अब घर बैठे फोन करिये और ‘टेली रिक्शा’ से मंगवाइये आॅटो रिक्शा

    मध्य प्रदेश के इंदौर में 50 आॅटो से शुरू हुई सेवा अब 5000 आॅटो रिक्शा के द्वारा दे रही है सेवालुधियाना के रहने वाले करण वीर सिंह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़कर शुरू की सेवाउपभाक्ता वेबसाइट के द्वारा या एक विशेष फोन नंबर से बुक करवा सकते हैं आॅटो रिक्शायात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए प्रत्येक आॅटो में जीपीएस आधारित पैनिक बटन भी है मौजूद

    4th Jun 2015
    • +0
    Share on
    close
    • +0
    Share on
    close
    Share on
    close

    जब हम कहीं सफर करने के लिये कैब की बात करते हैं तो दुर्भाग्यवश हमारी चर्चा कुछ चुनिंदा उच्च शहरों तक ही आकर सिमटकर रह जाती है। हालांकि परिवहन की समस्या पूरे देश में एक समान है और मझोले और छोटे शहरों के निवासी भी इस समस्या से बड़े शहरों के निवासियों की तरह ही जूझने को मजबूर हैं। दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर सहित कुछ चुनिंदा शहरों के निवासी ओला, उबर और टैक्सी फाॅर श्योर जैसी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि छोटे शहरों में न तो ये सेवाएं उपलब्ध हैं और न ही ऐसी सेवाओं को शुरू करने का सपना देखने वाले युवा उद्यमियों का साथ देने के लिये पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। लुधियाना के रहने वाले करन वीर सिंह ने इस स्थिति में परिवर्तन लाने की ठानी और मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘टेली रिक्शा’ के नाम से एक समूहक सेवा का शुभारंभ किया। फर्क सिर्फ इतना था कि यह एक कैब का समूह होने के बजाय आॅटो रिक्शा का समूह था और इसीलिये इनके सामने आने वाली चुनौतियां कहीं अधिक होने वाली थीं।

    image


    करण लुधियाना से इंदौर अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने आए थे। यहां आने के बाद उन्होंने आॅटो रिक्शा वालों का एकाधिकार देखने के अलावा टैक्सी सेवाओं में होने वाली देरी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुरक्षा विकल्पों की कमी को गहराई से महसूस किया। वे कहते हैं, ‘‘जब मात्र एक फोन करके कैब को अपने घर के दरवाजे पर मंगवाया जा सकता है तो फिर आॅटो रिक्शा को क्यों नहीं? मैंने पाया कि भारत में आॅटो रिक्शा का उद्योग बिखरा हुआ होने के अलावा असंगठित और अप्रयुक्त है। इस कई स्तरों तक बिखरे हुए उद्योग को एक सूत्र में पिरोते हुए इसमें अग्रणीं होने की सोच मेरे ऊपर इतनी हावी थी कि मैंने एकएमआईएमएस की अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और अपने सपने को सच्चाई को बदलने में जी जीन से जुट गया। मुझे दुनिया में इसके अलावा सबकुछ गौण लगने लगा और इस तरह मेरे उद्यमिता के सफर की शुरुआत हुई।’’

    टेली रिक्शा ने प्रारंभ में 50 आॅटो रिक्शा के साथ बाजार में अपना पहला कदम रखा था जो अब बढ़कर 5 हजार तक पहुंच गया है और जल्द ही भोपाल और उज्जैन में भी अपनी सेवाओं को विस्तारित करने वाले हैं। आॅटो रिक्शा बुक करने के लिये उपभोक्ता को या तो इनकी वेबसाइट पर लाॅगइन करना होता है या फिर वे इनके विशेष फोन नंबर 9098098098 (फिलहाल यह सेवा सिर्फ इंदौर में उपलब्ध है) पर फोन कर सकते हैं। एक बार उपभोक्ता अपनी यात्रा के समय का उल्लेख करने के साथ-साथ अपने प्रस्थान और आगमन के स्थान के बारे में जानकारी दे देता है आॅटो चालकों को भी समानांतर रूप से सूचित कर दिया जाता है। जो भी चालक सबसे पहले उपभोक्ता की यात्रा के अनुरोध को स्वीकार करता है उपभोक्ता को उसके बारे में सूचित करने के साथ-साथ यात्रा में लगने वाले अनुमानित समय और किराये की जानकारी भी दी जाती है। एक बार उपभोक्ता के सहमत होने के बाद उसे पुष्टिकरण का एसएमएस भेज दिया जाता है। यात्रा की समाप्ति के बाद उपभोक्ता चालक को भुगतान देकर उसकी रसीद ले सकता है।

    image


    हालांकि देखने और सुनने में यह नमूना काफी आसान लगता है लेकिन इसे लागम करने में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। करण बताते हैं, ‘‘हमने जिन 600 चालकों के बीच सवेक्षण किया उनमें से सिर्फ 100 ही हमारे साथ जुड़ने के लिये सहमत हुए। इसके बाद हमने सहमत हुए इन 100 चालकों के साथ एक बैठक की योजना बनाई। बहुत कम पैसों के साथ हमें प्रारंभ में बहुत संघर्ष करना पड़ा। चालकों के साथ होने वाली बैठक हमारे लिये एक बहुत बड़ी शिकस्त साबित हुई और उनमें से एक भी चालक सामने नहीं आया और शायद वह मेरे जीवन का सबसे निराशाजनक दिन था। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी और उन चुनिंदा चालकों को दोबारा फोन किया। हालांकि उनमें से कुछ ने तो हमें पहचानने से ही इंकार कर दिया और कईयों ने पहले की तरह दिलचस्पी नहीं दिखाई। फिर भी लगभग 50 के करीब चालक अभी भी हमारे साथ जुड़ने के लिये उत्साहित थे। और इसके साथ ही हमने ‘टेली रिक्शा’ की सेवाओं की नींव रखी। हालांकि सेवाओं को शुरू करने के बाद भी हम पैसों की तंगी को लेकर परेशान ही रहे।’’

    ’’प्रारंभिक दिनों में लोगों को ‘टेली रिक्शा’ के बारे में पता ही नहीं था और ऐसे में चालकों को यह समझाना कि हम जो कुछ कर रहे हैं उसमें उनका ही हित है एक बहुत बड़ी चुनौती था। आमतौर पर उनका पहला सवाल होता था, ‘‘इससे आपको क्या मिलेगा?’’ या फिर ‘‘हमें आपको क्या देना पड़ेगा?’’ शुरुआती दिनों में वे काफी सशंकित थे लेकिन एक बार हमारे साथ काम करने के बाद उन्हें हमपर विश्वास होने लगा। और अब हम एक बड़ा परिवार हैं।’’

    ‘‘इसके अलावा उन्हें मीटर के आधार पर किराया लेने के लिये तैयार करने के साथ-साथ किराये की एक निश्चित दर तय करना भी बहुत मुश्किल था। और ऐसा इसलिये था क्योंकि सरकार द्वारा तय किये गए किराये काफी कम थे और ऐसे में इन चालकों के बीच यात्रियों से अनुचित किराये लेने का चलन बना हुआ था और हमें इसे नियमित करना था। आॅटो चालकों और सरकारी अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ताओं के बाद आखिरकार हम एक ऐसी दर तय करने में सफल हुए जो काफी कम होने के साथ-साथ ‘‘अनुचित’’ नहीं कही जा सकती थी। इसके अलावा उपभोक्ताओं की सौदेबाजी की आदतों को बदलना भी काफी मुश्किल अनुभव रहा। हम पहले से ही अपने उपभोक्ताओं को कम-से-कम संभावित किराया प्रदान करने की कोशिश कर रहे थे और वह भी मीटर के आधार पर लेकिन तब भी अधिकतर मीटर से चलने की जगह सौदेबाजी करके सफर करना पसंद करते थे। इतने दिनों बाद लोगों की इस आदत में आ रही कमी को देखते हुए हमें काफी प्रसन्नता होती है।’’

    करण सिंह , संस्थापक, टेली रिक्शा

    करण सिंह , संस्थापक, टेली रिक्शा


    हालांकि अब ऐसा कभी भी हो सकता है जब कैब सेवा प्रदाता छोटे शहरों में भी अपने पैर पसारने लगें लेकिन करण बिल्कुल बेफिक्र दिखते हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश करना बहुत मुश्किल है और ऐसे में उनके लिये आॅटो रिक्शा यूनियनों को अपने साथ जुड़ने के लिये मनाना एक बेहद कठिन कार्य होगा।

    आज के समय में जब यात्रियों की सुरक्षा एक ज्वलंत मुद्दा है ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निबटने के लिये ‘टेली रिक्शा’ ने अपने प्रत्येक आॅटो में जीपीएस आधारित पैनिक बटन स्थापित किया है। इसके अलावा ये लोग समय-समय पर अपने साथ जुड़े आॅटो चालकों के लिये प्रशिक्षण सत्रों का भी आयोजन करते रहते हैं। और इनके ये चालक प्रतिदिन लगभग 500 के करीब यात्रियों के सफर को आसान बनाते हैं।

    फिलहाल इनके राजस्व का मुख्य स्त्रोत इन्हें मिलने वाला कमीशन और प्री-पेड बूथ हैं। इसके अलावा इन्होंने रियल एस्टेट पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है क्योंकि ये चलायमान रहते हैं। इस प्रकार से ये ब्रांडों को लोगों के सामने पहुंचाने का एक अच्छा जरिया साबित होते हैं। इसके अलावा ‘टेली रिक्शा’ ने कुछ नाइट क्लबों और ईवेंट मैनेजमेंट कंपनियों को अपने साथ आधिकारिक यात्रा साझेदारों के रूप में जोड़ने में सफलता पाई है और इस तरह से इन्हें कुछ राजस्व की भी प्राप्ति होती है।

    अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में करण बताते हैं, ‘‘आने वाले 5 वर्षों में हम कई और शहरों में विस्तार करते हुए ‘टेली रिक्शा’ के आधार को और अधिक बढ़ाना चाहते हैं। हमनें जो इंदौर में करके दिखाया वह वही हम देश के अन्य शहरों में भी दोहराना चाहते हैं। बेशक उस शहर की गतिशीलता के अनुसार चाजों को सुधारते हुए।’’

    ऐसी सेवाओं को छोटे शहरों से निकलते और पनपते देखना निश्चित ही एक सुखद अनुभूति है क्योंकि वे सही मायनों में असली भारत की सेवा करने का काम कर रही हैं। यह भारत का वह हिस्सा है जिसे हम किसी भी नई खोज और बड़े विचारों की बात करते समय कहीं पीछे छोड़ते हुए भूल जाते हैं।

    • +0
    Share on
    close
    • +0
    Share on
    close
    Share on
    close

    Our Partner Events

    Hustle across India