आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के काम को सरल बनाते हुए उनपर नजर रखेगा ‘एम-सखी’

उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में अक्टूबर से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लाया जाएगा प्रयोग मेंक्वालकाॅम ने ‘इंट्राहेल्थ’ के माध्यम से सिफ्सा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ किया है करारमान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), सहायक नर्स और दाई (एएनएम) के कार्यों पर रखी जाएगी नजरमातृ, नवजात और शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिये प्रेरित करना है प्रमुख उद्देश्य

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के काम को सरल बनाते हुए उनपर नजर रखेगा ‘एम-सखी’

Monday September 21, 2015,

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उत्तर प्रदेश में कार्यरत आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कामकाज को सरल बनाने के साथ-साथ उनके कार्यों की निगरानी के लिये अक्टूबर माह से एक मोबाइल एप्लीकेशन ‘एम-सखी’ को लाँच किया जा रहा है। प्रारंभ में इस एप्लीकेशन को प्रदेश के पाँच जिलों में प्रयोग में लाया जाएगा। मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा), सहायक नर्स और दाई (एएनएम) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में किये जा रहे प्रयासों का अब मल्टीमीडिया सक्षम एप्लीकेशन ‘एम-सखी’ और ‘एम-सेहत’ कार्यक्रम की मदद से निरीक्षण किया जाएगा। सरकार द्वारा उठाये जा रहे इस कदम का मुख्य उद्देश्य इन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मातृ, नवजात और शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिये प्रेरित करना है।

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इस परियोजना के लिये तकनीकी सहयोग देने वाली क्वालकाॅम ने ‘इंट्राहेल्थ’ के माध्यम से राज्य की एजेंसी स्टेट इनोवेशंस इन फेमिली प्लानिंग सर्विसेस एजेंसी (सिफ्सा) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। ‘इंट्राहेल्थ’ के कंट्री हेड लबोनी जाना बताते हैं, ‘‘बीते वर्ष नवंबर के महीने में झांसी जिले के बड़गाम ब्लाॅक में ‘एम-सखी’ को एक प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में प्रारंभ किया गया। अब हम अगले महीने से कन्नौज, बरेली, सीतापुर, मिर्जापुर और फैजाबाद जिलों में एक विस्तृत परियोजना के रूप में ‘एम-सेहत’ को भी प्रारंभ करने जा रहे हैं जिसमें ‘एम-सखी’ को भी शामिल किया जाएगा।’’

क्वालकाॅम के वरिष्ठ प्रबंधक अनिर्बन मुखर्जी बताते हैं कि प्रशिक्षण के दौरान आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को पहले से ही एप्लीकेशन से सुसज्जित मोबाइल फोन से लैस किया जाएगा। वे बताते हैं कि क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ताओं द्वारा निष्पादित किया गया काम डैशबोर्ड के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगा जिसकी सहायता से ब्लाॅक और जिला स्तर पर पर्यवेक्षण किया जा सकेगा। मुखर्जी का कहना है कि इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी ‘एम-सखी’ परियोजना के साथ जोड़ा जाएगा।

इसके अलावा हाल ही में सोनीपत, हरियाणा के हसनपुर गांव में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तौर पर भारत के पहले आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र को शुरू किया गया जिसके भविष्य में 4000 अन्य स्थानों पर भी खोले जाने की योजना है और ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इसके माध्यम से बीते 40 वर्षों में सरकार द्वारा बच्चों और महिलाओं को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही योजनाओं में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिलेगा। सोनीपत में प्रारंभ हो रही यह परियोजना एक निजी खनन कंपनी वेदांता की साझेदारी के साथ 12 लाख रुपये की लागत में सामने आ रही है और यह केंद्र सरकार की नंद-घर योजना का एक हिस्सा है। इस योजना में आंगनवाड़ी केंद्रों को नंद-घर में तब्दील किया जाएगा जिसमें प्रतिदिन किसी भी समय 50 बच्चों को समायोजित करने की क्षमता होगी और ये सभी केंद्र आधुनिक और नवीनतम सुविधाओं से सुसज्जित होंगे।