4 जून: महिलाओं को मिला वोट का हक और थियानमेन की त्रासदी
4 जून का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए जाना जाता है, जैसे अमेरिका में महिलाओं को मतदान का अधिकार मिलना, थियानमेन चौक नरसंहार, भारत में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना और नेपाल में राजा ज्ञानेंद्र की ताजपोशी. यह दिन बच्चों के अधिकारों के लिए भी समर्पित है.
4 जून का दिन इतिहास (4 June Ka Itihas) के पन्नों में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है. यह दिन राजनीतिक बदलावों, युद्धों, आंदोलनों और ऐतिहासिक उपलब्धियों से जुड़ा रहा है.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 4 जून के दिन (4 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं आज के दिन से जुड़ी कुछ प्रमुख घटनाएं जो भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष महत्व रखती हैं.
भारत और विश्व के इतिहास में 4 जून की प्रमुख घटनाएं
1919 — अमेरिका में महिलाओं को मिला मतदान का अधिकार
4 जून 1919 को अमेरिकी कांग्रेस ने 19वें संशोधन (19th Amendment) को पारित किया, जिसमें महिलाओं को मतदान का संवैधानिक अधिकार (Women's Right to Vote) देने का प्रावधान किया गया. यह संशोधन महिलाओं के लंबे संघर्ष और मताधिकार आंदोलन का परिणाम था, जिसका नेतृत्व सुसान बी. एंथनी (Susan B. Anthony) और एलिजाबेथ कैडी स्टैंटन (Elizabeth Cady Stanton) जैसी महिलाओं ने किया था. हालांकि यह संशोधन 4 जून को पारित हुआ, लेकिन इसे 36 राज्यों की पुष्टि के बाद 18 अगस्त 1920 को आधिकारिक रूप से संविधान में शामिल किया गया, जिससे अमेरिकी महिलाओं को पूरे देश में मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ.
1942 — अमेरिका और जापान के बीच शुरू हुई ‘मिडवे की लड़ाई’
4 जून 1942 को द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान प्रशांत महासागर में मिडवे द्वीप के पास अमेरिका और जापान के बीच ‘मिडवे की लड़ाई’ (Battle of Midway) शुरू हुई. यह चार दिन (4–7 जून) तक चली समुद्री और हवाई लड़ाई थी, जिसे युद्ध का निर्णायक मोड़ माना जाता है. इस युद्ध में अमेरिकी नौसेना, जो संख्यात्मक रूप से जापानी बेड़े से कमजोर थी, ने रणनीतिक कौशल और कोड तोड़ने की तकनीक के जरिए जापान के चार प्रमुख विमानवाहक पोत (Akagi, Kaga, Soryu और Hiryu) नष्ट कर दिए, जबकि अमेरिका ने अपना एकमात्र विमानवाहक पोत USS Yorktown खोया. इस जीत ने जापानी नौसेना के आक्रमण को पहली बार रोका और प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन अमेरिका के पक्ष में बदल दिया.
1959 — सी. राजगोपालाचारी ने ‘स्वतंत्र पार्टी’ की स्थापना की घोषणा
4 जून 1959 को भारत के पहले गवर्नर-जनरल और प्रख्यात राजनेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (सी. राजगोपालाचारी) (C. Rajagopalachari) ने कांग्रेस की समाजवादी नीतियों और केंद्रीकरण के विरोध में एक नए राजनीतिक दल ‘स्वतंत्र पार्टी’ (Swatantra Party) की स्थापना की घोषणा की. यह पार्टी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था, और न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप की वकालत करती थी. स्वतंत्र पार्टी 1960 के दशक में एक प्रभावशाली विपक्षी शक्ति बनकर उभरी और 1967 के आम चुनावों में यह लोकसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. हालांकि 1974 तक यह पार्टी प्रभावहीन हो गई और धीरे-धीरे समाप्त हो गई.
1989 – थियानमेन चौक नरसंहार, चीन
4 जून 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग के थियानमेन चौक (Tiananmen Square Massacre, China) पर हजारों छात्रों ने लोकतंत्र और भ्रष्टाचार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था. चीनी सरकार ने इस विरोध को कुचलने के लिए सेना भेजी, जिसमें हजारों लोग मारे गए. हालांकि चीनी सरकार ने कभी सटीक आंकड़े नहीं जारी किए, यह घटना आज भी चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर कड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है. चीन सरकार की इस कार्रवाई की कई देशों ने कड़ी निंदा की.
2001 – नेपाल में ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह की ताजपोशी
4 जून 2001 को ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह (Gyanendra Bir Bikram Shah) ने नेपाल के राजा (King of Nepal) के रूप में शपथ ली. इससे पहले 1 जून 2001 को काठमांडू के नारायणहिती दरबार में हुए शाही हत्याकांड (Nepalese royal massacre) में तत्कालीन राजा बीरेन्द्र, रानी ऐश्वर्या, क्राउन प्रिंस दीपेन्द्र सहित कई शाही सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. गंभीर रूप से घायल दीपेन्द्र को अस्थायी रूप से राजा घोषित किया गया, लेकिन उनकी मृत्यु के तीन दिन बाद, 4 जून को उनके चाचा ज्ञानेंद्र ने औपचारिक रूप से नेपाल के राजा की गद्दी संभाली. इस घटना ने नेपाल की राजनीति और राजशाही की साख को गहराई से प्रभावित किया. ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह क़रीब सात साल ही नेपाल के सम्राट रह पाए उसके बाद प्रजातंत्र के लिए हुए एक बड़े आंदोलन ने सत्ताच्युत कर दिया. ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह नेपाल के राज सिंहासन के ऊपर दो बार आरुढ़ हुए थे. पहली बार क़रीब साढ़े तीन साल की उम्र में जब उनके दादा त्रिभुवन वीर बिक्रम शाह को परिवार के बाक़ी सदस्यों के साथ देश निकाला दे दिया गया था.
4 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1936 — नूतन, हिन्दी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक
1946 — एस. पी. बालासुब्रमण्यम, भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायकों में से एक
1947 — अशोक सराफ, हिंदी और मराठी फिल्म अभिनेता
1948 — अनिल शास्त्री, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
1959 — अनिल अंबानी, रिलायंस समूह के अध्यक्ष और प्रसिद्ध व्यवसायी
1975 — एंजेलिना जोली, अमेरिकी अभिनेत्री
4 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
2016 — सुलभा देशपांडे, हिन्दी और मराठी फ़िल्मों की अभिनेत्री
2018 — साहित्यकार अभिमन्यु अनत, मॉरीशस में हिन्दी कथा साहित्य के सम्राट थे
4 जून को क्यों याद रखा जाए?
- निर्दोष बच्चों के साथ दुर्व्यवहार विरोधी दिवस (International Day of Innocent Children Victims of Aggression): हर साल 4 जून को संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा “निर्दोष बच्चों के साथ दुर्व्यवहार विरोधी दिवस” मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में उन बच्चों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शोषण का शिकार हुए हैं. यह दिवस बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दोहराने का प्रतीक है. इसे 'Child Victim Day' भी कहा जाता है.
संपादक की कलम से: अगर आप ऐसे ही इतिहास के अनसुने पन्नों में रुचि रखते हैं, तो जुड़े रहिए हमारे साथ हर दिन की ऐतिहासिक झलकियों के लिए.




