28 मई: वीर सावरकर का जन्म और दो बंदरों की अंतरिक्ष यात्रा
28 मई का इतिहास बेहद खास है. इस दिन वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारी का जन्म हुआ और दो बंदरों ने पहली सफल अंतरिक्ष यात्रा कर मानव उड़ान की नींव रखी. साथ ही कई अहम वैश्विक घटनाएं भी घटीं. जानिए इस तारीख से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं और तथ्य.
इतिहास में कुछ दिन ऐसे होते हैं जो हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं — 28 मई (28 May Ka Itihas) उन्हीं में से एक है. विश्व राजनीति से लेकर विज्ञान, साहित्य और भारत की आज़ादी की लड़ाई तक, इस तारीख ने कई अहम मोड़ देखे हैं.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 28 मई के दिन (28 May History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए एक नजर डालते हैं 28 मई को घटित कुछ प्रमुख घटनाओं पर जो इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं.
भारत और विश्व के इतिहास में 28 मई की प्रमुख घटनाएं
1830 – अमेरिका में 'इंडियन रिमूवल एक्ट' पारित
28 मई 1830 को अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रू जैक्सन (Andrew Jackson) ने ‘इंडियन रिमूवल एक्ट’ (Indian Removal Act) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत हजारों मूल अमेरिकी आदिवासियों को जबरन उनके पैतृक घरों से हटाया गया. इसका उद्देश्य अमेरिकी मूल-निवासी (Native American) जनजातियों को अमेरिका के दक्षिणी राज्यों (जैसे जॉर्जिया, अलबामा, मिसिसिपी, और टेनेसी) से जबरन हटाकर मिसीसिपी नदी के पश्चिम की ओर स्थानांतरित करना था. उन्हें सैकड़ों मील दूर, आज के ओकलाहोमा राज्य की ओर पैदल यात्रा करनी पड़ी, जिसे Trail of Tears (आंसुओं का मार्ग) कहा जाता है. इस दौरान भुखमरी, बीमारी और ठंड के कारण लगभग 4,000 से अधिक चेरोकी लोगों की मृत्यु हुई. यह निर्णय आज भी अमेरिकी इतिहास में एक विवादास्पद मोड़ माना जाता है.
1883 – वीर सावरकर का जन्म
28 मई 1883 को महाराष्ट्र के भगूर गांव में विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar - Veer Savarkar) का जन्म हुआ. वे स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और क्रांतिकारी थे. उन्हें “स्वातंत्र्यवीर” और “वीर सावरकर” के नाम से भी जाना जाता है. उनकी प्रसिद्ध किताब थी: “The First War of Indian Independence 1857”, जिसमें 1857 की क्रांति को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा. इस किताब को ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था. 1911 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें काला पानी की सजा देकर सेलुलर जेल, पोर्ट ब्लेयर (अंडमान निकोबार) भेजा. वहां उन्होंने 11 साल तक कठोर कारावास झेला. उन्होंने “Hindutva: Who is a Hindu?” नामक किताब में हिंदुत्व की राजनीतिक परिभाषा दी. स्वतंत्रता के बाद भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे.
1959 – बंदरों की पहली सफल अंतरिक्ष यात्रा
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और सैन्य अनुसंधान एजेंसियों ने मिलकर एक विशेष मिशन – Jupiter AM-18 – के तहत दो बंदरों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बनाई. इस मिशन के तहत 28 मई 1959 को – Able और Baker – नाम के दो बंदरों को अंतरिक्ष में भेजा गया और वे सफलतापूर्वक जीवित लौटे. Able एक ‘रिसस मकाक’ प्रजाति का बंदर था जबकि Baker एक ‘स्क्विरल मंकी’ (गिलहरी प्रजाति) की मादा बंदर थी. इस उड़ान ने 16090 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार को छूआ और सौलह मिनट के इस मिशन में ये बंदर करीब नौ मिनट तक गुरुत्वाकर्षण से मुक्त अंतरिक्ष में रहे. इस पूरी यात्रा के दौरान वैज्ञानिकों ने बंदरों के शरीर में आने वाले हर बदलाव पर पैनी नज़र रखी. फ्लोरिडा राज्य से अंतरिक्ष में भेजा गया ये यान दक्षिण अटलांटिक के नज़दीक मिला. इस मिशन ने मानव अंतरिक्ष यात्रा की नींव रखी. उड़ान के कुछ ही दिनों बाद, Able की एक सर्जरी के दौरान मृत्यु हो गई. Baker लंबी उम्र तक जीवित रही और अमेरिका में उसे “space heroine” का दर्जा मिला.
1967 – ब्रिटेन के नाविक की दुनिया का अकेले चक्कर लगा कर घर वापसी
28 मई 1967 को ब्रिटेन के नाविक सर फ्रांसिस चिचेस्टर (Sir Francis Chichester) ने अकेले अपनी नौका में दुनिया का चक्कर लगाकर इंग्लैंड वापसी की. यह समुद्री इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है. उनकी नाव का नाम Gipsy Moth IV था. उन्होंने 27 अगस्त 1966 को प्लायमाउथ, इंग्लैंड से अपने सफ़र का आग़ाज़ किया था. 9 महीने और 1 दिन (226 दिन) बाद 28 मई 1967 को वे प्लायमाउथ, इंग्लैंड पहुंचे. उन्होंने लगभग 29,630 समुद्री मील (लगभग 54,900 किमी) का सफ़र तय किया. वे पहले व्यक्ति बने जिन्होंने केवल एक बार रास्ते में रुके बिना (केवल एक स्टॉप) अकेले विश्व का चक्कर एक आधुनिक नौका में लगाया. उन्होंने केवल सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में एक बार रुककर नौका की मरम्मत और आराम किया. इंग्लैंड वापसी पर उन्हें नाइटहुड (Sir की उपाधि) दी गई और ब्रिटेन में उन्हें राष्ट्रीय नायक का दर्जा मिला.
1998 – पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया
भारत द्वारा पोखरण-2 के कुछ ही दिनों बाद, 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के चगाई क्षेत्र में पांच परमाणु परीक्षण कर वैश्विक राजनीति में सनसनी फैला दी. इसे 'चगाई-1' के नाम से जाना जाता है और इसने दक्षिण एशिया को औपचारिक रूप से परमाणु शक्ति क्षेत्र बना दिया. पाकिस्तान आधिकारिक रूप से दुनिया की सातवीं परमाणु शक्ति बना. इसके बाद अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ आदि ने पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए.
28 मई को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति
1883 – वीर सावरकर, स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और क्रांतिकारी
1908 – इयान फ्लेमिंग, ब्रिटिश लेखक जिन्हें जासूसी उपन्यास 'जेम्स बॉन्ड' के लिए जाना जाता है
1921 – डी. वी. पलुस्कर, प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक
1921 – महन्त अवैद्यनाथ, भारतीय राजनीतिज्ञ तथा गोरखनाथ मठ के भूतपूर्व पीठाधीश्वर
1923 – एन. टी. रामाराव, प्रसिद्ध अभिनेता एवं तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक
1968 – काइली मिनॉग, ऑस्ट्रेलियाई पॉप गायिका
1974 – मिस्बाह-उल-हक, पाकिस्तानी क्रिकेटर
28 मई को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1954 – विजय सिंह पथिक, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी
1964 – महबूब ख़ान, भारतीय सिनेमा इतिहास के अग्रणी निर्माता-निर्देशक
2005 – गोपाल प्रसाद व्यास, भारत के प्रसिद्ध कवि, लेखक और साहित्यकार
28 मई को क्यों याद रखा जाए?
28 मई 1959 को अमेरिका ने दो बंदरों को अंतरिक्ष में भेजा और वे सकुशल पृथ्वी पर लौट आए. यह पहली बार था जब उन्नत जीव (advanced living organisms) को अंतरिक्ष की ऊंचाई तक ले जाकर सकुशल वापस लाया गया. इससे पहले कई प्रयोगों में प्राणी मारे गए थे या उनका डेटा अधूरा रह गया था. Able और Baker (दोनों बंदरों के नाम) की सफलता ने साबित कर दिया कि सजीव प्राणी अंतरिक्ष यात्रा कर सकते हैं और पृथ्वी पर लौट सकते हैं. इस मिशन ने मानव अंतरिक्ष यात्रा की नींव रखी. वैज्ञानिकों को यह आत्मविश्वास मिला कि इंसान भी एक दिन अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छू सकता है. यही तकनीकी और वैज्ञानिक आत्मविश्वास आगे चलकर यूरी गागरिन (1961) और नील आर्मस्ट्रॉन्ग (1969) जैसे अंतरिक्ष यात्रियों की उड़ानों का आधार बना.
28 मई 1959 केवल दो बंदरों की उड़ान नहीं थी, बल्कि यह मानवता के लिए एक बड़ी छलांग थी. यह दिन आज भी अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में पहली सफल प्राणी अंतरिक्ष यात्रा के रूप में याद किया जाता है.




