27 मई: वो दिन जब भारत ने अपना पहला प्रधानमंत्री खोया
27 मई का इतिहास जानिए! आज के दिन हुईं दुनिया बदलने वाली घटनाएं – नेहरू का निधन, गोल्डन गेट ब्रिज का उद्घाटन, बिस्मार्क युद्धपोत डूबा, सोलज़ेनित्सिन की वापसी और भी बहुत कुछ! पढ़ें पूरी ऐतिहासिक झलकियां और जानें 27 मई क्यों है खास!
इतिहास के पन्नों में 27 मई (27 May Ka Itihas) की तारीख कई महत्वपूर्ण घटनाओं की गवाह रही है. यह दिन भारतीय राजनीति के एक युग का अंत भी है और विश्व इतिहास में कई क्रांतिकारी बदलावों का प्रतीक भी.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 27 मई के दिन (27 May History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानें 27 मई को घटी कुछ प्रमुख घटनाएं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी.
भारत और विश्व के इतिहास में 27 मई की प्रमुख घटनाएं
1660 – कोपेनहेगन संधि पर हस्ताक्षर
27 मई 1660 को स्वीडन और डेनमार्क-नॉर्वे के बीच कोपेनहेगन संधि (Treaty of Copenhagen) पर हस्ताक्षर किए गए. यह संधि दोनों शक्तियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे युद्धों का अंत थी. इस संधि ने डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन की आधुनिक सीमाओं को स्थापित करने में मदद की और क्षेत्र में वर्षों के संघर्ष के बाद स्थिरता लाई. यह संधि द्वितीय उत्तरी युद्ध (1655–1660) के बाद हुई, जो मुख्यतः स्वीडन और डेनमार्क-नॉर्वे, पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल और ब्रांडेनबर्ग-प्रशिया के गठबंधन के बीच लड़ा गया था.
1937 – गोल्डन गेट ब्रिज आम जनता के लिए खुला
27 मई 1937 को गोल्डन गेट ब्रिज (Golden Gate Bridge) को पैदल यात्रियों के लिए पहली बार खोला गया था. इस दिन को “पैदल दिवस” (Pedestrian Day) कहा गया, और लगभग 2 लाख से अधिक लोगों ने पुल पर चलकर इसका उद्घाटन मनाया. इसके बाद, 28 मई 1937 को इसे वाहनों की आवाजाही के लिए आधिकारिक रूप से खोल दिया गया. यह पुल संयुक्त राज्य अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर को मारिन काउंटी से जोड़ता है. गोल्डन गेट ब्रिज की कुल लंबाई लगभग 2.7 किलोमीटर है. जब यह बना, तब यह दुनिया का सबसे लंबा सस्पेंशन ब्रिज था. इसका निर्माण 1933 में शुरू हुआ और 4 साल बाद 1937 में पूरा हुआ. इसे जोसेफ स्ट्रॉस (Joseph Strauss) ने डिज़ाइन किया था.
1941 – ब्रिटिश रॉयल नेवी ने जर्मन युद्धपोत ‘बिस्मार्क’ को डुबोया
27 मई 1941 में ब्रिटिश रॉयल नेवी ने जर्मन युद्धपोत ‘बिस्मार्क’ (Bismarck) को फ्रांस के पास अटलांटिक महासागर में डुबो दिया. यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के समुद्री इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है. बिस्मार्क को डुबोने से लगभग 2,000 जर्मन सैनिकों की मौत हुई. यह घटना तीन दिन बाद हुई जब बिस्मार्क ने ब्रिटेन के युद्धपोत HMS Hood को डुबो दिया था, जिसमें 1,400 से अधिक ब्रिटिश नौसैनिकों की जान चली गई थी. बिस्मार्क, नाज़ी जर्मनी का सबसे शक्तिशाली और आधुनिक युद्धपोत था, जिसे 1940 में नौसेना में शामिल किया गया था.
1964 – पंडित जवाहरलाल नेहरू का निधन
27 मई 1964 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (PM Pt. Jawaharlal Nehru) का निधन हुआ था. वे आधुनिक भारत के निर्माता माने जाते हैं. स्वतंत्र भारत की आधारशिला रखने वाले नेहरू ने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के सिद्धांतों को मजबूत किया. उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी. नेहरू के नेतृत्व में भारत ने ‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ की नींव रखी, जिसने शीत युद्ध के दौरान भारत को एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया. उनका 'पंचशील सिद्धांत' आज भी भारत की विदेश नीति में मूलभूत भूमिका निभाता है.
1994 – अलेक्सांदर सोलज़ेनित्सिन की 20 साल बाद वतन वापसी
27 मई 1994 को रूस के नोबेल पुरस्कार विजेता उपन्यासकार अलेक्सांदर सोलज़ेनित्सिन (Aleksandr Solzhenitsyn) की अमेरिका में 20 साल तक निर्वासन में रहने के बाद वतन वापसी हुई थी. सोवियत संघ के शासक जोसेफ़ स्टालिन ने सोलज़ेनित्सिन की नागरिकता 1974 में रद्द कर दी थी. इसके बाद उन्हें सोवियत संघ से बाहर निकाल दिया गया था. स्टालिन सोलज़ेनित्सिन से उनके सत्ता विरोधी लेखन के कारण बेहद नाराज़ थे. सोलज़ेनित्सिन को सोवियत संघ में प्रचलित गुलाग प्रथा के बारे में उनके लेखन को लेकर ख्याति मिली थी. सोलज़ेनित्सिन की नागरिकता को 1990 में सोवियत संघ के अंतिम सर्वोच्च नेता मिखाईल गोर्बाचेव ने बहाल किया.
27 मई को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति
1894 – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, ख्यातिप्राप्त आलोचक तथा निबन्धकार
1957 – नितिन गडकरी, 'भारतीय जनता पार्टी' के वरिष्ठ राजनेता
1962 – रवि शास्त्री, प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी एवं कमेंटेटर
1985 – चिराग जैन, जानेमाने कवि, पत्रकार तथा लेखक
27 मई को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1919 – कंदुकूरी वीरेशलिंगम, तेलुगु भाषा के प्रसिद्ध विद्वान, जिन्हें आधुनिक तेलुगु साहित्य में 'गद्य ब्रह्मा' के नाम से ख्याति मिली
1935 – रमाबाई आम्बेडकर, डॉ. भीमराव आम्बेडकर की पत्नी
1964 – जवाहरलाल नेहरू, स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री
1983 – सरदार हुकम सिंह, भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष
1986 – अजय कुमार मुखर्जी, पश्चिम बंगाल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री
2016 – हंगपन दादा, 'अशोक चक्र' से सम्मानित भारतीय सेना के जांबाज सैनिक




