Brands
YSTV
Discover
Events
Newsletter
More

Follow Us

twitterfacebookinstagramyoutube
Yourstory

Brands

Resources

Stories

General

In-Depth

Announcement

Reports

News

Funding

Startup Sectors

Women in tech

Sportstech

Agritech

E-Commerce

Education

Lifestyle

Entertainment

Art & Culture

Travel & Leisure

Curtain Raiser

Wine and Food

Videos

ys-analytics
ADVERTISEMENT
Advertise with us

छत्तीसगढ़, एमपी और बिहार के किसान बने मिसाल

छत्तीसगढ़, एमपी और बिहार के किसान बने मिसाल

Sunday September 30, 2018 , 5 min Read

धीरे-धीरे जैविक पद्धति से किसानी में अब कई कृषक मिसाल बनने लगे हैं। जैसे छत्तीसगढ़ के संजय अग्रवाल, मध्य प्रदेश की महिला किसान ललिता आदि। बिहार के तो एक गांव के सारे किसानों ने ही रासायनिक खाद का बहिष्कार कर दिया है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


सरकार सुविधा और संसाधन उपलब्ध कराए तो पूरा बिहार जैविक खेती में सबसे अग्रणी भूमिका निभा सकता है। केड़िया के किसानों ने 'जीवित माटी किसान समिति' बनाई है। इसके तहत खेती, पर्यावरण, स्वच्छता आदि विषयों पर उनमें आपसी विमर्श होता रहता है। 

देश में उन्नति कृषि ने क्रांतिकारी बदलाव की लहर सी पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में किसान जैविक खेती करने लगे हैं। राजगढ़ (छत्तीसगढ़) के गांव सरिया निवासी किसान संजय अग्रवाल इन दिनो अपने बारह एकड़ के फॉर्म हाउस में जैविक विधि से गोभी, टमाटर, बैंगन, भिंडी, मेथी, गाजर, प्याज, करेला, लौकी, जैसी सब्जियों के साथ ही धान, गेहूं, मक्का, अरहर, मूंग, सोयाबीन आदि की भी खेती कर रहे हैं। खास बात ये है कि उनकी पूरी किसानी जैविक पद्धति से हो रही है। उनका मानना है कि जैविक पद्धति से पर्यावरण को स्वच्छ रखते हुए भूमि, जल एवं वायु को प्रदूषित किये बिना दीर्घकालीन और स्थिर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

इस पद्धति में रसायनों का उपयोग कम से कम किया जाता है। यह पद्धति रसायनिक कृषि की अपेक्षा सस्ती, स्वावलम्बी एवं स्थाई है। इसमें मिट्टी को एक जीवित माध्यम माना गया है। भूमि का आहार जीवांश हैं। यह जीवांश उनके यहां गोबर, पौधों और जीवों के अवशेष आदि को खाद के रूप में भूमि को प्राप्त होता है। उसके प्रयोग से पौधों को समस्त पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही फसलों पर बीमारियों एवं कीटों का प्रकोप बहुत कम होता है। फसलों से प्राप्त खाद्यान्न एवं सब्जियां हानिकारक रसायनों से पूर्णतः मुक्त होती हैं। यही कारण है कि उनकी फसलों की मांग ज्यादा रहती है।

संजय कहते हैं कि वैसे भी अब किसान रसायनिक खेती छोड़ने लगे हैं। अब जैविक खेती में कमाई ज्यादा हो रही है। वह भी पहले रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते थे लेकिन अब उससे तौबा कर चुके हैं। जब उन्होंने कुछ साल पहले जैविक खेती की शुरुआत की, उत्पादन कम हुआ, बाद में अच्छा होता चला गया। उन्होंने अपने यहां छोटी-मोटी डेयरी का भी काम कर रखा है। उन पशुओं से भरपूर गोबर की जैविक खाद तैयार हो जाती है। इतना ही नहीं, वह अपने खेत में पैदा हो रही सब्जियां स्वयं जाकर बाजार में बेचते हैं। अब तमाम लोग उनके नियमित ग्राहक बन चुके हैं। यहां तक कि लोग अब उनके घर आकर सब्जियां ले जाने लगे हैं। उनकी सब्जियों की ओडिशा तक सप्लाई हो रही है। अब तो छत्तीसगढ़ ही नहीं, अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में किसान जैविक खेती करने लगे हैं। उनकी जमकर कमाई भी हो रही है। राजस्थान सरकार तो सबसे सफल जैविक खेती करने वाले किसानों को एक लाख रुपए तक का पुरस्कार भी देने का मन बना चुकी है।

इसी तरह के जमुई (बिहार) के गांव केड़िया के लोगों ने तो पूरी तरह रासायनिक खादों का बहिष्कार कर दिया है। जैविक कृषि में उनका गांव मिसाल बन चुका है। यहां के किसान राजकुमार यादव बताते हैं कि वर्ष 2014 से यहां के लोगों ने संकल्प ले रखा है कि रासायनिक खाद हटाना है, जैविक खेती को अपनाना है, लोगों को सेहतमंद बनाना है। सरकार सुविधा और संसाधन उपलब्ध कराए तो पूरा बिहार जैविक खेती में सबसे अग्रणी भूमिका निभा सकता है। केड़िया के किसानों ने 'जीवित माटी किसान समिति' बनाई है। इसके तहत खेती, पर्यावरण, स्वच्छता आदि विषयों पर उनमें आपसी विमर्श होता रहता है। गांव के किसान अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की जानकारियां एक दूसरे से साझा करते रहते हैं। दूसरे गांव से पहुंचने वाले लोगों को वे प्रशिक्षित भी करने लगे हैं। गांव के 45 किसान सिक्किम की किसी एजेंसी से प्रमाणित हैं। 70 से अधिक किसान जैविक खेती कर रहे हैं। शुरुआत 45 एकड़ से हुई। आज 250 एकड़ में जैविक खेती की जा रही है। इतना ही नहीं, यहां के किसानों ने गांव में बोरबेल का भी बहिष्कार कर दिया है। पुराने कुंए पक्के कराकर उन्ही के माध्यम से सिंचाई कर रहे हैं।

इसी तरह बड़वानी (म.प्र.) की एक महिला किसान हैं ललिता मुकाती वह अपने छत्तीस एकड़ खेत में जैविक विधि से चीकू, सीताफल, कपास आदि का रिकार्ड उत्पादन कर चुकी हैं। उन्हें देश की उन 114 महिला किसानों में शामिल किया है, जिन्होंने भारतीय कृषि में आश्चर्यजनक विकास किया है। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित करेंगे। एमएससी एग्रीकल्चर उनके पति ने उन्नत खेती की शुरुआत की थी। बाद में खेती का सारा काम ललिता ने खुद संभाल लिया। उनके पास करीब सौ एकड़ खेत है। खेती के कारण ही उन्होंने स्कूटर चलाना सीखा। अब तो ट्रैक्टर भी चलाती हैं। वह अपनी फसलों में वर्मी कम्पोस्ट, गौ मूत्र, छांछ, वेस्ट डी-कम्पोसर आदि का उपयोग करती हैं। अपने खेत में गोबर गैस प्लांट और सोलर पंप लगा लिया है। वह अपने पति के साथ जर्मनी और इटली जाकर आधुनिक खेती का प्रशिक्षण भी ले चुकी हैं। उनके खेतों में पैदा हो रहा सीताफल और चीकू महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली तक सप्लाई हो रहा है।

यह भी पढ़ें: मिलिए 77 वर्षीय वृद्ध प्रिंसिपल से जिसने स्कूल चलाने के लिए बेच दिया अपना घर