ऑनलाइन हिन्दी भाषी लोगों की उम्मीद है ‘रफ्तार’

    By Harish Bisht
    July 02, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
    ऑनलाइन हिन्दी भाषी लोगों की उम्मीद है ‘रफ्तार’
    हिन्दी में ढूंढे मनपसंद गाने या फिल्मअंग्रेजी शब्दों के अर्थ बताता है ‘रफ्तार’‘रफ्तार’ सालों की मेहनत का नतीजा
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    अगर आप हॉलीवुड फिल्मों के शौकीन हैं तो आपको याद होगा जब हॉलीवुड एक्टर टॉम क्रूस कि फिल्म ‘मिशन इम्पॉसिबल 4 - घोस्ट प्रोटोकॉल’ आई थी तो उन्होंने एक ट्विट किया था “हम वास्तव में भारत में हमारे मित्रों के साथ बातचीत के लिए आगे देख रहे हैं जब घोस्ट प्रोटोकॉल जल्दी की बाहर आता है। अनिल कपूर चट्टानों एमआई-4” टॉम के इस ट्विट से उनके चाहने वालों के बीच एक कंफ्यूजन की स्थिति बन गई थी और ये ऐसा इसलिये हुआ था क्योंकि अंग्रेजी का अनुवाद हिन्दी में सही तरीके से नहीं हो पाया था। दरअसल टॉम ‘अनिल कपूर चट्टानों एमआई-4’ की जगह ‘अनिल कपूर रॉक्स इन एमआई-4’ लिखना चाहते थे लेकिन साफ्टवेयर की गलती से ऐसा नहीं हो पाया।

    पीयूष  वाजपेयी और डॉक्टर लावेश भंडारी

    पीयूष वाजपेयी और डॉक्टर लावेश भंडारी


    इस गलती को एक आदमी जानता था और वो भी साल 2005 से ऐसे गलतियों से निपटने की कोशिश कर रहा था। वो इंसान था रफ्तार डॉट इन के निर्देशक और सह-संस्थापक पीयूष वाजपेयी। जो इंटरनेट में हिन्दी का इस्तेमाल को सरल बनाने के लिए जूझ रहे थे। Raftaar.in हिन्दी का एक सर्च इंजन है जो हिन्दी जानने वालों की मदद के लिए तैयार किया गया था। ताकि हिन्दी बोलने वाले 300 मिलियन भारतीयों की मदद की जा सके। हिन्दी जानने वालों की मदद के लिये इस प्लेटफॉर्म को तैयार किया Raftaar.in की सहयोगी संस्था Indicus Analytics ने। जो एक रिसर्च फर्म है जिसके सह-संस्थापक हैं पीयूष और डॉक्टर लावेश भंडारी। इन लोगों का दावा है कि इस वेबसाइट को हर महिने 8.5 मिलियन लोग देखते हैं जबकि 2.5 लाख लोग इसके खास ग्राहक हैं।

    पीयूष के मुताबिक जब इंटरनेट की शुरूआत हुई थी तब उनके दिमाग में रफ्तार को अंग्रेजी वेबसाइट बनाने का विचार था। आज भी गूगल में जब कोई कुछ ढूंढता है तो वो सही शब्दों का चुनाव नहीं कर पाता इस कारण उसकी खोज अधूरी रहती है, लेकिन ये सब चीज धीरे धीरे समय के साथ आती हैं। रफ्तार की सामाग्री उसकी अपनी कंपनी की मालिकाना प्रौद्योगिकी है। इसलिए इसकी सामग्री को खास तौर से वर्गीकृत किया गया है। कोई भी खबर चाहिए हो तो टॉपिक डालकर वो मिल सकती है। इन लोगों की कोशिश है कि यहां पर कोई भी चीज विधिपूर्वक तरीके से रखी जाए। उदाहरण के लिए अगर किसी को गाने सुनने हों तो वो गायक, एल्बम के सेक्शन में जाकर ढूंढ सकता है।

    रफ्तार के सह-संस्थापकों को इसे बनाने का एक जुनून था क्योंकि वो भाषा को लेकर कुछ करना चाहते थे। पीयूष के मुताबिक वो खुद के डाटा से जुड़ा काम देखते थे जबकि लावेश अर्थशास्त्री थे जब इन लोगों ने अपने काम का विश्लेषण किया तो इन लोगों ने फैसला लिया कि क्यों ना हिन्दी भाषा में अर्थशास्त्र की 10वीं कक्षा की किताब तैयार की जाए। इस तरह जल्द ही इनको पता चल गया कि इंटरनेट में हिन्दी में इससे जुड़ी कोई सामग्री नहीं है। तब इन्होने फैसला लिया कि वो कुछ नया करेंगे और सात सालों की मेहनत के बाद ये लोग रफ्तार बनाने में सफल हुए।

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    रफ्तार के आने के बाद इसने कई काम किये जो पहली बार थे। पहली बार फॉनेटिक कीबोर्ड से परिचय रफ्तार ने कराया। ऑनलाइन हिंदीकोश इसने दिया, यूनिकोड और गैर-यूनिकोड के माध्यम से विभिन्न सामाग्रियों को ढूंढना इसने बताया, हिन्दी के लिए चरित्र आकृति विज्ञान परिचय भी रफ्तार ने कराया, देवनागरी भाषा से कोई भी गाना ढूंढने की ताकत भी रफ्तार ने ही दी। ये तो एक झलक है ऐसी कई और चीजें हैं जिनके लिए रफ्तार जाना जाता है। आज इस वेबसाइट में कई चीजों की तलाश पूरी की जा सकती है। जैसे न्यूज, ऐजुकेशन, शब्दकोश, एस्ट्रोलॉजी, गाने, फिल्में और ब्लॉग। रफ्तार हालांकि दो भाषाओं में है लेकिन हिन्दी को यहां प्रमुखता दी जाती है। इसको इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर छात्र, नौकरीपेशा और खुद का कारोबार करने वाले लोग हैं।

    इस वेबसाइट का इस्तेमाल करने के लिए उपयोगकर्ता करेक्टर या की-वर्ड डालकर अपनी खोज को सफल बना सकते हैं। अब ये लोग हिन्दी के अक्षर और मात्राओं पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा ये लोग शब्द के इनपुट पर भी काम कर रहे हैं ताकि कोई भी उपयोगकर्ता को अपनी मनचाही खोज जल्द से जल्द मिल जाए। रफ्तार के सह-संस्थापक मानते हैं कि हिन्दी भाषी लोग इंटरनेट को ज्यादा भरोसेमंद नहीं मानते और ना ही इस बात को लेकर उनको भरोसा होता है कि जो इंटरनेट में मिलेगा वो कितना सही होगा। बावजूद इसके इन लोगों को उम्मीद है कि इंटरनेट में हिन्दी भाषी लोगों की संख्या बढ़ेगी।

    रफ्तार में विज्ञापन ही आय का मुख्य जरिया है। इसलिए ये लोग आत्मनिर्भर हैं। हालांकि इन लोगों का सपना इस काम को और विस्तार देना है इसके लिए ये लोग अपनी पहुंच मोबाइल और टेबलेट जैसे प्लेटफॉर्म तक बनाना चाहते हैं तब इन लोगों को निवेश की जरूरत हो सकती है। रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए संस्थापकों के पास एक जिम्मेदार टीम है। जबकि ये लोग सलाहकार की भूमिका में रहते हैं। इसके अलावा Indicus Analytics से भी रफ्तार को मदद मिलती है।

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