50% भारतीयों ने कभी नहीं चेक किया क्रेडिट स्कोर: ZET स्टडी
ZET के को-फाउंडर और CEO मनीष शारा ने कहा, “क्रेडिट स्कोर यह तय करता है कि भारत में किसे अवसर मिलेगा और किसे नहीं. समस्या लोगों की नीयत नहीं, बल्कि जानकारी की है. जब लोग सिस्टम को समझेंगे, तभी वे इसका फायदा उठा पाएंगे.”
क्या आप जानते हैं कि आपका क्रेडिट स्कोर (credit score) क्या है? अगर नहीं, तो आप अकेले नहीं हैं. ZET, जो भारत का प्रमुख क्रेडिट स्कोर बिल्डर प्लेटफ़ॉर्म है, की एक नई स्टडी के अनुसार, करीब 50% भारतीयों ने कभी अपना क्रेडिट स्कोर चेक ही नहीं किया है.
ZET की हालिया स्टडी “India’s Credit Score Awareness Gap: The Hidden Cost of Not Knowing” में सामने आया है कि क्रेडिट स्कोर को लेकर देश में जागरूकता की बड़ी कमी है.
ZET के को-फाउंडर और CEO मनीष शारा ने कहा, “क्रेडिट स्कोर यह तय करता है कि भारत में किसे अवसर मिलेगा और किसे नहीं. समस्या लोगों की नीयत नहीं, बल्कि जानकारी की है. जब लोग सिस्टम को समझेंगे, तभी वे इसका फायदा उठा पाएंगे.”
क्रेडिट स्कोर एक 3 अंकों की संख्या होती है (300 से 900 के बीच). यह बताता है कि आप लोन चुकाने में कितने जिम्मेदार हैं. अगर स्कोर 750 से ऊपर हो तो आपको जल्दी लोन मिल सकता है, ब्याज दर कम हो सकती है और बीमा प्रीमियम भी घट सकते हैं.
लेकिन समस्या यह है कि लाखों लोग अब भी इसे लेकर अंधेरे में हैं. नतीजा यह होता है कि उन्हें बिना बताए लोन रिजेक्ट हो जाते हैं या उन्हें ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है.
स्टडी के अहम नतीजे:
- हर 2 में से 1 भारतीय ने कभी अपना क्रेडिट स्कोर नहीं देखा.
- 30% लोगों को लोन या क्रेडिट कार्ड रिजेक्ट हुआ, वजह खराब या न के बराबर क्रेडिट स्कोर.
- 25% लोग मानते हैं कि क्रेडिट स्कोर सैलरी से जुड़ा होता है.
- 4 में से 1 भारतीय को यह भी नहीं पता कि क्रेडिट स्कोर कौन बनाता है.
- 58% लोग सोचते हैं कि अपना स्कोर खुद चेक करने से यह घटता है.
- पुरुष अपना स्कोर ज्यादा चेक करते हैं, जबकि महिलाएं अपनी क्रेडिट योग्यता को कम आंकती हैं.
स्टडी में कई वास्तविक कहानियां भी सामने आईं. जैसे एक डॉक्टर को पहली क्रेडिट कार्ड अप्लिकेशन रिजेक्ट कर दी गई क्योंकि उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं था. वहीं एक दुकान मालिक को होम लोन पर लाखों रुपये अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ा.
आज के समय में क्रेडिट स्कोर सिर्फ लोन या कार्ड तक सीमित नहीं है. विदेशों में यह बीमा प्रीमियम, नौकरी और वित्तीय प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करता है. भारत में भी आने वाले समय में इसकी अहमियत और बढ़ेगी. कुछ सरकारी बैंक तो नौकरी के लिए उम्मीदवारों का क्रेडिट स्कोर देखना भी शुरू कर चुके हैं.
बेंगलुरु मुख्यालय वाले फिनटेक स्टार्टअप ZET (पहले Onecode ) की स्थापना साल 2019 में, मनीष शारा और यश देसाई ने मिलकर की थी. यह स्टार्टअप भारत के छोटे शहरों (टियर 2, 3 और 4) में एजेंट का नेटवर्क बना रहा है, ताकि लोगों की पैसों की जरुरतों का पूरा किया जा सके. यह स्टार्टअप YourStory की साल 2021 की Tech50 लिस्ट का हिस्सा रहा है.



