12 किताबें, 50 गाने और Guinness World Record – मिलिए 14 साल की वाचा ठक्कर से
14 साल की युवा लेखिका वाचा ठक्कर ने एक किताब की तलाश को मिशन में बदल दिया. आज वह 12 किताबें लिख चुकी हैं, 50 से अधिक गाने गाए हैं और अपनी पब्लिशिंग कंपनी चला रहीं हैं. जानिए कैसे लेखन, संगीत और सामाजिक जागरूकता के जरिए वह नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं.
साल 2022 में वाचा ठक्कर (Vacha Thacker) और उनके माता-पिता एक खास किताब ढूंढ रहे थे. उनके छोटे भाई पर्व ठक्कर (Parv Thacker) के लिए सनातन धर्म से जुड़ी कोई ऐसी किताब, जिससे बच्चे खेल-खेल में अपनी संस्कृति को समझ सकें. काफी खोजबीन के बाद भी उन्हें ऐसी कोई किताब नहीं मिली.
किसी ने उस समय नहीं सोचा होगा कि एक किताब की तलाश एक नई कहानी लिख देगी. जिस सवाल का जवाब बाजार में नहीं मिला, वाचा ने उसे खुद लिखने का फैसला किया. उस फैसले से उनकी पहली किताब जन्मी. फिर शब्द उनके साथी बन गए. कहानियां आकार लेने लगीं और विचार किताबों में बदलते गए. धीरे-धीरे यह सफर एक किताब तक सीमित नहीं रहा. यह एक ऐसे मिशन में बदल गया, जिसने वाचा को युवा लेखिका, गायिका और ऑन्त्रप्रेन्योर के रूप में नई पहचान दी.
आज 14 साल की वाचा 12 किताबों की लेखिका हैं, 50 से अधिक गाने गा चुकी हैं, अपनी पब्लिशिंग कंपनी चला रही हैं. इसके साथ ही वे कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने की दिशा में काम कर रही हैं. उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि बड़े बदलाव अक्सर किसी छोटी समस्या का समाधान खोजने से शुरू होते हैं.
वाचा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने कभी अपनी उम्र को अपनी पहचान की सीमा नहीं बनने दिया. उनके लिए हर नया विचार कुछ नया सीखने और दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने का अवसर था. चाहे किताब लिखनी हो, संगीत के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाना हो या बच्चों को रचनात्मक बनने के लिए प्रेरित करना हो, उन्होंने हर कदम पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाया. यही सोच उन्हें लगातार नई मंजिलों की ओर ले जा रही है.

14 साल की वाचा 12 किताबों की लेखिका हैं, 50 से अधिक गाने गा चुकी हैं, अपनी पब्लिशिंग कंपनी चला रही हैं.
घर का साथ, सपनों की बात
वाचा का बचपन ऐसे माहौल में बीता जहां रचनात्मकता, संस्कृति और समाज के लिए कुछ करने की भावना हमेशा मौजूद रही. उनके पिता डॉ. कृपेश ठक्कर (Dr. Krupesh Thacker) कई क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं. उन्हें देखकर वाचा ने सीखा कि एक व्यक्ति एक साथ कई क्षेत्रों में योगदान दे सकता है. वहीं उनकी मां डॉ. पूजा ठक्कर (Dr. Pooja Thacker) ने उन्हें अनुशासन, संवेदनशीलता और अच्छे मूल्यों का महत्व सिखाया.
हाल में YourStory से हुई बातचीत में वाचा [ठक्कर] बताती हैं कि उनके माता-पिता ने कभी उन्हें किसी तय रास्ते पर चलने के लिए मजबूर नहीं किया. उन्होंने हमेशा नए विचारों को अपनाने और अपने तरीके से सीखने की आजादी दी. यही कारण है कि बचपन की जिज्ञासा धीरे-धीरे किताबों, संगीत और सामाजिक पहलों में बदलती चली गई.
वाचा कहती हैं, “मैंने हमेशा महसूस किया कि किसी अच्छे काम की शुरुआत करने के लिए उम्र का इंतजार नहीं करना चाहिए. मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया कि अगर आपके पास कोई ऐसा विचार है जो लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, तो उसे शुरू करने की कोशिश जरूर करनी चाहिए. हर नया अनुभव मुझे कुछ न कुछ सिखाता गया. धीरे-धीरे लेखन, संगीत और सामाजिक कार्य मेरे जीवन का हिस्सा बनते गए.”
वाचा की पहली किताब “Sanatan Word Search: Indian Culture for Kids” थी. इस किताब का विमोचन भी खास रहा. गीता जयंती के अवसर पर उनकी और उनके पिता — दोनों की पहली किताब एक साथ लॉन्च हुईं. पिता और बेटी दोनों ने एक ही दिन प्रकाशित लेखक के रूप में अपने नए सफर का आगाज किया.
आज वाचा अंग्रेजी, संस्कृत, हिंदी, गुजराती और कच्छी जैसी भाषाओं में 12 किताबें लिख चुकी हैं.

वाचा और उनके छोटे भाई पर्व ठक्कर ने मिलकर 2022 में Parv Publishing की शुरुआत की थी.
बच्चों के लिए बच्चों की Publishing Company
पहली किताब की सफलता के बाद वाचा और उनके छोटे भाई पर्व ने मिलकर Parv Publishing की शुरुआत की. इसकी सोच बेहद अलग और प्रेरणादायक है — “By the Children, For the Children.”
दोनों भाई-बहनों ने महसूस किया कि कई बच्चे पारंपरिक पढ़ाई के तरीकों से आसानी से नहीं जुड़ पाते. इसलिए उन्होंने ऐसी किताबें बनाने का फैसला किया जो सीखने को रोचक, संवादात्मक और संस्कृति से जुड़ा बनाएं.
वाचा रणनीति और योजना पर ध्यान देती हैं, जबकि पर्व नए विचार और रचनात्मकता लेकर आते हैं. दोनों की अलग-अलग खूबियां इस पहल की ताकत बन गई हैं.
वाचा बताती हैं, “Parv Publishing शुरू करते समय हमारा उद्देश्य सिर्फ किताबें प्रकाशित करना नहीं था. हम चाहते थे कि बच्चे केवल पाठक बनकर न रहें, बल्कि रचनाकार भी बनें. जब कोई बच्चा अपनी कल्पना को कहानी, किताब या किसी रचनात्मक काम के रूप में सामने लाता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है. हम ऐसे बच्चों को मंच देना चाहते हैं ताकि वे अपनी आवाज और अपने विचार दुनिया तक पहुंचा सकें.”
संगीत बना बदलाव का जरिया
वाचा की संगीत यात्रा भी काफी दिलचस्प रही. जब वह सिर्फ ढाई साल की थीं, तब एक रिकॉर्डिंग के दौरान उन्होंने खेल-खेल में राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया. उस वीडियो का एक हिस्सा फाइनल म्यूजिक वीडियो में शामिल किया गया.
लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने परिवार को उनका पहला सोलो राष्ट्रगान वीडियो बनाने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद संगीत उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया.
आज वाचा 50 से अधिक गाने गा चुकी हैं. लेकिन उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है. वह इसे जागरूकता और सामाजिक बदलाव के माध्यम के रूप में देखती हैं. Global Clubfoot Awareness Parv, Music Therapy for All, Gunje Gita, Sanatan Champions League और Chalo Ram Bane जैसी पहलें इसी सोच का हिस्सा हैं.

वाचा ठक्कर 50 से अधिक गाने गा चुकी हैं.
कला के जरिए जागरूकता
वाचा का मानना है कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है. यह समाज में बदलाव लाने का भी शक्तिशाली जरिया हो सकती है. इसी सोच से “Awareness Through Arts” की अवधारणा सामने आई.
इस पहल के तहत किताबों, संगीत, फिल्मों और कहानी कहने की कला का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, बाल विकास और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए किया जाता है.
उनकी सामाजिक पहलों के केंद्र में Give Vacha Foundation है. यह संस्था “Gift of Time” की सोच पर आधारित है. इसका उद्देश्य लोगों को अपनी प्रतिभा और समय समाज के लिए उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है.
वाचा ठक्कर बताती हैं, “मेरा मानना है कि जब जागरूकता और रचनात्मकता साथ आती हैं, तब उसका असर कहीं ज्यादा गहरा होता है. लोग केवल जानकारी नहीं लेते, बल्कि उसे महसूस करते हैं, याद रखते हैं और उससे जुड़ते हैं. किताबें, संगीत और कहानियां लोगों के दिल तक पहुंचती हैं. यही वजह है कि मैं कला को सामाजिक बदलाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानती हूं.”
उपलब्धियों से ज्यादा असर मायने रखता है: वाचा
वाचा के सफर में कई उपलब्धियां जुड़ी हैं. उन्हें Youngest Multilingual Author के रूप में पहचान मिली है. वह Global Clubfoot Awareness Parv की USA Ambassador भी रह चुकी हैं. उन्होंने अमेरिका में भारत के कॉन्सुल जनरल से मुलाकात कर अपनी पहलों के बारे में जानकारी साझा की.
उन्होंने Grammy Awards के लिए विचाराधीन परियोजनाओं, Guinness World Record से जुड़े म्यूजिक एल्बमों और Krup Literature Festival जैसी पहलों में भी योगदान दिया है.
लेकिन वाचा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि पुरस्कार या सम्मान नहीं हैं. उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण वे पल हैं जब कोई बच्चा उनकी किताब से कुछ नया सीखता है, कोई श्रोता उनके गीत से प्रेरित होता है या कोई व्यक्ति किसी जागरूकता अभियान से जुड़कर सकारात्मक बदलाव की ओर कदम बढ़ाता है.

वाचा ठक्कर Global Clubfoot Awareness Parv की USA Ambassador भी रह चुकी हैं.
सपने अभी और बड़े हैं: वाचा
वाचा आने वाले वर्षों में भारतीय भाषाओं में और अधिक किताबें प्रकाशित करना चाहती हैं. वह ऑडियोबुक्स सेक्टर में भी काम करना चाहती हैं ताकि बच्चों तक उनकी सामग्री और आसानी से पहुंच सके.
वह Gujarat Children's Literature Festival और Gunje Gita Champions League जैसी पहलों को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही हैं. इसके साथ ही वह कई नई फिल्मों पर भी काम कर रही हैं, जिनमें वह सह-संगीतकार, अभिनेत्री और सह-संपादक की भूमिका निभाएंगी. इन फिल्मों के नाम हैं: Tiny Steps Take Giant Leaps, Main Bhi Arjun – Parv, Maa Parv, और Nanakda Pagla Bhare Haranfad.
उनकी आगामी पुस्तकों में Ashta Lakshmi Tales और Nav Durga Tales भी शामिल हैं. साथ ही वह Grammy विचार प्रक्रिया के लिए नए गीतों की रिकॉर्डिंग में भी व्यस्त हैं.
वाचा का संदेश: ‘अभी शुरुआत करो’
वाचा ठक्कर की कहानी एक बेहद सरल लेकिन शक्तिशाली संदेश देती है. किसी अच्छे काम की शुरुआत करने के लिए सही समय का इंतजार मत कीजिए. शुरुआत आज भी की जा सकती है.
वाचा ठक्कर बताती हैं, “अगर मैं युवाओं को एक संदेश देना चाहूं तो यही कहूंगी कि जिज्ञासु बने रहिए, सीखते रहिए और सही मार्गदर्शकों को खोजिए. जीवन में चुनौतियां आएंगी, लेकिन वही चुनौतियां आपको नई दिशा भी दे सकती हैं. मेरे माता-पिता ने मुझे अपने विचारों पर भरोसा करना सिखाया. मैं मानती हूं कि हर व्यक्ति में कुछ अच्छा करने की क्षमता होती है. जरूरत सिर्फ पहला कदम उठाने की होती है.”
वाचा की कहानी बताती है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती. कभी-कभी एक छोटी सी जिज्ञासा, एक साधारण विचार या किसी समस्या का समाधान खोजने की कोशिश ही ऐसी यात्रा की शुरुआत बन जाती है, जो हजारों लोगों को प्रेरित कर सके.



