7 जून: गांधी जी का पहला सत्याग्रह, इज़राइल का ‘ऑपरेशन ओपेरा’
7 जून का इतिहास बताता है गांधी जी के पहले सत्याग्रह की कहानी, इज़राइल के 'ऑपरेशन ओपेरा' की कार्रवाई, वैटिकन सिटी की स्वतंत्रता, पनामा नहर का परीक्षण और विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस का महत्व. जानिए इस दिन से जुड़ी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं और आज का रोचक तथ्य.
हर तारीख इतिहास में कोई न कोई गवाही जरूर देती है. 7 जून का दिन भी इतिहास के पन्नों में (7 June Ka Itihas) कई बड़ी घटनाओं, आंदोलनों, जन्मों और उपलब्धियों के साथ दर्ज है. भारत से लेकर दुनिया तक, इस दिन ने कई ऐतिहासिक मोड़ों को जन्म दिया.
आज का इतिहास (History of the day) सीरीज़ में हम आपको ले चलते हैं समय की उस यात्रा पर, जहां 7 जून के दिन (7 June History) घटी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं, जन्मी महान हस्तियां और हुई अहम बदलावों की चर्चा करते हैं. यह सीरीज़ न केवल ऐतिहासिक जानकारी देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एक दिन कई मायनों में इतिहास का हिस्सा बन जाता है.
आइए, नजर डालते हैं 7 जून की कुछ अहम घटनाओं पर जो इसे एक खास तारीख बनाती हैं.
भारत और विश्व के इतिहास में 7 जून की प्रमुख घटनाएं
1494 – टॉर्डेसिलस की संधि
टॉर्डेसिलस की संधि (Treaty of Tordesillas) एक ऐतिहासिक समझौता था जो स्पेन (Spain) और पुर्तगाल (Portugal) के बीच 7 जून 1494 को स्पेन के टॉर्डेसिलस नामक स्थान पर संपन्न हुआ था. यह संधि कैथोलिक चर्च (The Catholic Church) और पोप अलेक्जेंडर VI (Pope Alexander VI) के मध्यस्थता प्रयासों के बाद हुई थी, जिनका उद्देश्य अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) के पार नई खोजी गई ज़मीनों के स्वामित्व विवाद को सुलझाना था. टॉर्डेसिलस की संधि ने पोप द्वारा खींची गई रेखा को थोड़ा पूर्व की ओर खिसका दिया. यह काल्पनिक रेखा ग्रीनविच (Greenwich meridian line) के पश्चिम में लगभग 370 लीग (लगभग 1,770 किमी) दूर खींची गई. इसके अनुसार, रेखा के पूर्व में आने वाली भूमि पुर्तगाल को और पश्चिम में आने वाली भूमि स्पेन को सौंप दी गई. जब 1500 में पेड्रो अल्वारेस काब्राल (Pedro Alvares Cabral) ने ब्राज़ील की खोज की, तो यह भूमि संधि की रेखा के पूर्व में थी, जिससे पुर्तगाल को उस पर अधिकार मिल गया. यह संधि आगे चलकर स्पेनिश और पुर्तगाली औपनिवेशिक साम्राज्यों की सीमाएं तय करने में मददगार साबित हुई. यह समझौता केवल स्पेन और पुर्तगाल के बीच हुआ था, अन्य यूरोपीय शक्तियों जैसे इंग्लैंड, फ्रांस और नीदरलैंड ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया.
1654 – लुई चौदहवें का राज्याभिषेक
फ्रांस (France) के सबसे प्रसिद्ध सम्राटों में से एक, लुई XIV (Louis XIV) का राज्याभिषेक 7 जून 1654 को रीम्स कैथेड्रल में हुआ था. वे "Le Roi Soleil" यानी "सन किंग" के नाम से प्रसिद्ध थे. उस समय लुई की उम्र सिर्फ 15 वर्ष थी. लुई XIV का जन्म 5 सितंबर 1638 को हुआ था और वे 1643 में मात्र 4 वर्ष की उम्र में फ्रांस के राजा बन गए थे, जब उनके पिता लुई XIII (Louis XIII) की मृत्यु हो गई. चूंकि लुई XIV बहुत छोटे थे, इसलिए उनकी मां ऐनी ऑफ ऑस्ट्रिया (Anne of Austria) ने उनके बचपन में राज्य संरक्षिका (Regent) के रूप में शासन किया, और शासन के प्रमुख मार्गदर्शक कार्डिनल मज़रिन (Cardinal Mazarin) थे. लुई XIV ने 72 वर्षों तक (1643–1715) फ्रांस पर शासन किया – यह किसी भी यूरोपीय सम्राट का सबसे लंबा शासनकाल माना जाता है.
1893 – गांधी जी का ‘सत्याग्रह’ की ओर पहला कदम
दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के पीटरमैरिट्सबर्ग स्टेशन (Pietermaritzburg Station) पर गांधी जी (Mohandas Karamchand Gandhi) को प्रथम श्रेणी (First Class) टिकट होने के बावजूद केवल नस्लीय भेदभाव के कारण ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया. यह घटना 7 जून 1893 को हुई थी. यही घटना उनके जीवन में आंदोलनकारी विचारधारा की शुरुआत बनी. गांधी जी ने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ सत्याग्रह (Satyagraha) की राह पकड़ी और उन्होंने पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन (Gandhi’s first act of civil disobedience) किया.
महात्मा गांधी उस समय एक युवा वकील थे और दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल क्षेत्र में एक भारतीय व्यापारी की कानूनी मदद के लिए गए थे. उन्होंने डरबन से प्रिटोरिया के लिए ट्रेन का प्रथम श्रेणी का टिकट लिया था. जब ट्रेन पीटरमैरिट्सबर्ग स्टेशन पर पहुँची, तो एक श्वेत यात्री ने ट्रेन अधिकारियों से शिकायत की कि गांधी एक "कुली" हैं और उन्हें प्रथम श्रेणी में यात्रा करने का अधिकार नहीं है. हालाँकि गांधी के पास वैध टिकट था, फिर भी उन्हें ट्रेन से जबरदस्ती उतारकर स्टेशन के प्रतीक्षालय में रात बिताने के लिए मजबूर किया गया. यह घटना एक ठंडी रात में हुई थी. उन्होंने महसूस किया कि केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका में बसे हजारों भारतीयों के लिए यह अन्यायपूर्ण व्यवस्था है. यहीं से उनके भीतर असमानता और अन्याय के विरुद्ध लड़ने की चेतना जागृत हुई. उन्होंने अन्याय के खिलाफ अहिंसक विरोध, सविनय अवज्ञा और सत्याग्रह के सिद्धांतों की नींव यहीं से रखी.
गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में लगभग 21 वर्षों तक प्रवास किया और वहाँ भारतीयों के नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए कई संघर्ष किए, जिनमें "पास कानूनों" के खिलाफ आंदोलन प्रमुख था.
1914 – 'पनामा नहर' के पहले जहाज का परीक्षण
SS Cristobal पहला जहाज था जो 7 जून 1914 को पनामा नहर (The Panama Canal) से "test transit" के रूप में गुजरा. यह कोई वाणिज्यिक यात्रा नहीं थी, बल्कि एक परीक्षण था जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि नहर पूरी तरह से संचालन योग्य है. पनामा नहर ने अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) और प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के बीच एक सीधा समुद्री मार्ग खोला. इससे जहाजों को दक्षिण अमेरिका के 'केप हॉर्न' (Cape Horn) को पार करने की आवश्यकता नहीं रही, जिससे समय और ईंधन की बहुत बचत हुई.
नहर का निर्माण 1904 से 1914 तक चला और यह लगभग 80 किलोमीटर (50 मील) लंबी है. यद्यपि पहला परीक्षण 7 जून 1914 को हुआ था, आधिकारिक उद्घाटन 15 अगस्त 1914 को हुआ, जब SS Ancon नामक जहाज ने नहर से पहली वाणिज्यिक यात्रा की. यह नहर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में क्रांति ले आई. अमेरिका को न केवल रणनीतिक लाभ मिला, बल्कि उसने वैश्विक व्यापार पर भी पूरा नियंत्रण स्थापित किया. पनामा नहर आज भी दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है.
1981 – इज़राइल का ‘ऑपरेशन ओपेरा’
इज़राइल (Israel) ने 7 जून 1981 को इराक (Iraq) के ओसिराक परमाणु रिएक्टर (Osirak Nuclear Reactor) पर सर्जिकल एयरस्ट्राइक (Surgical Airstrike) की. इस मिशन को ‘ऑपरेशन ओपेरा’ (Operation Opera) नाम दिया गया. इज़राइल को आशंका थी कि यह रिएक्टर इराक भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है, जिससे उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है. इसी खतरे को भांपते हुए, इज़राइली वायुसेना ने 8 F-16 और 6 F-15 विमानों के साथ बगदाद के पास तुआइथा (Tuwaitha) में स्थित रिएक्टर पर बेहद सटीक हवाई हमला कर उसे पूरी तरह तबाह कर दिया. विमान इज़राइल से उड़ान भरकर जॉर्डन और सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र को पार करते हुए इराक पहुँचे. हमला सिर्फ कुछ मिनटों में पूरा हो गया. रिएक्टर के निर्माणाधीन होने के कारण कोई परमाणु रिसाव नहीं हुआ, लेकिन 10 इराकी लोग, जिनमें एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक भी शामिल था, इस हमले में मारे गए.
संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और फ्रांस समेत कई देशों ने इस हमले की तत्काल निंदा की और इज़राइल की आलोचना की, लेकिन इज़राइल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया. ऑपरेशन ओपेरा को आज भी प्री-एम्पटिव स्ट्राइक (पूर्व-खतरे को निष्क्रिय करने) की मिसाल के तौर पर देखा जाता है.
7 जून को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1914 — ख़्वाजा अहमद अब्बास, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और उर्दू लेखक
1974 — महेश भूपति, भारत के टेनिस खिलाड़ी
7 जून को जिन हस्तियों ने दुनिया को कहा अलविदा
1954 — एलेन ट्यूरिंग, अंग्रेज़ गणितज्ञ और कम्प्यूटर वैज्ञानिक
2002 — बी डी जत्ती, फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति
7 जून को क्यों याद रखा जाए?
- विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day): हर साल 7 जून को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य सुरक्षित और पोषणयुक्त भोजन की महत्ता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. इस दिन को पहली बार 2019 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations - UN) द्वारा मान्यता दी गई थी, और इसे WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) और FAO (खाद्य और कृषि संगठन) मिलकर आयोजित करते हैं. खाद्य जनित रोगों को रोकने, स्वच्छता बनाए रखने और वैश्विक खाद्य आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है. 2025 की थीम है: “Food safety: science in action”.
आज का रोचक तथ्य
क्या आप जानते हैं कि 7 जून 1929 को वैटिकन सिटी (Vatican City) आधिकारिक रूप से एक स्वतंत्र देश बना था?
इटली (Italy) और पोप (Pope) के बीच हुई लेटरन संधि (Lateran Treaty) के तहत वैटिकन सिटी को संप्रभुता प्राप्त हुई. यह विश्व का सबसे छोटा देश है, जिसका क्षेत्रफल मात्र 44 हेक्टेयर है और जिसकी आबादी लगभग 800 लोगों की होती है. वैटिकन सिटी कैथोलिक चर्च का धार्मिक और प्रशासनिक केंद्र है, और यहीं पोप का निवास स्थान भी है. यह ऐतिहासिक संधि इटली के प्रधानमंत्री बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) और पोप पायस XI (Pope Pius XI) के प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षरित हुई थी, जिससे लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म हुआ और वैटिकन को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हुई.
आज भी वैटिकन सिटी दुनिया का एकमात्र देश है जो पूरी तरह एक धार्मिक संस्था द्वारा शासित होता है.
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