24 जून: नेपोलियन हारा, इमरजेंसी की साजिश और टेनिस का रिकॉर्ड
24 जून का इतिहास: जानिए इस दिन नेपोलियन ने रूस पर हमला किया, इमरजेंसी की तैयारी हुई, पिकासो ने पहली प्रदर्शनी लगाई और खेला गया टेनिस का सबसे लंबा मैच. जानिए इस दिन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं. पढ़िए आज का रोचक तथ्य.
हर दिन इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जो भविष्य को आकार देने का काम करती हैं. 24 जून (24 June Ka Itihas) भी इतिहास के पन्नों में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है – चाहे वह भारत से जुड़ी हों या फिर विश्व इतिहास से.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 24 जून के दिन (24 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए नजर डालते हैं 24 जून को घटित प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर —
भारत और विश्व के इतिहास में 24 जून की प्रमुख घटनाएं
1509 – हेनरी VIII और कैथरीन की ताजपोशी
24 जून 1509 को इंग्लैंड के राजा (King of England) हेनरी अष्टम (Henry VIII) और कैथरीन ऑफ एरागॉन (Catherine of Aragon) की संयुक्त ताजपोशी हुई थी. उन्हें वेस्टमिंस्टर एबी (Westminster Abbey) में विधिवत ताज पहनाया गया था. हेनरी और कैथरीन का विवाह उसी वर्ष 11 जून को हुआ था. हेनरी अष्टम सिर्फ 17 वर्ष की उम्र में अपने पिता हेनरी सप्तम (Henry VII) की मृत्यु के बाद सिंहासन पर बैठे. उनका शासनकाल (1509–1547) इंग्लैंड के इतिहास में बहुत अहम माना जाता है, क्योंकि उन्होंने चर्च ऑफ इंग्लैंड (Church of England) की स्थापना की और धार्मिक सुधारों की शुरुआत की. उनका यह राजतिलक ट्यूडर वंश (Tudor dynasty) के सबसे चर्चित और विवादास्पद शासन की शुरुआत का प्रतीक बना.
1812 — नेपोलियन ने रूस पर हमला शुरू किया
1812 में फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) ने 24 जून को रूस पर आक्रमण (Napoleon’s Grande Armée invades Russia) की शुरुआत की थी, जिसे रशियन कैंपेन या इनवेज़न ऑफ रशिया कहा जाता है. फ्रांस (France) की ओर से लगभग 6 लाख सैनिकों की "ग्रांदे आर्मी" (Grande Armée) इस युद्ध में उतरी थी, जो उस समय की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक थी. नेपोलियन ने सोचा था कि वह जल्दी से जीत हासिल कर लेगा, लेकिन रूसी सेना (Russian army) ने पीछे हटते हुए "Scorched Earth Policy" (झुलसी हुई धरती की नीति) अपनाई—अपने ही गांव-शहर जला दिए ताकि फ्रांसीसी सेना (French Army) को कोई संसाधन न मिल सके. इसके साथ ही भयंकर रूसी सर्दी, बीमारियों और भोजन की कमी ने फ्रांसीसी सेना को बुरी तरह तोड़ दिया. मास्को पहुंचने के बाद भी नेपोलियन को निर्णायक जीत नहीं मिली और अंततः उन्हें पीछे हटना पड़ा. इस अभियान में उनकी लगभग 90% सेना मारी गई या लापता हो गई, और यह युद्ध उनके पतन की शुरुआत बना.
1948 – सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन की नाकाबंदी की
द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद जर्मनी (Germany) के विभाजन के समय, 24 जून 1948 को सोवियत संघ (Soviet Union) ने पश्चिम बर्लिन (West Berlin) की सभी सड़क, रेल और नहर मार्गों को बंद कर दिया, जिससे पश्चिमी शक्तियों के नियंत्रण वाले बर्लिन क्षेत्र में भोजन, ईंधन और अन्य जरूरी वस्तुओं की भारी कमी हो गई. यह नाकाबंदी (blockade) लगभग 2.5 लाख लोगों को प्रभावित करने वाली थी. इसके जवाब में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने 26 जून 1948 से बर्लिन एयरलिफ्ट (Berlin Airlift) की शुरुआत की, जिसके तहत हवाई जहाज़ों से रोज़ाना हज़ारों टन खाद्य सामग्री, कोयला और दवाएं पश्चिम बर्लिन पहुंचाई गईं. यह ऐतिहासिक प्रयास लगभग एक साल तक चला और इसमें 2 लाख से अधिक उड़ानें भरी गईं. आखिरकार, सोवियत संघ को 12 मई 1949 को नाकाबंदी समाप्त करनी पड़ी. यह घटना शीत युद्ध (Cold War) की शुरुआत का प्रतीक बनी और पश्चिमी सहयोगी देशों की एकता और दृढ़ता को दर्शाती है.
1975 – इमरजेंसी से पहले विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी
25 जून 1975 को आधी रात के बाद पांचवें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद (Fakhruddin Ali Ahmed) द्वारा संविधान (Constitution) के अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत देश में आंतरिक अशांति का हवाला देकर आपातकाल (Emergency) घोषित किया गया था. लेकिन इसकी योजना पहले से ही बनाई जा चुकी थी. 24 जून 1975 की रात को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के निर्देश पर केंद्र सरकार ने विपक्षी नेताओं, खासकर जयप्रकाश नारायण (Jayaprakash Narayan), अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee), मोरारजी देसाई (Morarji Desai), लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) जैसे प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी की सूची तैयार कर ली थी. 25 जून की सुबह तक हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया. प्रेस की आज़ादी पर अंकुश, नागरिक अधिकारों का हनन और सेंसरशिप जैसी कड़ी कार्रवाइयों के कारण यह दौर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है.
2010 – टेनिस इतिहास का सबसे लंबा मैच
22 से 24 जून 2010 के बीच विंबलडन (Wimbledon) टेनिस (Tennis) टूर्नामेंट में इतिहास का सबसे लंबा टेनिस मैच (longest tennis match in history) खेला गया, जो अमेरिकी (USA) खिलाड़ी जॉन इस्नर (John Isner) और फ्रांसीसी (France) खिलाड़ी निकोलस माहू (Nicolas Mahut) के बीच हुआ. यह मुकाबला तीन दिनों तक चला और कुल 11 घंटे 5 मिनट तक खेला गया, जो अब तक का सबसे लंबा पेशेवर टेनिस मैच है. मैच का अंतिम स्कोर 6–4, 3–6, 6–7, 7–6, 70–68 रहा, जिसमें आखिरी सेट ही 8 घंटे 11 मिनट लंबा था. यह मुकाबला 24 जून को खत्म हुआ और उसी दिन जॉन इस्नर विजेता बने. इस अद्वितीय मैच ने टेनिस इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया और खिलाड़ियों की सहनशक्ति, प्रतिबद्धता और खेल भावना का प्रतीक बन गया.
24 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1863 — विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे, प्रसिद्ध भारतीय लेखक, इतिहासकार
1885 — तारा सिंह, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा कट्टर सिक्ख नेता
1897 — ओंकारनाथ ठाकुर, प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ एवं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक
1937 — जगन्नाथ मिश्रा, भारतीय राजनेता और बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री
1937 — अनीता देसाई, अंग्रेज़ी साहित्य की प्रख्यात लेखिका
24 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1564 — रानी दुर्गावती, भारतीय इतिहास की प्रसिद्ध वीरागंना रानियों में से एक
1950 — दरबान सिंह नेगी, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन चंद भारतीय सैनिकों में से एक थे, जिन्हें ब्रिटिश राज का सबसे बड़ा युद्ध पुरस्कार "विक्टोरिया क्रॉस" मिला था.
1881 — पंडित श्रद्धाराम शर्मा, 'ओम जय जगदीश हरे' आरती के रचयिता तथा हिन्दी, पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी.
24 जून को क्यों याद रखा जाए?
- इंटरनेशनल फेयरी डे (International Fairy Day): हर साल 24 जून को मनाया जाता है. यह दिन उन जादुई और कल्पनात्मक प्राणियों – फेयरीज़ (परियों) – के सम्मान में मनाया जाता है जो लोककथाओं, बच्चों की कहानियों और पौराणिक कथाओं में लंबे समय से मौजूद हैं. इस दिवस की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में लेखिका और कलाकार Jessica Galbreth ने की थी, जिन्होंने परियों की कला और कल्पना को सम्मान देने के उद्देश्य से इसे शुरू किया. इस दिन दुनियाभर में फेयरी थीम वाली पार्टियां, परियों की पोशाकों में कार्यक्रम, किताबों और फिल्मों के जरिए इन जादुई किरदारों को याद किया जाता है. यह दिवस न सिर्फ बच्चों बल्कि फैंटेसी प्रेमियों के बीच भी बहुत लोकप्रिय है, जो कल्पनाओं की दुनिया में खो जाने का मौका देता है.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि 24 जून 1901 को महान स्पेनिश चित्रकार पाब्लो पिकासो (Pablo Picasso) ने पेरिस की प्रसिद्ध गैलरी में अपनी पहली कला प्रदर्शनी (Pablo Picasso's first exhibition) लगाई थी. उस समय वह सिर्फ 19 वर्ष के थे. इस प्रदर्शनी में उनके करीब 75 चित्र प्रदर्शित किए गए थे, और यहीं से उनके प्रसिद्ध "ब्लू पीरियड" (The Blue Period of Picasso) की शुरुआत मानी जाती है. यह आयोजन पिकासो को अंतरराष्ट्रीय कला जगत में पहचान दिलाने वाला पहला बड़ा पड़ाव था.
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