ये नन्हे-नन्हे लेखक अयान, निकिता और ईशान

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ये दास्तान है भारत के तीन नन्हे लेखकों की। ये हैं असम के 5 वर्षीय अयान, हिमाचल की 15 वर्षीय निकिता, कानपुर के 16 वर्षीय ईशान। अयान का कहानी-संग्रह ‘हनीकॉम्ब', निकिता का उपन्यास ‘वी आर इम्परफैक्टली परफैक्ट’, ईशान की पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम पर लिखी किताब ‘द टीचर आई नेवर मेट’ चर्चाओं में हैं।

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कानपुर के आईआईटी कैम्पस में केन्द्रीय विद्यालय के सोलह वर्षीय छात्र ईशान शर्मा ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी लिखी है- ‘द टीचर आई नेवर मेट’। 

असम के अयान गोगोई गोहैन, हिमाचल की निकिता गुप्ता और कानपुर के ईशान शर्मा मासूम वय में ही कलम के जादूगर बन गए हैं। असम के उत्तरी लखीमपुर जिले के अयान गोगोई गोहैन ने तो एक साल की ही उम्र में चित्रकारी शुरू कर दी थी और तीन वर्ष की उम्र में कहानी लिख डाली। इस समय अयान की उम्र पांच वर्ष है। कहते हैं कि अयान को जब भी मम्मी-पापा अक्षर ज्ञान के लिए किताबें पढ़ने को कहते, तो वह अपनी लिखी किताब पढ़ने की बातें करने लगता। अयान रोज अपनी दिनचर्या के एक सुंदर अनुभव को रिकॉर्ड कर अपने दादाजी को वाट्सएप पर भेजा करते और उन अनुभवों को किताब में ढालने का आग्रह करते। कुछ दिनों में ही उन्होंने गूगल पर एक ऐसा एप ढूंढ़ लिया, जो स्पीच को वर्ड में कन्वर्ट करता है। इसके बाद अयान अपने रोज के अनुभवों को रिकॉर्ड कर शब्दों में बदलने लगे।

अयान अपने दादा पूर्ण कांत गोगोई के साथ रहते हैं। उनके माता पिता मिजोरम में रहते हैं। वह प्रतिदिन अपने चारों तरफ दिखने वाली चीजों को शब्दों में ढालते हैं। वह कोई भी विषय हो सकता है। मसलन, दादाजी से बातचीत या कोई ऐसी बात जिसे उन्होंने अभी-अभी सीखा-जाना हो। अयान दादा को अपना सबसे अच्छा दोस्त और हीरो मानते हैं। दादा उनको रोजना कुछ-न-कुछ नया लिखने, चित्र बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। वह उन्हे कहानियां सुनाने वाले रॉक स्टार हैं।

14 अगस्त 2013 को जन्मे अयान उत्तरी असम के जिला लखीमपुर के सेंट मेरी स्कूल में पढ़ते है। ‘हनीकॉम्ब' में उनकी 30 छोटी-छोटी कहानियों और उसके बनाए चित्र प्रस्तुत किए गए हैं। पुस्तक की कीमत 250 रुपये है। अयान अब संभवत: भारत के सबसे कम उम्र के लेखक बन गए हैं। अयान ने अपनी स्टोरी के हिसाब से चित्र भी बनाए हैं, जिन्हें उनकी किताब में शामिल किया गया है। अयान कहते हैं, ‘मैं आगे भी किताब लिखना चाहता हूं। इसके लिए मैं सामग्री इकट्ठा कर रहा हूं।’ अयान का नाम ‘हनीकॉम्ब' के लिए ‘भारत का सबसे कम उम्र का लेखक' के रूप में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। यह एजेंसी देश में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वालों के नाम रिकॉर्ड करती है।

कवि-लेखक दिलीप महापात्र ने ‘हनीकॉम्ब' की समीक्षा की है। अयान की मां संगीता बताती हैं कि जब अयान के 30 रिकॉर्डेड स्पीच शब्दों में कन्वर्ट हो गए, तो उन्होंने दो-तीन प्रकाशकों से संपर्क किया। ऑथर्स प्रेस पब्लिकेशन ने सबसे पहले अयान के अनुभवों में व्याकरण की गलतियों को ठीक किया और फिर ‘हनीकॉम्ब’ नाम से अयान की पहली पुस्तक प्रकाशित हुई। पिता गोगोई कहते हैं कि अयान मेरी अद्भुत संतान है। मुझे याद है एक बार उसने इंद्रधनुष देखा और उसने कविता के रूप में उसे उतार दिया। उसने अपनी कविता में सात रंगों की तुलना संगीत के सात सुरों की। ‘हनीकॉम्ब' का कवर पेज स्वयं अयान ने डिजाइन किया है। अयान को योग करने, कार्टून देखने, बैडमिंटन-फुटबाल खेलने और बागवानी का भी शौक है।

पंद्रह वर्ष की हैं सोलन (हिमाचल प्रदेश) की निकिता गुप्ता यहां के एमआरए डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। सोलन निवासी पिता विनय गुप्ता और मां रुचि गुप्ता की संतान निकिता हिमाचल की सबसे कम उम्र की लेखिका नामित हो चुकी हैं। निकिता को नौंवी कक्षा से ही लिखने-पढ़ने का शौक रहा है। निकिता अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ ही शिक्षकों को भी देती हैं। हिमाचल की सिंचाई व जन स्वास्थ्य मंत्री सुश्री विद्या स्टोक्स, वन मंत्री ठाकुर सिंह भामोरी, सोलन के कलेक्टर और एसपी ने भी विश्व स्तर पर सोलन का नाम रोशन करने के लिए निकिता को सराहा और सम्मानित किया है। हाल ही में उनको 'स्टेट अवार्ड' से नवाजा गया है। निकिता का एक और नया उपन्यास आने वाला है। वह कई गैर सरकारी संगठनों के साथ सक्रिय हैं। एक दिन जब निकिता ने अपने विचार प्रसारित करने के लिए एक डिजिटल मंच वॉटपेड को चुना तो दुनिया भर में उनकी खूब प्रशंसा हुई। लगभग 2.5 लाख पाठकों का एक बड़ा वर्ग उनसे जुड़ गया।

इसके बाद उनका उपन्यास ‘वी आर इम्परफैक्टली परफैक्ट’ टॉप-10 में शुमार हो गया। वॉटपेड पर पाठकों की सर्वाधिक पसंदीदा होने के नाते निकिता को पुरस्कृत भी किया जा चुका है। उनका उपन्यास ‘वी आर इम्परफैक्टली परफैक्ट’ एक प्रेम कथा है, जिसमें बचपन के दो मित्रों के नौ साल बाद मिलन और उनके अंदर आये तमाम परिवर्तनों को महसूस करने की कहानी है। उनका प्रेम कैसे एक-दूसरे में खामियां होने के बावजूद उन पर काबू पाता है, इस प्रसंग को भी उपन्यास में बहुत खूबसूरती से लिखा गया है। निकिता को अपने कविता संग्रह ‘सलाद डेज, अ साउंटर’ के लिए चेन्नई के 'पोएट्री वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन' से भी सराहना मिली है। इसे 160 अंतर्राष्ट्रीय एवं 12 भारतीय पुस्तकालयों के बीच से ली गयी 25 प्रविष्टियों में शामिल किया जा चुका है।

कानपुर के आईआईटी कैम्पस में केन्द्रीय विद्यालय के सोलह वर्षीय छात्र ईशान शर्मा ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी लिखी है- ‘द टीचर आई नेवर मेट’। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केरल के राज्यपाल पी सदाशिवम, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन बोहरा, झारखंड की राज्यपाल द्रqपदी मुर्मू, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिंदबरम, अमेरिकी प्रोफेसर सीआर राव और हरित क्रांति के जनक प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन ईशान की तारीफ करते हुए बधाई दे चुके हैं। पत्रकार रजत शर्मा ने उनको 'वंडर ब्यॉय' से सम्मानित किया है। ईशान कहते हैं कि उन्होंने यह किताब पैसा अथवा प्रचार के लिए नहीं लिखी है। जब वह ग्यारह साल के थे, उन्होंने राष्ट्रपति कलाम को पढ़ना शुरू किया तो इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने फैसला किया, क्यों न वह स्वयं अलग तरीके से कलाम की जीवनी लिखें।

वह चाहते हैं कि कलाम के जीवन से जुड़ी जानकारियां अधिकाधिक लोगों के साथ साझा की जाएं। लोगों को पता चले कि किस तरह एक गाँव में रहने वाला बालक कलाम देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचा। कलाम की आत्मकथात्मक पुस्तक लिखने के लिए ईशान ने पांच वर्षों तक सामग्री जुटाई। ईशान अपने स्कूल के होनहार छात्रों में शुमार हैं। वह प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते, जीतते रहते हैं। वह कहते हैं कि लिखने के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक बात पहुंचाई जा सकती है। देश के युवा कलाम साहब पर भरोसा करते हैं। जिंदगी भर देशवासियों की सेवा करते रहे कलाम का जीवन ही अपने आप में एक अनुकरणीय सन्देश है।

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