरिअर की नींव बनी और भारत की राजनीति में एक नई पीढ़ी की शुरुआत मानी गई
31 मई को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1725 – अहिल्याबाई होल्कर, भारत की वीरांगनाओं में से एक
1899 – लाला जगत नारायन, प्रसिद्ध पत्रकार तथा हिन्द समाचार समूह के संस्थापक
1925 – राज खोसला, हिंदी फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक, निर्माता और लेखक
1927 – वनराज भाटिया, भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक
1942 – विनोद मेहता, आउटलुक के संस्थापक एवं प्रसिद्ध पत्रकार
31 मई को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1973 – गुरनाम सिंह, भारतीय राजनीतिज्ञ और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री
1987 – जॉन अब्राहम, मलयाली फ़िल्म निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक
1988 – संतराम बी. ए., समाज सुधारक और लेखक
1988 – द्वारका प्रसाद मिश्रा, स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, साहित्यकार और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री
1998 – विचित्र नारायण शर्मा, 'जमना लाल बजाज पुरस्कार' से सम्मानित प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ
1999 – वीरेंद्र कुमार सकलेचा, मध्य प्रदेश के 10वें मुख्यमंत्री
2003 – अनिल बिस्वास, प्रसिद्ध संगीतकार
2009 – कमला दास, अंग्रेज़ी और मलयालम की प्रसिद्ध लेखिका
31 मई को क्यों याद रखा जाए?
- विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day - WNTD): विश्व तंबाकू निषेध दिवस हर साल 31 मई को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 1987 में तंबाकू के उपयोग और इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए की थी. 1987 में पहली बार WHO के सदस्य देशों ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी. इस दिन का उद्देश्य लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करना और सरकारों को तंबाकू नियंत्रण की नीतियां लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना है. तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों और कई अन्य घातक बीमारियों का प्रमुख कारण है. दुनिया भर में हर साल 80 लाख से अधिक मौतें तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण होती हैं.
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