27 जून: महाराजा रणजीत सिंह का निधन, न्यूक्लियर युग की शुरुआत
27 जून का दिन इतिहास की कई बड़ी घटनाओं का साक्षी रहा है—महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु, पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, फ्रांसीसी क्रांति में बड़ा मोड़ और NASA की ऐतिहासिक उड़ान. जानिए आज के दिन जन्मीं महान हस्तियां और मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस. पढ़िए आज का रोचक तथ्य.
हर तारीख अपने साथ कई ऐतिहासिक कहानियां लेकर आती है, और 27 जून (27 June Ka Itihas) का दिन भी कुछ ऐसे ही घटनाक्रमों का गवाह रहा है, जिन्होंने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के इतिहास को आकार दिया. यह तारीख विज्ञान की बड़ी उपलब्धियों, राजनीति के अहम मोड़ों, और ऐतिहासिक शख्सियतों से जुड़ी यादगार घटनाओं के लिए जानी जाती है. चाहे बात हो दुनिया के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की शुरुआत की या फिर महाराजा रणजीत सिंह जैसे महान शासक के निधन की—27 जून ने इतिहास की किताब में कई अहम पन्ने जोड़े हैं.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 27 जून के दिन (27 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं कि इस तारीख ने इतिहास की किताबों में कौन-कौन से पन्ने जोड़े —
भारत और विश्व के इतिहास में 27 जून की प्रमुख घटनाएं
1709 — पोल्टावा की लड़ाई
27 जून 1709 को पोल्टावा की लड़ाई (Battle of Poltava) में रूस (Russia) के जार पीटर महान (Peter the Great) ने स्वीडन (Sweden) के राजा चार्ल्स द्वादश (Charles XII) की शक्तिशाली सेना को हरा दिया. यह युद्ध महान उत्तरी युद्ध (Great Northern War) का टर्निंग पॉइंट था, जो 1700 से 1721 तक चला. स्वीडन उस समय यूरोप की एक प्रमुख सैन्य शक्ति था, लेकिन इस हार के बाद उसकी ताकत तेजी से कमजोर होने लगी. वहीं, रूस इस जीत के बाद एक उभरती महाशक्ति के रूप में सामने आया और पीटर महान को आधुनिक रूस का निर्माता माना जाने लगा. यह युद्ध आज के यूक्रेन (Ukraine) के पोल्टावा क्षेत्र में लड़ा गया था और इसे यूरोपीय भू-राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है.
रूस में उस समय जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था, जिसके अनुसार यह युद्ध 27 जून 1709 को हुआ, जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर (आज का प्रचलित कैलेंडर) के अनुसार तिथि 8 जुलाई 1709 है. इसलिए दोनों तिथियां संदर्भ अनुसार सही मानी जाती हैं.
1789 — फ्रांसीसी क्रांति
27 जून 1789 को फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब राजा लुई सोलहवें (Louis XVI) ने पहली बार कुलीन वर्ग (Nobility) और पादरी वर्ग (Clergy) को आदेश दिया कि वे तीसरे एस्टेट (Third Estate) — यानी आम जनता के प्रतिनिधियों — के साथ नेशनल असेंबली में शामिल हों. इससे पहले तीसरे एस्टेट ने खुद को नेशनल असेंबली घोषित कर दिया था और 'टेनिस कोर्ट शपथ' (20 जून 1789) (Tennis Court Oath) के जरिए संविधान निर्माण की प्रतिबद्धता जताई थी. राजा की यह मजबूर स्वीकृति दर्शाती है कि शाही सत्ता पर जनआंदोलन का दबाव कितना बढ़ चुका था. यह निर्णय फ्रांसीसी क्रांति की दिशा में एक निर्णायक कदम था, जिसने फ्रांस में सामंती व्यवस्था के पतन और लोकतांत्रिक बदलाव की शुरुआत को और गति दी.
1839 — महाराजा रणजीत सिंह का निधन
27 जून 1839 को महाराजा रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh) का लाहौर (अब पाकिस्तान में) में निधन हुआ था. उन्हें 'शेर-ए-पंजाब' कहा जाता है और वे सिख साम्राज्य (1799–1839) (Sikh kingdom) के संस्थापक थे. रणजीत सिंह ने कमजोर पड़ चुके मुगल साम्राज्य (Mughal empire) और अफगान आक्रमणों के बीच एक संगठित और शक्तिशाली सिख राज्य की नींव रखी. उनके शासनकाल में पंजाब न सिर्फ सैन्य दृष्टि से मजबूत बना, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक सहिष्णुता का भी केंद्र रहा. उन्होंने स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) (Golden temple) को सोने से मढ़वाया और हिंदू, मुस्लिम तथा सिख सभी धर्मों के लोगों को प्रशासन में समान अवसर दिए. रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद सिख साम्राज्य धीरे-धीरे अंग्रेजों के अधीन होता चला गया.
1954 — दुनिया का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट चालू हुआ
27 जून 1954 को सोवियत संघ (अब रूस - Russia) के ओबनिंस्क शहर में दुनिया का पहला परमाणु ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र औपचारिक रूप से चालू किया गया. इसे Obninsk Nuclear Power Plant कहा जाता है. यह संयंत्र मॉस्को से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित था और इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 5 मेगावाट थी. यह पहली बार था जब परमाणु ऊर्जा का शांति के लिए — खासकर बिजली उत्पादन — में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया. यह ऐतिहासिक उपलब्धि मानव इतिहास में ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम था.
1982 — NASA के कोलंबिया शटल की अंतिम टेस्ट उड़ान: STS-4
27 जून 1982 को नासा (NASA) ने अपने अंतरिक्ष यान कोलंबिया (Columbia) को STS-4 मिशन (STS-4 mission) के तहत अंतरिक्ष में लॉन्च किया. यह अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम की चौथी और अंतिम परीक्षण उड़ान थी. यह मिशन फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से लॉन्च किया गया और इसमें दो अंतरिक्ष यात्री — कमांडर थॉमस मैटिंगली (Thomas K. Mattingly) और पायलट हेनरी हार्ट्सफील्ड (Henry W. Hartsfield, Jr.) शामिल थे. इस मिशन का उद्देश्य स्पेस शटल की सभी प्रमुख प्रणालियों की अंतिम जांच करना था ताकि भविष्य में इसे नियमित अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रयोग किया जा सके. यह मिशन 7 जुलाई 1982 को सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आया. STS-4 की सफलता के साथ ही स्पेस शटल "Columbia" को पूरी तरह से ऑपरेशनल घोषित कर दिया गया और नासा के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक नया युग शुरू किया.
27 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1922 — पी. वी. अकिलंदम, तमिल भाषा के विख्यात साहित्यकार
1939 — राहुल देव बर्मन, हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार
1964 — पी. टी. उषा, भारतीय खिलाड़ी
27 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1839 — महाराजा रणजीत सिंह, सिख साम्राज्य के संस्थापक
2008 — सैम मानेकशॉ, 1971 के भारत-पाक युद्ध के नायक, भारतीय सेनाध्यक्ष और पहले फील्ड मार्शल
27 जून को क्यों याद रखा जाए?
- अंतरराष्ट्रीय बधिर-दृष्टिबाधितता दिवस (International Day of Deafblindness): हर साल 27 जून को मनाया जाता है, जो प्रसिद्ध अमेरिकी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हेलन केलर (Helen Keller) की जन्मतिथि है — 27 जून 1880. यह दिन दुनिया भर में उन लोगों के अधिकारों और जरूरतों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है जो सुनने और देखने दोनों में अक्षम हैं. हेलन केलर, जो खुद भी बधिर-दृष्टिबाधित थीं, इस समुदाय की प्रेरणा बन गईं और उन्होंने दिखाया कि कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा, स्वतंत्रता और सामाजिक योगदान संभव है. यह दिवस खास तौर पर समाज, सरकारों और संगठनों को समावेशी नीतियाँ बनाने और इस समुदाय के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की प्रेरणा देता है. कई देशों में इसे हेलन केलर डे (Helen Keller Day) के रूप में भी मनाया जाता है, जो जागरूकता और सहानुभूति का प्रतीक है.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं (Did you know) कि आज ही के दिन 27 जून 1967 को दुनिया का पहला ऑपरेटिंग एटीएम (ATM - Automated Teller Machine) ब्रिटेन के लंदन के एनफील्ड (Enfield) इलाके में शुरू किया गया था. इसे Barclays Bank ने लगाया था, और सबसे पहले इसका इस्तेमाल मशहूर ब्रिटिश टीवी स्टार रेग वर्नी (Reg Varney) ने किया था. इस मशीन को विकसित करने का श्रेय स्कॉटिश इंजीनियर John Shepherd-Barron को दिया जाता है. यह एटीएम उस समय केवल नकद निकालने की सुविधा देता था और इसका इस्तेमाल करने के लिए कागज़ के वाउचर की जरूरत होती थी. यह घटना बैंकिंग टेक्नोलॉजी के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम थी, जिसने आज के डिजिटल बैंकिंग युग की नींव रखी.
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