आप शादी के सेलिब्रेशन की तैयारी करो, वेन्यू की चिंता “बिग एफ डे” पर छोड़ दो

    By Harish Bisht
    June 06, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
    आप शादी के सेलिब्रेशन की तैयारी करो, वेन्यू की चिंता “बिग एफ डे” पर छोड़ दो
    1.5 बिलियन डॉलर का है बाजारचेन्नई में 500 से ज्यादा आयोजन स्थलग्राहकों के लिए होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल, पार्टी लॉन, गेस्ट हॉउस का आयोजन ग्राहकों के लिए मोलभाव भी करती है “बिग एफ डे”
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    नये विचार तरक्की के नये रास्ते खोलते हैं। आज हम अपने आसपास देखते हैं तो पता चलता है कि हम उस दौर में हैं जहां कई क्षेत्र असंगठित हैं और उनको ऑनलाइन लाने की कोशिश की जा रही है। जैसे 'रेड बस' ने बसों को जोड़ने का काम किया तो उसके बाद दूसरे क्षेत्र जैसे टैक्सियां, ट्रक और दूसरी कई चीजें ऑनलाइन होती चली गई। ऐसा ही एक विचार आया चैन्नई के सबिन रोडरिग्ज के मन में। उन्होने देखा कि 'आयोजन स्थल' की देश भर में काफी मांग हैं। उनके मुताबिक "देश के छह शहरों में हम देख सकते हैं कि यहां पर 15 हजार से ज्यादा आयोजन स्थल हैं। इन आयोजन स्थल में होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल, पार्टी लॉन, गेस्ट हॉउस इत्यादी शामिल हैं।" ऐसा मानने वाले वो अकेले नहीं हैं दूसरे भी कई लोग हैं जो इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। उदाहरण के लिए 'मेगावैन्यू' जिसका भारत में काफी बड़ा कारोबार है, तो 'वैन्यूलूक' एनसीआर इलाके में काम कर रहा है इसी तरह 'मेरा इवेंट' भी इस क्षेत्र में अपने पांव जमा रहा है।

    सबिन रोडरिग्ज (लाल टीशर्ट में)

    सबिन रोडरिग्ज (लाल टीशर्ट में)


    इन नामों के बीच एक नया नाम उभर रहा है 'बिग एफ डे'। जिसने इस क्षेत्र में अभी अपनी यात्रा शुरू की है, इसका मुख्य लक्ष्य है नये आयोजन स्थल की पहचान करना। सबिन डेढ़ बिलियन डॉलर वाले इस बाजार को लेकर खासे उत्साहित हैं। सबिन के मुताबिक "आज हम कोई भी आयोजन तय करने के लिए गूगल या जस्ट डॉयल जैसी वेबसाइट की मदद लेते हैं जहां से हमें आयोजन स्थल और फोन नंबर की जानकारी मिलती है। जिसके बाद फोन कर आयोजन स्थल की जानकारी जुटानी पड़ती है या फिर ज्यादा जानकारी के लिए वहां तक जाना पड़ता है, लेकिन 'बिग एफ डे' आयोजन स्थल से जुड़ी तमाम जानकारी इकठ्ठा करता है। ये बताता है कि जिस आयोजन स्थल को आप देख रहे हैं वहां पर बैठने की कितनी क्षमता है, खाने में क्या क्या विकल्प हैं और हॉल कितना बड़ा है।" इतना ही नहीं 'बिग एफ डे' आयोजन स्थल के फोटो भी खिंचता है ताकि ऑनलाइन बैठे ग्राहक को जगह तय करने में दिक्कत ना हो। आज के दौर में तारीख के आधार पर कीमतों में बदलाव, मेहमानों की संख्या, भोजन के प्रकार आदि कई चीजें काफी मायने रखती हैं। 'बिग एफ डे' में इन सब चीजों का खास ध्यान तो रखता ही है इसके अलावा ग्राहक कीमतों को लेकर मोलभाव भी कर सकता है। सबिन के मुताबिक “अगर आप बैंकेट हॉल की बुकिंग के तरीके के बारे में जानते हैं तो आप मेरे कहने का मतलब आसानी से समझ सकते हैं। आयोजन स्थल की अंतिम कीमत 50 प्रतिशत से ज्यादा या कम भी हो सकती हैं (जो कीमत शुरूआत में लगाई गई थी) ये निर्भर करता है आपके मोलभाव के कौशल पर और यहां पर हम 'बिग एफ डे' के ग्राहकों के लिए खुद मोलभाव करते हैं।” इसके अलावा आयोजन स्थल में सब कुछ ठीक ठाक है इस पर हमारी बराबर नजर रहती है।

    शुरूआत के दिनों में 'बिग एफ डे' ने 60 लाख रुपये की 75 बुकिंग की जिसमें से करीब 5 लाख रुपये 'बिग एफ डे' की बचत हुई। आयोजन स्थल का बाजार बड़े ही आकर्षक तरीके से खुल रहा है साथ ही इसमें काफी बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। योजना के स्तर पर आयोजन स्थल की खोज और बुकिंग ऑनलाइन हो रही है वहीं सामाजिक और कार्पोरेट आयोजनों के लिए एप्स और कार्यक्रमों के लिए दूसरे तरीके सामने आ रहे हैं। शुरूआत में ये माइक्रोसॉफ्ट प्रोजेक्ट, एक्सेल और दूसरी चीजों पर निर्भर थे लेकिन अब अत्याधुनिक तकनीक के सहारे विक्रेता को सारी जानकारी ऑनलाइन ही मुहैया कराई जा रही है।

    कार्यक्रमों के लिए टिकट : इस क्षेत्र में काफी हलचल है और काफी कुछ किया जाना बाकि है।

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    तकनीक आयोजन पर हावी हो रही है और हम उस समय की ओर बढ़ रहे हैं जहां पर कार्यक्रमों का आयोजन बिल्कुल अलग तरीके से होगा। जैसे की ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं के लिए बुक माय शो ने लेन देन की प्रक्रिया आरामदायक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसे ही एक्सप्लरा और मेराइवेंट्स जैसी ऑनलाइन कंपनियां कार्यक्रमों के टिकट के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम कर रही हैं।

    'बिग एफ डे' ने तो भी अपनी यात्रा शुरू की है और चैन्नई जैसे शहर में 500 से ज्यादा आयोजन स्थलों की बुकिंग इसके माध्यम से की जाती है। सबिन के पास चार सदस्यों की एक छोटी सी टीम है जो तकनीक की जानकारी तो रखती ही है साथ ही जमीनी स्तर पर आयोजन स्थल के संचालकों के साथ बैठक भी करती है। ये टीम अपने भविष्य को लेकर काफी आशावान है। तभी तो अन्ना विश्वविद्यालय के छात्र रहे और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में कई सालों का काम करने का अनुभव उनके इस काम मददगार साबित हो रहा है। (चैन्नई में आयोजित यूअर स्टोरी के कार्यक्रम में उन्होने ये जानकारी दी)

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