26 जून: UN की स्थापना, हुमायूं की हार, LGBTQ विवाह मान्य
26 जून का इतिहास भारत और विश्व की निर्णायक घटनाओं से भरा है—शेर शाह की जीत, संयुक्त राष्ट्र की नींव, समलैंगिक विवाह को मान्यता, मेडागास्कर की आज़ादी और मानवाधिकारों से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय दिवस इस तारीख को खास बनाते हैं. जानिए इस दिन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं. पढ़िए आज का रोचक तथ्य.
हर तारीख अपने भीतर घटनाओं की कई परतें समेटे होती है. 26 जून (26 June Ka Itihas) भी इतिहास में कुछ निर्णायक, कुछ प्रेरक और कुछ चौंकाने वाली घटनाओं के लिए याद किया जाता है. यह दिन भारतीय राजनीति, वैश्विक कूटनीति और मानवाधिकारों के संघर्ष से जुड़ा रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 26 जून के दिन (26 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं कि इस तारीख ने इतिहास की किताबों में कौन-कौन से पन्ने जोड़े —
भारत और विश्व के इतिहास में 26 जून की प्रमुख घटनाएं
1483 — रिचर्ड III बने इंग्लैंड के राजा
26 जून 1483 को रिचर्ड III को इंग्लैंड का राजा (Richard III - King of England) घोषित किया गया, जब उन्होंने अपने भतीजे एडवर्ड V (Edward V) को सिंहासन से हटाकर कर खुद गद्दी संभाली. एडवर्ड V की नाबालिगता और राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर रिचर्ड ने खुद को वैध उत्तराधिकारी घोषित करवाया और हाउस ऑफ यॉर्क के अंतिम राजा बने. हालांकि उनकी की औपचारिक ताजपोशी (coronation) बाद में 6 जुलाई 1483 को हुई थी. यह ताजपोशी सत्ता संघर्ष, षड्यंत्र और 'टॉवर में बंद राजकुमारों' की रहस्यमयी गुमशुदगी जैसे विवादों से घिरी रही. रिचर्ड III का शासनकाल केवल दो साल चला, और वे 1485 में बोसवर्थ की लड़ाई में मारे गए, जिससे इंग्लैंड में ट्यूडर वंश की शुरुआत हुई. यह दिन अंग्रेजी राजशाही इतिहास का एक निर्णायक मोड़ माना जाता है.
1539 — चौसा का युद्ध — शेर शाह सूरी ने हुमायूं को हराया
26 जून 1539 को बिहार के बक्सर (Buxar) ज़िले के निकट चौसा नामक स्थान पर एक निर्णायक युद्ध हुआ जिसे 'चौसा का युद्ध' (Battle of Chausa) कहा जाता है. इस युद्ध में अफगान शासक शेर खान (बाद में शेर शाह सूरी) ने मुगल सम्राट हुमायूं को बुरी तरह हराया. हुमायूं की सेना को भारी नुकसान हुआ और वे जान बचाकर किसी तरह गंगा नदी पार करके भागे. इस विजय के बाद शेर खान ने खुद को "शेर शाह" की उपाधि दी और दिल्ली की सत्ता पर कब्ज़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया. यह युद्ध भारतीय इतिहास में मुगलों की पहली बड़ी पराजय और शेर शाह की रणनीतिक कुशलता का प्रतीक माना जाता है, जिसने आगे चलकर एक सशक्त सूरी साम्राज्य की नींव रखी.
1945 — संयुक्त राष्ट्र की नींव रखी गई
26 जून 1945 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) शहर में दुनिया के 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter signed) पर हस्ताक्षर किए, जिससे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की नींव रखी गई. यह सम्मेलन 25 अप्रैल 1945 से शुरू हुआ था और द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के अंत की ओर बढ़ते हुए, वैश्विक शांति, सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था. चार्टर पर हस्ताक्षर के बाद, 24 अक्टूबर 1945 को जब अधिकांश देशों ने इसकी पुष्टि कर दी, तब संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया. यह घटना आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक निर्णायक मोड़ थी, जिसने युद्धग्रस्त दुनिया को एक साझा मंच पर लाने की पहल की. इसी वजह से 24 अक्टूबर हर साल "संयुक्त राष्ट्र दिवस" (UN Day) के रूप में मनाया जाता है.
भारत — जो उस समय ब्रिटिश शासन के अधीन था — भी उन 50 देशों में शामिल था, जिन्होंने हस्ताक्षर किए. इस तरह भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य बना. यह भारत के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक इतिहास की एक अहम घटना थी, जिसने वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी की नींव रखी. बाद में, भारत की स्वतंत्रता (15 अगस्त 1947) (India’s independence) के बाद भी यह सदस्यता स्वतः जारी रही.
1960 — मेडागास्कर को मिली आज़ादी
26 जून 1960 को मेडागास्कर ने फ्रांस (France) से आज़ादी हासिल की और एक स्वतंत्र गणराज्य के रूप में दुनिया के नक्शे पर उभरा. यह दिन अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खिलाफ चल रहे स्वतंत्रता आंदोलनों की एक महत्वपूर्ण कड़ी था. मेडागास्कर 1896 से फ्रांसीसी उपनिवेश था, और वर्षों की राजनीतिक चेतना, आंदोलनों और राष्ट्रीय गर्व के बाद उसे स्वतंत्रता प्राप्त हुई. आज भी 26 जून को मेडागास्कर में राष्ट्रीय दिवस (Madagascar Independence Day) के रूप में बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया जाता है, जो वहां के लोगों के संघर्ष और आत्मनिर्णय की भावना का प्रतीक है.
2015 — समलैंगिक विवाह को मिली संवैधानिक मान्यता
26 जून 2015 को अमेरिका में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि समलैंगिक विवाह (same-sex marriage) संविधान के तहत वैध है और देश भर में इसे मान्यता दी जानी चाहिए. यह फैसला Obergefell v. Hodges नामक केस में आया, जिसमें अदालत ने 5-4 के बहुमत से निर्णय दिया कि विवाह का अधिकार समान रूप से सभी नागरिकों को प्राप्त है, चाहे वे किसी भी लिंग के क्यों न हों. इस फैसले ने अमेरिका के 50 राज्यों में समलैंगिक जोड़ों को विवाह की कानूनी अनुमति दी और LGBTQ+ अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ. यह दिन न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के मानवाधिकार आंदोलनों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया.
26 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1838 — बंकिम चंद्र चटर्जी, प्रख्यात उपन्यासकार, जिन्हें भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के लिए जाना जाता है
1873 — गौहर जान, भारतीय गायिका और नर्तकी
1888 — बाल गंधर्व, मराठी रंगमंच के महान नायक और प्रसिद्ध गायक
1918 — सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे, परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक
1931 — एस. मल्लिकार्जुनैय्या, भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ
1967 — तरुण सागर, जैन धर्म के भारतीय दिगम्बर पंथ के प्रसिद्ध मुनि
1969 — धर्मेन्द्र प्रधान, भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ
26 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1961 — गोविंद शास्त्री दुगवेकर, प्रसिद्ध साहित्यकार
2004 — यश जौहर, प्रख्यात भारतीय फ़िल्म निर्माता
26 जून को क्यों याद रखा जाए?
- नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1987 में यह तय किया कि हर साल 26 जून को "International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking" मनाया जाएगा. इसका उद्देश्य दुनिया भर में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और गैरकानूनी ड्रग तस्करी के खिलाफ लोगों को जागरूक करना और सरकारों को सशक्त कार्रवाई के लिए प्रेरित करना है. यह दिन विशेष रूप से युवाओं और समाज के कमजोर वर्गों को नशे के दुष्परिणामों से बचाने के लिए जागरूकता फैलाने का काम करता है. 26 जून की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन 1839 में चीन में अफीम व्यापार के खिलाफ संघर्ष की ऐतिहासिक शुरुआत हुई थी.
- अत्याचार के शिकार लोगों के समर्थन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस: संयुक्त राष्ट्र ने 1997 में घोषणा की कि हर साल 26 जून को "International Day in Support of Victims of Torture" के रूप में मनाया जाएगा. यह दिन उन लोगों को सम्मान देने और समर्थन देने के लिए समर्पित है, जिन्होंने यातना (torture), क्रूरता या अपमानजनक व्यवहार का सामना किया है. यह तारीख प्रतीकात्मक रूप से चुनी गई क्योंकि 26 जून 1987 को संयुक्त राष्ट्र का "Convention against Torture" आधिकारिक रूप से लागू हुआ था. यह दिवस मानवाधिकारों की रक्षा और अत्याचार के खिलाफ वैश्विक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि आज ही के दिन, 26 जून 1925 को चार्ली चैपलिन (Charlie Chaplin) की मशहूर साइलेंट फिल्म "द गोल्ड रश" (The Gold Rush) रिलीज़ हुई थी? यह फिल्म उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक मानी जाती है, जिसमें हास्य के साथ मानवीय संवेदनाएं भी गहराई से दिखती हैं. चैपलिन ने खुद कहा था कि वह चाहते हैं कि लोग उन्हें इसी फिल्म के लिए याद रखें.
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