6 जून: शिवाजी बने 'छत्रपति', हुआ D-Day और बागमती रेल त्रासदी
6 जून का इतिहास गवाह है छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक, D-Day जैसे विश्व युद्ध, भारत की सबसे बड़ी रेल दुर्घटना और Tetris गेम की शुरुआत का. जानिए इस खास तारीख से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं जो इतिहास में अमिट छाप छोड़ गईं. पढ़ें आज का पूरा इतिहास. साथ ही जानिए आज का रोचक तथ्य.
हर दिन इतिहास के पन्नों में एक खास पहचान रखता है, और 6 जून (6 June Ka Itihas) का दिन भी इससे अलग नहीं है यह तारीख विश्व इतिहास और भारतीय इतिहास दोनों में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, आंदोलनों और बलिदानों से जुड़ी रही है
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 6 जून के दिन (6 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए जानते हैं कि 6 जून ने इतिहास को कैसे आकार दिया.
भारत और विश्व के इतिहास में 6 जून की प्रमुख घटनाएं
1674 — छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक
6 जून 1674 का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत गौरवपूर्ण माना जाता है. इसी दिन मराठा साम्राज्य (Maratha Empire) के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) का भव्य राज्याभिषेक समारोह महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में संपन्न हुआ. इस समारोह में शिवाजी महाराज को "छत्रपति" की उपाधि दी गई. (Chhatrapati Shivaji Maharaj coronation day - 6th June) समारोह की मुख्य वैदिक विधियाँ गागा भट्ट नामक काशी के प्रसिद्ध ब्राह्मण विद्वान द्वारा संपन्न कराई गईं. यह ऐतिहासिक क्षण हिंदवी स्वराज्य (हिंदुओं द्वारा शासित स्वतंत्र राज्य) की औपचारिक स्थापना का प्रतीक बना, जो मुगलों और अन्य विदेशी शक्तियों के विरुद्ध स्वाभिमान, स्वतंत्रता और स्वशासन का उद्घोष था. राज्याभिषेक के पश्चात शिवाजी ने एक संगठित प्रशासन, मुद्रा व्यवस्था (राजा शिवाजी मुद्रा), और नीति आधारित शासन की नींव रखी. चूंकि कुछ ब्राह्मण शिवाजी की जाति को लेकर संशय में थे, इसलिए उन्होंने 4 दिन बाद 10 जून 1674 को एक द्वितीय राज्याभिषेक (कुर्मवती परंपरा से) भी संपन्न कराया.
1918 — बैटल ऑफ बेलियू वुड की शुरुआत
बैटल ऑफ बेलियू वुड (Battle of Belleau Wood) प्रथम विश्व युद्ध (World War I) के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर लड़ी गई एक महत्वपूर्ण और निर्णायक लड़ाई थी. यह युद्ध फ्रांस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित बेलियू वुड (Bois de Belleau) नामक जंगल में लड़ा गया था. बेलियू वुड में अमेरिकी सेना की यह पहली बड़ी लड़ाई थी. यह लड़ाई 6 जून 1918 को शुरू हुई और 26 जून 1918 तक चली. अंततः 26 जून को अमेरिकी सेनाओं ने विजय प्राप्त की, लेकिन इसकी कीमत उन्हें लगभग 10,000 सैनिकों के मृत, घायल या लापता होने के रूप में चुकानी पड़ी. बैटल ऑफ बेलियू वुड ने न केवल प्रथम विश्व युद्ध के इतिहास में, बल्कि अमेरिकी सैन्य इतिहास में भी एक अमिट छाप छोड़ी.
1933 — दुनिया का पहला ड्राइव-इन मूवी थियेटर खुला
6 जून 1933 को दुनिया का पहला ड्राइव-इन मूवी थियेटर (first-ever drive-in movie theater) अमेरिका के न्यू जर्सी (New Jersey) राज्य के कैम्डन (Camden) शहर में खोला गया था. यह एक अनूठा प्रयोग था जिसमें दर्शक अपनी कारों में बैठे-बैठे ही फिल्म का आनंद ले सकते थे. यह ड्राइव-इन थियेटर "Park-In Theaters, Inc." के नाम से जाना जाता था. इस थियेटर में पहले दिन दिखाई गई फिल्म थी — "Wives Beware", जो एक ब्रिटिश कॉमेडी फिल्म थी. प्रत्येक कार के लिए 25 सेंट प्रति व्यक्ति और अधिकतम $1 प्रति कार शुल्क लिया गया था. इस अनोखे थियेटर को शुरू करने का श्रेय रिचर्ड एम. होलिंग्सहेड जूनियर (Richard M. Hollingshead Jr.) को जाता है. वे अपने पिता की ऑटोमोबाइल प्रोडक्ट कंपनी (Whiz Auto Products) में बतौर सेल्स मैनेजर काम करते थे और उन्होंने इस विचार को व्यवसायिक रूप दिया.
रिचर्ड ने अपनी मां को ध्यान में रखते हुए यह प्रणाली विकसित की, जो पारंपरिक थियेटर की कुर्सियों में बैठने में असहज महसूस करती थीं. उन्होंने अपनी कार में फिल्म देखने का विचार घर के पिछवाड़े में प्रयोग कर के देखा था. होलिंग्सहेड को 16 मई 1933 को ड्राइव-इन थियेटर के लिए पेटेंट भी मिला था, लेकिन यह पेटेंट 1950 में रद्द कर दिया गया था. 1950 और 1960 के दशक में अमेरिका में ड्राइव-इन थियेटर बहुत लोकप्रिय हुए, खासकर उपनगरों में रहने वाले परिवारों और युवाओं के बीच. एक समय अमेरिका में लगभग 4,000 से अधिक ड्राइव-इन थियेटर सक्रिय थे. यह नवाचार न केवल मनोरंजन का एक नया तरीका था, बल्कि यह अमेरिकी संस्कृति का एक प्रतीक भी बन गया.
1944 — D-Day – द्वितीय विश्व युद्ध का टर्निंग पॉइंट
D-Day शब्द का प्रयोग सैन्य अभियानों की शुरुआत के दिन के लिए किया जाता है. 6 जून 1944 को द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री हमला (Amphibious Invasion) हुआ था जिसे "D-Day" कहा जाता है. इस दिन मित्र देशों (Allied Forces) की सेनाएं नाज़ी जर्मनी (Nazi Germany) के खिलाफ फ्रांस के नॉरमैंडी तट (Normandy coast) पर उतरी थीं, जिसमें पाँच प्रमुख समुद्र तट शामिल थे — ओमाहा (Omaha), यूटा (Utah), गोल्ड (Gold), जूनो (Juno), और स्वॉर्ड (Sword). इस ऑपरेशन में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड और कई अन्य मित्र देशों की सेनाएं शामिल थीं. इस ऑपरेशन की योजना और गोपनीयता इतनी सटीक थी कि जर्मन सेना को सही स्थान और दिन का अनुमान नहीं लग सका. D-Day की तैयारी में लगभग 2 साल लगे, और इसमें 5,000 से अधिक जहाज, 11,000 विमान, और लाखों सैनिक शामिल थे. लगभग 1.56 लाख सैनिकों ने ऑपरेशन ओवरलॉर्ड (operation OVERLORD) के तहत लैंडिंग की थी, जिसने यूरोप में नाज़ी शासन के अंत की नींव रखी और द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्ति की ओर मोड़ा.
1981 — भारत में बागमती नदी रेल दुर्घटना
6 जून 1981 को भारत के बिहार राज्य में एक भयावह रेल दुर्घटना हुई, जिसे आज भी भारत के सबसे भीषण रेल हादसों में गिना जाता है. यह दुर्घटना तब हुई जब एक नौ-बोगियों वाली पैसेंजर ट्रेन बागमती नदी (Bagmati River rail accident) पर बने पुल को पार कर रही थी और अचानक पटरी पर एक गाय आ गई. यह हादसा बिहार के मानसी और सहरसा स्टेशनों के बीच बागमती नदी के पुल पर हुआ. यह स्थान कोलकाता (अब कोलकाता) से लगभग 250 मील (लगभग 400 किलोमीटर) दूर था. यह एक लोकल पैसेंजर ट्रेन थी जो नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में चलती थी. ट्रेन में लगभग 1,000 यात्री सवार थे. इस हादसे में लगभग 600 लोगों की मौत हुई मानी जाती है. केवल 286 शवों को बरामद किया गया, जबकि 300 से अधिक लोग लापता हो गए, जिन्हें कभी नहीं ढूंढा जा सका.
6 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1699 — आलमगीर द्वितीय, 16वें मुग़ल बादशाह जिन्होंने 1754 से 1759 ई. तक राज किया
1881 — गिरिधर शर्मा नवरत्न, हिंदी भाषा के साहित्यकार
1884 — शौक़ बहराइची, प्रसिद्ध शायर
1891 — मास्ती वेंकटेश अयंगर, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ भाषा के जाने-माने लेखक
1919 — राजेन्द्र कृष्ण, हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार
1929 — सुनील दत्त, हिन्दी फ़िल्म अभिनेता
1936 — डी. रामानायडू, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता
1939 — गुरबचन सिंह रंधावा, भारत के प्रसिद्ध एथलीट
6 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1957 — रामचंद्र दत्तात्रेय रानाडे, संस्कृत के विद्वान एवं दर्शनशास्त्री
1982 — डी. देवराज अर्स, कर्नाटक के 8वें मुख्यमंत्री
1986 — मास्ती वेंकटेश अयंगर, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ भाषा के जाने-माने लेखक
6 जून को क्यों याद रखा जाए?
- संयुक्त राष्ट्र का रूसी भाषा दिवस (UN Russian Language Day): हर साल 6 जून को संयुक्त राष्ट्र में रूसी भाषा दिवस मनाया जाता है. यह दिन महान रूसी कवि अलेक्ज़ेंडर सर्गेयेविच पुश्किन (Alexander Sergeyevich Pushkin) की जयंती के उपलक्ष्य में चुना गया है, जिन्हें आधुनिक रूसी साहित्य का जनक माना जाता है. यह दिवस संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं (फ्रेंच, चीनी, अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी और अरबी) के सम्मान में 2010 में शुरू की गई एक पहल का हिस्सा है. इसका उद्देश्य बहुभाषिकता और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाना तथा सभी आधिकारिक भाषाओं के समान उपयोग को बढ़ावा देना है.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं कि 6 जून 1984 को दुनिया का सबसे लोकप्रिय पज़ल वीडियो गेम 'टेट्रिस' (Tetris) पहली बार प्रकाशित हुआ था. इसे रूसी कंप्यूटर इंजीनियर एलेक्सी पाजिटनोव (Alexey Pajitnov) ने बनाया था. आज तक 100 मिलियन से ज़्यादा कॉपियाँ बिक चुकी हैं, जिससे यह इतिहास के सबसे सफल वीडियो गेम्स में से एक बन गया है.
संपादक की कलम से: अगर आप ऐसे ही इतिहास के अनसुने पन्नों में रुचि रखते हैं, तो जुड़े रहिए हमारे साथ हर दिन की ऐतिहासिक झलकियों के लिए.




