अब हर भारतीय को मिलेगा क्रेडिट कार्ड, ZET बदल रहा है सिस्टम!
फिनटेक स्टार्टअप ZET ने हाल ही में SBM Bank के साथ मिलकर एक FD-समर्थित क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया था. ZET का दावा है कि यह क्रेडिट कार्ड बिना जटिल दस्तावेज़ों के मिलता है और यूज़र्स को क्रेडिट स्कोर बनाने व फाइनेंशियल जागरूकता बढ़ाने में मदद करता है.
हाइलाइट्स
लोन से जुड़ी चुनौतियों को हल कर रहा है फिनटेक स्टार्टअप ZET
FD-समर्थित SBM ZET Credit Card से नए यूज़र बना सकते हैं क्रेडिट स्कोर
ZET ऐप के ज़रिए पूरी प्रक्रिया डिजिटल है – बैंक जाने, डॉक्युमेंटेशन की झंझट खत्म
यूज़र्स को सही क्रेडिट यूज़ की ट्रेनिंग और गाइडेंस भी देता है ZET
ZET का लक्ष्य है पर्सनल लोन व नए प्रोडक्ट लॉन्च करना
भारत एक तेजी से बढ़ती हुई डिजिटल अर्थव्यवस्था (digital economy) बन चुका है. UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) से लेकर ऑनलाइन लोन और क्रेडिट कार्ड (credit card) तक, हर सेवा अब मोबाइल पर उपलब्ध है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने डिजिटल युग में भी देश के करोड़ों लोगों के पास क्रेडिट स्कोर (credit score) नहीं है — और इसी वजह से वे फाइनेंशियल सिस्टम से कटे हुए हैं.
क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करने पर रिजेक्शन झेलना, लोन के लिए इनकम प्रूफ या ITR (इनकम टैक्स रिटर्न) न होना, और एक छोटी सी फाइनेंशियल गलती की वजह से जीवन भर खराब क्रेडिट स्कोर से जूझना — ये केवल शहरों की नहीं, भारत के गांवों, कस्बों और टियर 2-3 शहरों की आम कहानियाँ हैं.
इन्हीं कहानियों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं मनीष शारा (Manish Shara), ZET के को-फाउंडर और सीईओ. बेंगलुरु मुख्यालय वाले फिनटेक स्टार्टअप ZET (पहले ) की स्थापना साल 2019 में, मनीष और यश देसाई (Yash Desai) ने मिलकर की थी. यह स्टार्टअप भारत के छोटे शहरों (टियर 2, 3 और 4) में एजेंट का नेटवर्क बना रहा है, ताकि लोगों की पैसों की जरुरतों का पूरा किया जा सके. मनीष और उनकी टीम की सोच है कि क्रेडिट केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि हर भारतीय का अधिकार होना चाहिए. उनके नेतृत्व में ZET ने SBM Bank India के साथ मिलकर एक ऐसा इनोवेटिव प्रोडक्ट — SBM ZET Credit Card — लॉन्च किया है जो न केवल लोगों को क्रेडिट एक्सेस देता है, बल्कि उन्हें फाइनेंशियल एजुकेशन भी देता है.
यह स्टार्टअप YourStory की साल 2021 की Tech50 लिस्ट का हिस्सा रहा है.
यह सिर्फ एक स्टार्टअप की नहीं, बल्कि एक सोच की कहानी है — एक ऐसी सोच जो कहती है कि अगर सही साधन और जानकारी दी जाए, तो भारत का हर नागरिक अपने आर्थिक भविष्य को खुद आकार दे सकता है.
क्रेडिट एक्सेस – जो दिखता नहीं लेकिन बहुत बड़ा मुद्दा है
YourStory हिंदी से बात करते हुए, मनीष बताते हैं, “भारत में 16 करोड़ से ज्यादा लोगों को ठीक तरह से क्रेडिट (ऋण) की सुविधा नहीं मिलती है. लगभग आधी आबादी के पास फॉर्मल क्रेडिट का कोई साधन नहीं है.” जब ZET ने अपने B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) प्लेटफॉर्म ZET Partner की शुरुआत की, तब उन्होंने फील्ड एजेंट्स के ज़रिए यह समझा कि छोटे शहरों और गांवों में लोग सिर्फ इसलिए रिजेक्ट हो रहे हैं क्योंकि उनकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री (credit history) नहीं है.
वे आगे कहते हैं, “लोग जानते ही नहीं कि क्रेडिट स्कोर क्या होता है या इसे कैसे बनाया जाता है. हम इसी गैप को भरने के लिए एक ऐसा क्रेडिट कार्ड लाए, जो गारंटीड अप्रूवल देता है, स्कोर बनाने में मदद करता है और साथ में एक्सपर्ट गाइडेंस भी देता है.”

सांकेतिक चित्र
FD-समर्थित क्रेडिट कार्ड – बिना कागजों के क्रेडिट की शुरुआत
मनीष शारा के मुताबिक, सबसे बड़ी रुकावट डॉक्युमेंटेशन है. बैंक आमतौर पर सैलरी स्लिप, ITR या क्रेडिट स्कोर मांगते हैं. लेकिन अगर कोई छात्र है, फ्रीलांसर है या खुद का छोटा बिजनेस करता है तो वह शुरू में ही बाहर हो जाता है.
“SBM ZET Credit Card इस सोच को बदलता है. इसमें आप एक छोटा सा फिक्स्ड डिपॉजिट बनाते हैं, जो बैंक के लिए एक सिक्योरिटी होता है. बैंक को अब आपकी इनकम देखने की ज़रूरत नहीं होती. आपको 90% क्रेडिट लिमिट मिलती है उस FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) के आधार पर,” मनीष बताते हैं.
ZET और SBM Bank India की पार्टनरशिप से यह कार्ड पूरी तरह डिजिटल प्रोसेस के साथ यूज़र को मिलता है – न कोई ब्रांच विज़िट, न डॉक्युमेंटेशन की झंझट, न अप्रूवल का इंतज़ार.
कैसे काम करता है SBM ZET Credit Card?
यह कार्ड उन लोगों के लिए बनाया गया है जो पहली बार क्रेडिट सिस्टम में आ रहे हैं या जिनका स्कोर काफी कम है. यूज़र ZET ऐप पर FD खोलते हैं और उसी के आधार पर उन्हें एक Lifetime Free क्रेडिट कार्ड मिलता है. यह कार्ड UPI-enabled RuPay नेटवर्क पर चलता है और 80 से अधिक ब्रांड्स पर कैशबैक और छूट देता है.
सबसे बड़ी बात – आपकी FD सालाना 7% तक ब्याज कमाती रहती है. यानी, यूज़र को क्रेडिट की सुविधा भी मिलती है और सेविंग्स का फायदा भी.
पहली बार क्रेडिट लेने वालों के लिए वरदान
मनीष कहते हैं, “अगर किसी का स्कोर नहीं है या बहुत कम है, तो बैंक सीधे मना कर देते हैं. लेकिन FD-समर्थित मॉडल में यह परेशानी खत्म हो जाती है. हर ट्रांजैक्शन क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट होता है, जिससे समय के साथ यूज़र का स्कोर बेहतर होता है.”
ZET ऐप यूज़र को क्रेडिट के सही इस्तेमाल की भी ट्रेनिंग देता है – बिल पेमेंट अलर्ट, स्कोर ट्रैकिंग, पर्सनलाइज्ड सुझाव और वीडियो गाइडेंस के ज़रिए.
नए यूज़र्स की सोच में आ रहा है बदलाव
ZET कार्ड को लॉन्च हुए अभी दो महीने ही हुए हैं, लेकिन मनीष और उनकी टीम ने एक दिलचस्प बदलाव देखा है. “लोग अब पहली बार अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर रहे हैं, लिमिट का समझदारी से उपयोग कर रहे हैं, समय पर पेमेंट कर रहे हैं,” मनीष बताते हैं.
यह बदलाव सिर्फ आर्थिक नहीं, मानसिक भी है. युवा अब क्रेडिट को सिर्फ खर्च के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं – जैसे एजुकेशन लोन, घर खरीदना या बिजनेस शुरू करना.

सांकेतिक चित्र
FD-समर्थित मॉडल क्यों है सुरक्षित?
मनीष FD-समर्थित कार्ड को घर किराए पर लेने के सिक्योरिटी डिपॉजिट से तुलना करते हैं. वे बताते हैं, “जैसे मकान मालिक सिक्योर डिपॉजिट से आश्वस्त होता है, वैसे ही बैंक भी. अगर यूज़र डिफॉल्ट करता है, तो बैंक FD से रिकवरी कर सकता है.”
इस मॉडल में लिमिट यूज़र के पैसे पर आधारित होती है, जिससे खर्च और रिपेमेंट पर उनका नियंत्रण रहता है. इससे जिम्मेदार व्यवहार भी प्रोत्साहित होता है.
ZET ऐप सिर्फ कार्ड इश्यू नहीं करता, यह एक क्रेडिट कोच की तरह काम करता है. यूज़र का स्कोर ट्रैक करता है, समय पर अलर्ट भेजता है और सुधार के लिए सुझाव देता है.
मनीष बताते हैं, “हमारा Credit Builder Membership प्रोग्राम यूज़र्स को एक्सपर्ट से कंसल्टेशन, रिपोर्ट एनालिसिस और जरूरत पड़ने पर एक छोटा सा बिल्डर लोन भी देता है, जिससे वे 750+ स्कोर तक पहुंच सकें.”
“क्रेडिट एक अधिकार है, लग्जरी नहीं”
ZET की सोच साफ है – क्रेडिट को एक हक बनाना, न कि कुछ चुने हुए लोगों की विशेष सुविधा. मनीष कहते हैं, “लोग क्रेडिट के लायक हैं, लेकिन सिस्टम ने उन्हें नकार दिया है क्योंकि वो पुराने मापदंडों पर खरे नहीं उतरते. हमारी कोशिश है इस सिस्टम को इनक्लूसिव (सबको शामिल करने वाला) बनाना.”
क्रेडिट जब आम लोगों तक पहुंचेगा, तभी उनकी तरक्की की रफ्तार तेज होगी – और यही असली बदलाव है जिसे ZET लाना चाहता है.
भविष्य की योजनाएं
ZET केवल एक कार्ड तक सीमित नहीं रहना चाहता. मनीष और उनकी टीम का सपना है – यूज़र की पूरी क्रेडिट जर्नी को आसान बनाना. आज वे उन्हें पहला क्रेडिट कार्ड दे रहे हैं, कल उन्हें पर्सनल लोन और अनसिक्योर्ड कार्ड तक पहुंचाना चाहते हैं.
मनीष कहते हैं, “हम छोटे शहरों (टियर 2 और 3) मार्केट्स में ZET Partner नेटवर्क से पहुंच बढ़ाएंगे, और नए प्रोडक्ट लॉन्च करेंगे और पार्टनरशिप्स भी बढ़ाएंगे.”
ZET और मनीष शारा की यह यात्रा केवल एक फाइनेंशियल प्रोडक्ट की नहीं, एक सामाजिक बदलाव की कहानी है. यह उस भारत की कहानी है जो अब खुद को ‘क्रेडिट योग्य’ मानता है – क्योंकि अब उसके पास न सिर्फ कार्ड है, बल्कि समझ भी है.
ZET की यह पहल हर उस युवा, छात्र, दुकानदार या नौकरीपेशा के लिए है जो आज तक सिस्टम के बाहर खड़ा था. अब समय है कि हर भारतीय, चाहे वो कहीं से भी हो, अपने फाइनेंशियल फ्यूचर को खुद गढ़ सके.




